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12 गांवों में 1313 किसानों के साथ रोपे जाएंगे 40 हजार फलदार पौधे

ग्रामीणों की आजीविका के साथ प्राकृतिक संतुलन में सहायक होंगे फलदार पौधेडिंडौरी. लगातार कम हो रहे वन क्षेत्र, बढ़ते प्राकृतिक असंतुलन और आजीविका के प्राकृतिक संसाधनों की कमी के बीच जिले के बैगाचक क्षेत्र से एक अच्छी शुरुआत हुई है। बैगाचक क्षेत्र के खम्हेरा गांव में ग्रामीणों की आजीविका के लिए अरण्या परियोजना की शुरुआत […]

डिंडोरीMay 25, 2024 / 12:25 pm

Prateek Kohre

ग्रामीणों की आजीविका के साथ प्राकृतिक संतुलन में सहायक होंगे फलदार पौधे
डिंडौरी. लगातार कम हो रहे वन क्षेत्र, बढ़ते प्राकृतिक असंतुलन और आजीविका के प्राकृतिक संसाधनों की कमी के बीच जिले के बैगाचक क्षेत्र से एक अच्छी शुरुआत हुई है। बैगाचक क्षेत्र के खम्हेरा गांव में ग्रामीणों की आजीविका के लिए अरण्या परियोजना की शुरुआत की गई है। इसे लेकर जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया। कलेक्टर विकास मिश्रा ने इस कदम की सराहना की है साथ ही उन्होंने इस प्रोजेक्ट की सफलता के लिए हर संभव मदद का आश्वासन भी दिया है। कार्यशाला में इस परियोजना का उद्देश्य बताया गया कि परियोजना के माध्यम से प्राकृतिक संसाधन संरक्षण व प्रबंधन, वन प्रबंधन कार्य योजना, कृषि विकास और प्राकृतिक खेती, फल उद्यान स्थापना एवं विकास, जैव संसाधन केंद्र की स्थापना और लघु वन उपज एवं कृषि उत्पाद मूल्य संवर्धन एवं प्रसंस्करण केंद्र की स्थापना की जाएगी। परियोजना एसबीआई फाउंडेशन के सहयोग से निवसीड संस्था द्वारा संचालित की जाएगी।
यह होगा परियोजना में
निवसीड के जिला समन्वयक बलवंत राहंगडाले ने बताया कि यह परियोजना 3 वर्षों में पूर्ण होगी। इसके तहत अजगर, गौरा कन्हारी, किवाड़ और खम्हेरा पंचायत के 12 गांव के 1313 किसानों के साथ 40 हजार फलदार पौधों का रोपण किया जाएगा। इसके लिए गांव से ही जंगल सखी के सहयोग से यह कार्य होगा। इन पौधों में आम, कटहल, आंवला, नीबू, मुनगा सहित अन्य पौधों का रोपण किया जाएगा। इसी तरह 12 गांव के 1200 हेक्टेयर खाली पड़ी भूमि पर एग्रो फॉरेस्ट्री के तहत अर्जुन, साजा, बेल, चार, महुआ, तेंदू सहित अन्य पौधों का रोपण किया जाएगा। इनकी संख्या 10 लाख होगी। समुदाय की सहभागिता से यह पूरा कार्य होगा। इससे फायदा यह होगा कि ग्रामीणों को फलदार पौधों से अतिरिक्त आजीविका का साधन बनेगा वहीं एग्रो फॉरेस्ट्री से पर्यावरण संतुलन बनेगा। पूरी प्रक्रिया में समुदाय की सहभागिता महत्वपूर्ण रहेगी। पौधों की उपलब्धता, सिंचाई की व्यवस्था, तकनीकी मार्गदर्शन संस्था द्वारा किया जाएगा। वहीं वन विभाग भूमि की उपलब्धता, पौधों की उपलब्धता सहित समुदाय को तैयार करने में सहयोग करेगा। ग्रामीणों की सहभागिता के लिए मिलेट मिशन के तहत मिलेट्स का उत्पादन कराया जाएगा।
पूरी प्रक्रिया का हो सामाजिक अंकेक्षण
कलेक्टर विकास मिश्रा ने कार्यशाला में पहुंच इस प्रोजेक्ट की सराहना की। उन्होंने प्रोजेक्ट के लिए कृषि विज्ञान केंद्र को सहयोग देने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि कार्य के प्रगति की समीक्षा की जाए। ग्राम पंचायतों की सहमति व प्रस्ताव के बाद कार्य किए जाएं। इसमें समुदाय की भूमिका हो ताकि वह भी अपना जुड़ाव महसूस कर सकें। पूरी प्रक्रिया का सामाजिक अंकेक्षण हो।
पंचायत भवन में किया पौधरोपण
प्रोजेक्ट की सांकेतिक शुरुआत कार्यशाला उपरांत की गई। इस दौरान ग्रामीणों, अधिकारियों सहित संस्था के सदस्यों ने पंचायत भवन में फलदार पौधों का रोपण किया। कार्यशाला में सरपंच कौशल्या कुशराम, जनपद उपाध्यक्ष राधे श्याम कुशराम, कलेक्टर विकास मिश्रा, जनपद पंचायत सीईओ, कृषि विज्ञान केंद्र से वैज्ञानिक पी एल अंबुलकर, कृषि विभाग से उपसंचालक अभिलाषा चौरसिया, नेहा धुरिया, रेंजर अभिषेक सिंह, बीआरसी ब्रजभान सिंह गौतम, निवसीड रीजनल डायरेक्टर विमल दुबे, जिला समन्वयक बलवंत राहंगडाले कार्यक्रम समन्वयक गौरव गुप्ता मौजूद रहे।

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