scriptDiksha Kalyanak Varghoda to Saver Jainmay | दीक्षा कल्याणक वरघोड़ा से सांवेर जैनमय | Patrika News

दीक्षा कल्याणक वरघोड़ा से सांवेर जैनमय

अंजनश्लाका प्रतिष्ठा: नगर के रास्ते छोटे पड़ गए आदिनाथ के वरघोड़ों के आगे

Published: May 12, 2022 01:03:15 am

सांवेर. नगर में धार्मिक रथयात्रा, शोभायात्रा या जुलूस के मामले में बुधवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। ऐतिहासिक अंजनश्लाका प्रतिष्ठा महोत्सव के अनुरूप भगवान आदिनाथ का दीक्षा कल्याणक वरघोड़ा या रथयात्रा ने भी इतिहास रच दिया कि आधा दर्जन बैंड पार्टियां, हाथी, घोड़े, ऊंट, दर्जनभर बग्घी या रथ के साथ इतना लंबा वरघोड़ा निकला कि सांवेर नगर का मुख्य छोटा नजर आने लगा। स्वागत अभिनंदन ऐसा हुआ कि जैन या हिन्दूजन ही नहीं बल्कि मुस्लिमजनों ने भी दिल खोलकर इस्तकबाल किया। बुधवार को सांवेर नगर एक तरह से जैनमय हो गया था।सांवेर में नवीन जिनालय में प्रभु आदिनाथ की प्राचीन प्रतिमा के अंजनश्लाका प्रतिष्ठा महोत्सव का सबसे बड़ा जलसा बुधवार को दिव्य और भव्य जुलूस के रूप में रहा। प्रभु आदिनाथ के दीक्षा कल्याणक वरघोड़ा के रूप में जो रथयात्रा निकली ऐसी विशाल रथयात्रा नगर और क्षेत्र के लोगों ने कम से कम सांवेर में तो कभी नहीं देखी थी। प्रात: 9.30 बजे आयोजन स्थल अयोध्याधाम से निकला या वरघोड़ा दोपहर 1.30 बजे आकर विसर्जित हुआ। इसकी लंबाई का अनुमान लगाया जा सकता है कि आगे का छोर कन्याशाला मार्केट की ओर से अजनोद मार्ग को छू रहा था तब आखिरी सिरा अर्थात आचार्यश्री और साध्वी भगवंतों का समूह जैन मंदिर के आसपास ही था। रथयात्रा की शुरुआत से लेकर आखिर तक जगह जगह पुष्पवर्षा करके अभिनंदन किया गया।
दीक्षा कल्याणक वरघोड़ा की भव्यता इस महा आयोजन के सृजक आचार्य जितरत्नसागर सुरिश्वरजी की भावना और निर्देश के अनुरूप ही रही। वरघोड़ा की छटा देखकर हर कोई अभिभूत था। जैन पताकाएं लेकर आगे-आगे घोड़े चल रहे थे, तो उनके बाद करीब एक दर्जन से ज्यादा स्थानीय और अन्य स्थानों से आए महिला मंडल नाचते-झूमते चल रहे थे। हर महिला मंडल की एक जैसी किन्तु आकर्षक वेशभूषा थी। महिला मंडलों के बाद हाथी और ऊंट सवारों के साथ कतारबद्ध होकर एक दर्जन से ज्यादा रथ और बग्घियां चल रही थीं, जिनमें लाभार्थी सवार थे। इनके बाद केशरिया पोषक में ढोलताशे के नाद पर थिरकते युवाओं की टोली के साथ साथ सांवेर के प्राचीन मंदिर और उपाश्रय के उद्धारक जैनाचार्य जितरत्नसागर सुरिश्वर महाराज, आचार्य चंद्ररत्नसागर सुरिश्वरजी महाराज और साध्वी सूर्यकांता श्रीजी, साध्वी सौम्यवंदना श्रीजी, साध्वी राजिता श्रीजी, निर्मिता श्रीजी, अर्हमव्रता श्रीजी और अन्य श्रमण-श्रमणियां चल रहे थे। इनके आगे गुलाबी कुर्तों और साफों में सजे धजे नवरत्न परिवार के युवा नाचते-गाते और वरघोड़ा का संचालन करते चल रहे थे। रथयात्रा के अंतिम छोर पर बैलों की सहायता से चलायमान रजतरथ थे। इस ऐतिहासिक वरघोड़ा की शोभा बढ़ाने में महिला मंडलों में सांवेर के आनंद मनोहर महिला मंडल, वीरमणी महिला मंडल ए पद्मावती बहू मंडल, बालिका मंडल, इंदौर के पाश्र्वमणि महिला बैंड मंडल सुखदेव नगर, तिलकेश्वर पाश्र्व पूजा महिला मंडल तिलकनगर, महिला मंडल महावीर बाड़ा इंदौर, वीर मणिभद्र मंडल कालानी नगर, सामइक महिला मंडल कालानी नगर, राजविहार महिला मंडल खाराकुंआ उज्जैन, जैन महिला मंडल नयापुरा उज्जैन के महिला मंडल की खास भूमिका रही, जबकि नगर भुरु भाई का राज म्यूजिक बैंड, इंदौर का राजकमल बैंड और पाश्र्वनेमी जैन बैंड कांदिवली वेस्ट मुंबई के साथ अन्य बैंड पार्टियों ने जैन तीर्थंकरों, आचार्य और साधु-साध्वी भगवंतों के गुणगान वाले मनभावन गीतों और भजनों से सुबह से दोपहर तक सांवेर नगर का माहौल जैनमय बनाए रखा। पूरे जुलूस मार्ग को स्वच्छ काने के बाद मार्ग पर हर दस कदम पर आकर्षक रंगोली बनाई गई थी, जो सांवेर में पहली बार देखने को मिला।
