ठाकरे और कोश्यारी के बीच Letter War, हिंदुत्व और धर्मनिरपेक्षता है इसका सार

  • राज्यपाल बीएस कोश्यारी ने पत्र लिखकर पूछा कि क्या सीएम धर्मनिरपेक्ष बन गए हैं।
  • उद्धव ठाकरे ( Uddhav Thackeray ) ने कहा कि उन्हें राज्यपाल से हिंदुत्व का "प्रमाण पत्र" की आवश्यकता नहीं।
  • महाराष्ट्र में धार्मिक स्थलों को खोलने के समय को टालने के बारे में गवर्नर ने लिखा पत्र।

मुंबई। महाराष्ट्र विकास अगाड़ी (एमवीए) सरकार और महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के बीच राज्य में धार्मिक स्थलों के खुलने पर तनातनी बढ़ गई है। इस मुद्दे पर कोश्यारी के पत्र का जवाब देते हुए, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ( Uddhav Thackeray ) ने कहा कि उन्हें राज्यपाल से हिंदुत्व पर "प्रमाण पत्र" लेने की आवश्यकता नहीं है।

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राज्यपाल द्वारा पूजा स्थलों को फिर से खोलने पर एक पत्र के जवाब में ठाकरे ने वापस लिखा कि उनका हिंदुत्व उन्हें एक ऐसे व्यक्ति का स्वागत करने की अनुमति नहीं देता है जिसने मुंबई को 'पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर' कहा था।

मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा कि जहां सरकार सक्रिय रूप से मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों को खोलने की मांग के बारे में सोच रही है, लेकिन इसका प्राथमिक दायित्व महामारी के दौरान लोगों की सुरक्षा है।

सोमवार 12 अक्टूबर को लिखे पत्र में गवर्नर ने कहा था, "मुझे आश्चर्य है कि क्या आपको पूजा स्थलों को फिर से खोलने के के समय को टालते रहने के लिए कोई दैवीय चेतावनी मिल रही है या आपने अचानक खुद को 'धर्मनिरपेक्ष' बदल दिया है, जिस शब्द से आपको नफरत है?"

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पत्र का जवाब देते हुए, सीएम ने कहा, "क्या आपका मतलब है कि धार्मिक स्थानों को खोलना हिंदुत्व है, और उन्हें नहीं खोलने का मतलब है धर्मनिरपेक्ष होना? धर्मनिरपेक्षता आपके द्वारा राज्यपाल के रूप में ली गई शपथ का एक महत्वपूर्ण आधार है। क्या आपको इस पर विश्वास नहीं है?"

ठाकरे ने कहा कि उन्हें हिंदुत्व के प्रचार की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने लिखा, "सर, आप अपने पत्र में हिंदुत्व का उल्लेख किया है, लेकिन मुझे आपसे हिंदुत्व पर किसी भी प्रमाण पत्र या किसी भी शिक्षण की जरूरत नहीं है। मेरा हिंदुत्व मुझे उस व्यक्ति का स्वागत करने की अनुमति नहीं देता है जिसने मेरे महाराष्ट्र या मुंबई को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को बुलाया था।"

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अमित कुमार बाजपेयी
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