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आचार्य पीयूष सागर सूरीश्वर का गाजे-बाजे के साथ नगर प्रवेश

बीकानेर. जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ के आचार्य जिन पीयूष सागर सूरीश्वर ने अपने सहवृति 17 मुनियों के साथ रविवार को गाजे-बाजे के साथ नगर प्रवेश किया। इस अवसर पर पूर्व में बीकानेर में मौजूद 18 साध्वीवृंद, सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं और शिवबाड़ी के गंगेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर परिसर में 27 जून को प्रतिष्ठित होने वाली 9 जिन प्रतिमाएं भी […]

बीकानेरJun 16, 2024 / 11:43 pm

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बीकानेर.

जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ के आचार्य जिन पीयूष सागर सूरीश्वर ने अपने सहवृति 17 मुनियों के साथ रविवार को गाजे-बाजे के साथ नगर प्रवेश किया। इस अवसर पर पूर्व में बीकानेर में मौजूद 18 साध्वीवृंद, सैकड़ों श्रावक-श्राविकाएं और शिवबाड़ी के गंगेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर परिसर में 27 जून को प्रतिष्ठित होने वाली 9 जिन प्रतिमाएं भी शामिल रही। आचार्य की नगर प्रवेश शोभायात्रा गोगागेट के बाहर िस्थत गौडी पार्श्वनाथ मंदिर से रवाना होकर डागा मोहल्ला, चिंतामणि जैन मंदिर भुजिया बाजार, नाहटा चौक के भगवान आदिनाथ मंदिर, रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज का उपासरा, डागा सेठिया पारख मोहल्ला, कोचरों व बेगानियों का चौक होते हुए ढढ्ढा चौक पहुंची। कई स्थानों पर गवली सजाकर, स्वागत द्वार लगाकर आचार्य का स्वागत अभिनंदन व वंदन किया गया। ढढ्ढा चौक में धर्मसभा का आयोजन हुआ।
ये रहे शामिल

शोभायात्रा में साध्वी विजय प्रभा, साध्वी चंदनबाला, साध्वी मृगावती, साध्वी प्रभंजना, सुजेष्ठा , सुव्रता , चिद्यशा सहित 18 साध्वीवृंद श्री जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ, श्रीसुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट, श्री गंगेश्वर पार्श्वनाथ मंदिर जीर्णोद्धार समिति, श्री गंगेश्वर पार्श्वनाथ प्रतिष्ठा समिति श्री वर्द्धमान नवयुवक मंडल, श्री जिनेश्वर युवक परिषद, श्री जिनेश्वर महिला मंडल, विचक्षण महिला मंडल, श्री खरतरगच्छ युवक परिषद, श्री खरतरगच्छ महिला परिषद, ज्ञान वाटिका के बच्चे, श्री चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास के अध्यक्ष निर्मल धारीवाल, विजय कोचर, रविन्द्र रामपुरिया, प्रताप रामपुरिया के साथ विभिन्न गच्छ व पंथ के श्रावक-श्राविकाओं के साथ देश के विभिन्न इलाकों से आए श्रावक-श्राविकाओं ने भागीदारी निभाई।
देव, गुरु व धर्म के प्रति समर्पण रखे

ढढ्ढा चौक में हुई धर्म सभा में आचार्य जिन पीयूष सागर सूरिश्वर ने कहा कि प्रवेश के समय श्रावक-श्राविकाओं ने जो उत्साह, देव, गुरु व धर्म के प्रति समर्पण दर्शाया है वह चातुर्मास काल व उसके बाद निरन्तर रखे। मुनि सम्यक रत्न सागर ने कहा कि चातुर्मास के दौरान मुनि व साध्वी वृंद के साथ धर्म-आध्यात्म का संबंध रखते हुए अपने आत्म का अवलोकन करते हुए उसके कल्याण के लिए प्रयास व पुरुषार्थ करें। साध्वी मृगावती , साध्वी चंदन बाला, मुनि सत्व रत्न, मुनि समर्थ रत्न, शाश्वत रत्न व मुनि समवेग रत्न आदि ने प्रवचन किए।

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