विवि बना मंदिर का अखाड़ा

विवि बना मंदिर का अखाड़ा
Subramanian Swamy

Shankar Sharma | Updated: 10 Jan 2016, 12:47:00 AM (IST) New Delhi, Delhi, India

अब दिल्ली विश्वविद्यालय राम मंदिर विवाद का अखाड़ा बन गया है। विहिप के दिवंगत नेता अशोक सिंघल द्वारा स्थापित शोध संस्थान अरुंधति अनुसंधान पीठ

नई दिल्ली. अब दिल्ली विश्वविद्यालय राम मंदिर विवाद का अखाड़ा बन गया है। विहिप के दिवंगत नेता अशोक सिंघल द्वारा स्थापित शोध संस्थान अरुंधति अनुसंधान पीठ के तत्वावधान में शनिवार को यहां राम मंदिर पर दो दिवसीय सेमिनार शुरू हुआ। भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी इस संगठन के अध्यक्ष हैं।

उद्घाटन भाषण में स्वामी ने कहा कि उन्होंने कहा था कि 2जी घोटाले में डी राजा जेल जाएंगे, तो उन्हें जेल जाना पड़ा। सेतुसमुद्रम के बारे में भी उन्होंने जो कहा था, वही हुआ। स्वामी ने कहा कि उन्हें यकीन है कि अयोध्या में राम मंदिर बनेगा। अब वे कह रहे हैं कि राम मंदिर बनेगा तो यह जरूर बनेगा। स्वामी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को अच्छा इंसान बताते हुए कहा कि उन्होंने कई बार सार्वजनिक मंचों से कहा कि देश में राम राज्य होना चाहिए। कांग्रेस भी चाहती है कि राम राज्य स्थापित हो। स्वामी ने दावा किया कि देश की 80 फीसदी आबादी राम मंदिर बनते हुए देखना चाहती है। उन्होंने राम मंदिर का विरोध करने वालों को असहनशील भी बता डाला।

भगवाकरण का आरोप
इससे पहले कांग्रेस छात्र संगठन एनएसयूआई, वामपंथी छात्र संगठन आइसा, आम आदमी पार्टी छात्र संघ समेत तमाम शिक्षकों ने इस सेमिनार का विरोध किया। उन्होंने विवि के बाहर प्रदर्शन कर आरोप लगाया कि डीयू का भगवाकरण किया जा रहा है। उनका विरोध इतना उग्र हो गया है कि पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार भी करना पड़ा। वहीं, भाजपा से जुड़ा छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इस सेमिनार के समर्थन में आगे आया है। सेमिनार के विरोध के मद्देनजर डीयू में आईटीबीपी और दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त जवान तैनात कर दिए गए हैं।

मंदिर निर्माण के ये कारण गिनाए
विहिप के दिवंगत संस्थापक अशोक सिंघल चाहते थे कि मंदिर बने।
इस देश की संस्कृति के पुनरुत्थान के लिए राम मंदिर बनना जरूरी है।
गुंबद में राम मंदिर था, ये सिद्ध हो चुका है। इसलिए मंदिर बनेगा।  
विरोध वो कर रहे हैं, जो जिन्हें अपनी राजनीति चमकानी है।

इन विषयों पर चर्चा
दो दिवसीय इस इस सेमिनार में इतिहासकार, पुरातत्वविद और कानून विशेषज्ञ विभिन्न विषयों पर चर्चा करेंगे। इन विषयों में भगवान राम का चरित्र और मूल्य, भारतीय संस्कृति में उनके प्रभाव, राममंदिर का इतिहास अैर संबंधित पुरातात्विक तथ्य, राम मंदिर से जुड़े कानूनी पहलू और राम मंदिर के अनुभव और भविष्य आदि शामिल हैं। इस दौरान राम मंदिर से जुड़े तथ्यों और रिसर्च पेपर भी पेश किए जाएंगे।

शिक्षक भी उतरे विरोध में
डीयू के कई शिक्षक भी इस सेमिनार के विरोध में उतर आए हैं। प्रोफेसर शाश्वती  मजूमदार ने कहा कि ये सेमिनार विभाजनकारी है। इस तरह के व्याख्यान विवि में नहीं होने चाहिए। वहीं, डीयू के अधिकारियों ने इस कार्यक्रम से अपना पल्ला झाड़ लिया है। उन्होंने कहा है कि उनका सेमिनार के विषय से कोई लेनादेना नहीं है। संगठन ने कार्यक्रम के लिए आयोजन स्थल बुक किया है, जो बाहरी लोगों के लिए किराए पर उपलब्ध है।
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