राजपाट का त्याग, दिव्य वेश धारण किया: वरघोड़े के दूसरी और आयोजन स्थल अयोध्याधाम में बुधवार को प्रभु आदिनाथ का दीक्षा कल्याणक वृतांत का मंचन हुआ। संगीतकार त्रिलोक मोदी द्वारा आचार्यश्री जितरत्नसागरजी और चंद्ररत्नसागरजी की मंच पर उपस्थिति में ऋषभदेव के राजपाट त्यागकर संयम के मार्ग पर जाने, वस्त्र त्यागकर कर इंद्र के हाथों दिव्य वस्त्र धारण करने, केशलोच और प्रथम विहार करने के वृतांत का ऐसा मार्मिक और भावविव्हल करने वाला प्रस्तुतिकरण करवाया गया कि मंच पर विराजमान आचार्य द्वय और पांडाल में विराजित साध्वी मंडल समेत अधिकांश महिलाएं ही नहीं पुरुषों की आंखें नम ही नहीं हुई बल्कि बहने भी लगी थी। संध्याकाल में ऋषभदेव के दीक्षा लेकर प्रथम विहार के निमित्त आचार्यद्वय आदिनाथ की प्रतिमा लेकर मंदिर तक गए। मध्यरात्रि को नवीन मंदिर में आदिनाथ की अंजनशलाका संपन्न होगी। बुधवार को प्रात: नवकारसी के लाभार्थी मांगीलाल कोठारी परिवार, दोपहर के साधर्मिक स्वामी वात्सल्य के लाभार्थी श्री मेडिकल खाबिया परिवार और संध्याकाल के स्वामी वात्सल्य के लाभार्थी नगीनचंद, विनय पगारिया परिवार रहे।
आज नगर चौरासी अर्थात महाभोज
गुरुवार अंजनश्लाका प्रतिष्ठा महोत्सव का लगभग समापन दिवस है। इस अवसर पर नगर चौरासी अर्थात नगरवासियों का महाभोज रखा गया है। संपूर्ण नगरवासियों को इस महास्वामी वात्सल्य में भोजन ग्रहण करने का निमंत्रण खुले ऐलान के माध्यम से और सोशल मीडिया पर निमंत्रण-पत्र प्रसारित कर दिया गया है। इस महाभोज में दस हजार से अधिक लोगों के भोजन का प्रबंध किया जा रहा है। नगरभोज आयोजन स्थल अयोध्याधाम के विशाल पंडाल में प्रात: 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक चलेगा। जाति , संप्रदाय सभी को भुलाकर सभी नगरवासियों के लिए नगरभोज का ऐसा आयोजन पहली बार हो रहा है।
मुस्लिमों ने बरसाए फूल
सांप्रदायिक सौहार्द के मामले में सांवेर की मिसाल दी जाती रही है। बुधवार को भी यही रवायत देखने को मिली। अंजनश्लाका प्रतिष्ठा महोत्सव स्थल से वरघोड़े की रवानगी के साथ सबसे पहले छोटा इमामबाड़ा की मुस्लिम पंच कमेटी ने ही स्वागत की शुरुआत की। यहां वहीद भाई, मस्जिद कमेटी सदर हाजी न्याज खां लाइनमैन, मोहम्मद हनीफ कुरैशी, इसहाक खां पठान, मंजर मस्तान, शफी मिर्चीवाले, जाहिद खां, भय्यू किराणा वाले, इस्माईल मैकेनिक, आबिद ठेकेदार सहित अनेक मुस्लिम युवाओं ने वरघोड़े पर फूल बरसाकर जैनाचार्य के आगे सर झुकाकर अपनी सद्भावना प्रकट की। मिर्जा गली में मुस्लिम पंच कमेटी बड़ा इमामबाड़ा और आल मुस्लिम हजरात की ओर से ईदू खान लाइनमैन, हाजी शब्बू मामू, अली हुसैन चूड़ीवाला, हाजी मुन्ना भाई चूड़ीवाले, शकील फूलवाले, हब्बू पहलवान आदि ने भी रथयात्रा पर मोहब्बत के फूल तो बरसाए। साथ ही आचार्यश्री के आगे सिर झुकाकर आदाब पेश किया। दिलचस्प नजारा तो मेन तिराहे के पास नजर आया कि यहां मदनी परिवार की ओर से जुलूस पर फूल बरसाने के अलावा आचार्यश्री की नारियल अक्षत से गहुली भी की, जो अमूमन जैन परिवारों की ही परंपरा है। अहिंसा के पुजारियों का आयोजन होने से सांवेर में मुस्लिमजनों ने गुरुवार को मांसाहार की सभी दुकानें भी बंद रखने का फैसला किया है। सांवेर में मुस्लिमों के इस सद्भाव की आचार्य जितरत्नसागरजी ने जमकर तारीफ की है।
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