उम्मीद 2021- 'विश्वस्तरीय कारों का नया हब बन रहा भारत'

- नए दशक में मल्टी मॉडल सिस्टम वाला होगा हमारा सार्वजनिक परिवहन

By: विकास गुप्ता

Published: 29 Dec 2020, 03:35 PM IST

''देश के ऑटोमोबाइल क्षेत्र में अपार क्षमता है, और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहा है।ÓÓ ये कहना है ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट के. मुरली का। पत्रिका से खास बातचीत में उन्होंने देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर के वर्तमान और भविष्य पर बात की।

सवाल- देश का ऑटोमोबाइल क्षेत्र किस दिशा में बढ़ रहा है?
जवाब- भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र में अपार क्षमता है। स्थिति बीते दशक की तुलना में काफी उत्साहजनक है। नए दशक में हम एक बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं। भारत विकसित देशों की राह पर चल रहा है। इसे ऐसे समझिए कि बीएस 4 से बीएस 6 मॉडल अपनाने में हमें जहां तीन साल लगे, वहीं यूरो-4 से यूरो-6 को अपनाने में यूरोप को 6 से 7 साल का वक्त लग गया। भारत के लिहाज से यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है। सेफ्टी टेक्नोलाजी अपनाने में भी हम आगे हैं। हमारे यहां एयर बैग, एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम एवं इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी प्रोग्राम वाहनों के लिए अनिवार्य हैं।

सवाल-भविष्य में हमारा सार्वजनिक परिवहन कैसा होगा?
जवाब- एयर टैक्सी या होवर कार को लेकर कोविड से पहले कई बैठकें हुई थीं, लेकिन इसके लिए अभी बहुत समय लगेगा। मुरली के अनुसार, भविष्य में हम 'मल्टी मॉडलÓ सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें। हमारे पास विश्वस्तरीय कार मैन्युफैक्चरिंग की सुविधा है लेकिन हमारे पास अभी बाजार नहीं हैं। हमारे देश में विश्वस्तरीय कारों के निर्माण की क्षमता तो है, लेकिन उनका बाजार अब भी विकसित हो रहा है और जल्द ही ट्रैक पर होगा।

देश में बन रहे पाट्र्स, बने कार निर्यातक -
सवाल- कार बाजार की क्या स्थिति है?
जवाब- भारत नए मॉडल्स के लिए लांच पैड बनकर उभरा है। यहां का बाजार सस्ती कारों का है। कई कार सिस्टम और पाट्र्स अब देश में ही बन रहे हैं। हम 75 से 80 देशों को कार निर्यात कर रहे हैं।

सवाल- इलेक्ट्रिक कारों का भारत में क्या भविष्य है?
जवाब- इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्माण बहुत खर्चीला है। इसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर भी विकसित नहीं है। चार्जिंग स्टेशन,पार्किंग की समस्या है। लीथियम-आयन बैट्री अब भी चीन से आयात होती हैं।

नए ट्रांसपोर्ट के लिए तैयारी -
सवाल-हमारे शहर नए जमाने के ट्रांसपोर्ट के लिए तैयार हैं?
जवाब- हमारे शहर नए जमाने की तेज रफ्तार परिवहन प्रणाली के लिए अभी तैयार नहीं है। इसके लिए हमें हमें आज से ही शहरों को तैयार करना होगा, जो पहले से ही यातायात की समस्या से जूझ रहे हैं।

बिजली के लिए हम 75-80 फीसदी कोयले से उत्पन्न विद्युत पर निर्भर है। क्लीन मोबिलिटी अच्छा विचार है, लेकिन वैकल्पिक ऊर्जा और स्वदेशी तकनीक के बिना प्रदूषण से निपटना मुश्किल है।
(इंटरव्यू- संतोष तिवारी)

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