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सड़क निर्माण से पहले हर विभाग से पहले मिले एनओसी

– श्रीगंगानगर के जागरुक नागरिकों ने टॉक शो में खुलकर की बातें सांझा
सड़क निर्माण से पहले हर विभाग से पहले मिले एनओसी

श्री गंगानगरJun 17, 2024 / 12:20 am

surender ojha

श्रीगंगानगर। राज्य सरकार जुलाई में अपना पहला पूर्ण बजट पेश करेगी। बजट को लेकर लोगों से सुझाव भी मांगे गए हैं। रविवार को राजस्थान पत्रिका की ओर से नेहरू पार्क के सामने श्रीगुरुनानक गर्ल्स कॉलेज पीजी कॉलेज कैम्पस में आयोजित टॉक शो में इलाके के जागरूक नागरिकों ने अपनी बात खुलकर सांझा की। इस दौरान लोगों का कहना था कि इलाके में सड़कों की गुणवत्ताहीन बनने से चंद दिनों में बिखर जाती हैं। वहीं दूसरी बड़ी वजह सड़क पर कोई न कोई विभाग या एजेंसी तोड़फोड़ करने के लिए कुंदाली मारने को तैयार हैं। कभी सीवर लाइन तो कभी वाटर लाइन तो कभी मोाबइल केबल बिछाने तो कभी बिजली की तारों को अंडरग्रांउड बिछाने के नाम से सड़कों को खोदा जा रहा हैं। ऐसे में सड़क निर्माण से पहले हर विभाग और एजेंसी से बकायदा एनओसी लेनी चाहिए ताकि वह भविष्य में कम से कम पांच साल किसी भी सड़क को अनावश्यक रूप खोदने का प्रयास नहीं हो।

तालमेल नहीं होने से सड़कें बनी प्रयोगशाला

पूर्व पार्षद डा. भरतपाल मय्यर का कहना था कि सरकारी विभागों का आपस में तालमेल नहीं हैं। इस वजह से कोई वाटर लाइन बिछाने के नाम से तो कोई केबल बिछाने के नाम से सड़क को तोड़ने को आमदा हैं। ऐसे में जिला प्रशासन एक समन्वय कमेटी बनाएं उसमें तय हो कि सड़क निर्माण से पहले सारी सुविधाएं पहले पूरी की जाएं, इसके बाद ही एनओसी लेकर सड़क का निर्माण हो। वहीं सुरेन्द्र सिंह का कहना था कि शहर का विस्तार तीस किमी तक बढ़ चुका हैं लेकिन अभी तक सिटी बस संचालित करने की प्रक्रिया में एक कदम भी नहीं बढ़ाया गया हैं। इस वजह से शहर में टैम्पूओं की संख्या लगातार बढती जा रही है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट होगा तो ट्रैफिक व्यवस्था भी सुचारू रूप से संचालित होगी। इसके साथ साथ लोगों को शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक आवाजाही में भी राहत मिल सकेगी।

गुणवत्ता जांचने के लिए डबल चैकिंग हो

​शिक्षक प्रेम कुमार कामरा का कहना है कि सड़कों के नाम पर बड़ा बजट सरकार खर्च करती हैं लेकिन उसकी गुणवत्ता जगजाहिर हैं। ऐसे में जितना बजट आवंटित होता हैँ उतना बजट सड़क निर्माण खर्च होता है या नहीं, इसकी डबल चैकिंग करने का प्रावधान अब नहीं हैं। ऑडिट टीम जब जाती है तब तक संबंधित नगर परिषद बोर्ड या सरकार का कायैकाल खत्म हो जाता हैं। ऐसे में दो से तीन बार मॉनीटरिंग के साथ साथ क्रॉस चैकिंग जरूरी हैं। वहीं भीमसेन बोले कि सड़क निर्माण के उपरांत किसी भी अधिकारी या संस्थान या महकमे की जवाबदेही तय नहीं हैं। ऐसे में सड़क निर्माण तक फोकस किया जाता हैं। जरूरत अब इस बात की है कि सड़क निर्माण के दौरान खामियां या गुणवत्ता संबंधित कमजोर पहलू हैं तो संबंधित जेईएन, एईएन और एक्सइएन को जवाबदेही होना चाहिए। खराब सड़क बनने पर ऐसे अभियंताओं से बजट की वसूली की जानी चाहिए।

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