उम्मीद 2021 - पृथ्वी, वायु, जल, आकाश में उड़ेंगी 'कल्पनाएं'

- इलेक्ट्रिक कार और शेयर मोबिलिटी होंगे नए ट्रेंड
- सैटेलाइट आधारित होगा नए दौर का टै्रफिक कंट्रोल

यातायात को विकास की लाइफ लाइन कहा जाता है। आधुनिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकास की शीर्ष पांच कसौटियों में से एक है। दुनिया बदल रही है और उसी के साथ बदल रहा है हमारा परिवहन। वाहन अब उडऩे को तैयार हैं, हम 'बुलेट' की गति से यात्रा करेंगे। परिवहन के तरीकों के साथ ही शहर का भी कायाकल्प हो जाएगा। एक सदी पुराना ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम जल्द ही गुजरे जमाने की बात हो जाएगा। भारत में भी यातायात के साधन तेजी से बदल रहे हैं। आइए एक नजर डालते हैं, नए दशक की नई 'सवारी' पर...

अमरीका वर्तमान में 'नेक्स्टजेन' पर काम कर रहा है। यह एक उपग्रह-आधारित वायु यातायात नियंत्रण प्रणाली है, जिसे 2025 तक व्यवहारिक बनाने पर काम चल रहा है।

ईंधन के नए विकल्प रफ्तार का 'पावरहाउस' -
भविष्य में तेज गति के वाहन आज के परंपरागत ईंधनों पर नहीं चलेंगे। यही वजह है कि वैज्ञानिक अब पेट्रोल-डीजल के विकल्प के रूप में ज्यादा क्षमतावान बैट्री, बायोफ्यूल और ऊर्जा के नए विकल्प विकसित कर रहे हैं। जानते हैं भविष्य के वाहनों के लिए किस तरह की ऊर्जा विकसित की जा रही हैं।

ज्यादा क्षमता- इलेक्ट्रिक कारें ही हमारा भविष्य अमरीका, चीन, जापान भारत, ऑस्ट्रेलिया इसके काफी करीब हैं। चीन ने ऐसी बैट्री बनाई है जो आज इस्तेमाल होने वाली बैट्री की तुलना में १६ साल तक यानी करीब २० लाख किमी तक चलेंगी।

स्मार्ट रोड- जापान, डेनमार्क, नीदरलैंड्स, ताइवान और साउथ कोरिया में ऐसे स्मार्ट रोड्स भी बन रहे हैं जो इलेक्ट्रिक कारों को चार्ज करने के लिए मैग्नेटिक इंडक्शन तकनीक से लैस हैं। डामर के नीचे पाईजोइलेक्ट्रिक सामग्री, वाहन गुजरने पर करंट पैदा करती हैं।

स्वच्छ ऊर्जा-ईंधन-
2030 तक हम ऐसे भविष्य की ओर बढऩे लगेंगे जहां वाहनों से लेकर घरों तक हमारी ऊर्जा और ईंधन का सबसे बड़ा जरिया सौर ऊर्जा, जिओथर्मल पावर, पवन ऊर्जा और बायो ईंधन होगा। पवन व जल ऊर्जा उपयोग भी बढ़़ेगा।

2030 ऑटोनोमस कारों का बाजार 2026 तक 567 अरब डॉलर का होगा। 2030 तक चौथी और पांचवीं पीढ़ी के स्वचालित वाहनों का बाजार ही 60 अरब डॉलर का होगा। एलन मस्क की टेस्ला, ऐपल, गूगल और उबर इस क्षेत्र के बड़े खिलाड़ी बनकर उभरेंगे।

हवा से बातें: ड्रोन-एरियल वाहनों से बदलेगी तस्वीर -
ड्रोन और हवाई टैक्सी निकट भविष्य में हमारे रोजमर्रा की सवारी होंगे। शहर नए ट्रांसपोर्ट के अनुसार ढाले जाएंगे। इमारतों की छतों पर लैंडिंग पैड, चार्जिंग पॉइंट, ड्रोन पोर्ट और सीधे हवा में उड़ान भरने के लिए वर्टिकल टेकऑफ और लैंडिंग पैड बनाए जाएंगे। 'होवर स्पेस' नाम से नया यातायात सिस्टम बनेगा। ड्रोन-फ्लाइंग टैक्सी सैटेलाइट नेटवर्क से जुड़े होंगे। उडऩे के लिए डिजिटल हवाई हाइवे का उपयोग करेंगे।

देश में भी हाइपरलूप की चल रही है तैयारी -

लॉस एंजिल्स स्थित कंपनी हाइपरलूप ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी ने विजयवाड़ा और अमरावती के बीच हाइपरलूप रूट विकसित करने के लिए आंध्रप्रदेश सरकार के साथ समझौता किया है। वहीं हाइपरलूप वन ने मुंबई, बेंगलुरु और विशाखापत्तनम में हाइपरलूप रूट विकसित कर रही है।

'शिन्कासेन' बुलेट ट्रेन 2030 तक दौड़ सकती है -जापानी दूतावास ने हाल ही मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली पहली बुलेट ट्रेन की तस्वीरें जारी कीं हैं। ई 5 सीरीज की शिन्कासेन नाम की इस ट्रेन को जापान की बुलेट ट्रेन कहा जाता है। इसकी औसत गति 320 किमी प्रति घंटे और अधिकतम 350 किमी प्रतिघंटे है। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को साल 2023 तक पूरा करने की योजना है।

ड्राइवरलेस इलेक्ट्रिक बस और ट्रेन भी आ रही -
भारत की पहली चालक रहित दिल्ली मेट्रो ट्रेन 37 किमी लंबी मजेंटा लाइन पर शुरू हो गई। यह नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और बहादुरगढ़ में 390 किमी लंबा नेटवर्क कवर करेगी। वहीं मैग्नेटिक लेविटेशन या मैगलेव होवर ट्रेन को भी देश के ट्रांसपोर्ट का हिस्सा बनाने की योजना है।

स्वदेशी नेविगेशन मेक इन इंडिया पर भरोसा -
इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) ने भारतीय कारों के लिए खास नेविगेशन सिस्टम विकसित किया है। यह अमरीका के जीपीएस सर्विस सिस्टम से भी बेहतर है। सुरंग जैसी जगहों पर नेटवर्क न होने पर भी सटीक नेविगेशन डाटा उपलब्ध करवाएगा। टाटा मोटर्स अपनी कारों में स्वदेशी वायस असिस्टेंट 'व्हॉट३वड्र्स' शुरू करेगी।

Prediction for 2021
विकास गुप्ता
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