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स्वतंत्रता सेनानियों को जाति नेताओं के रूप में चित्रित न करें: राज्यपाल

राज्यपाल आरएन रवि ने इस बात पर अफसोस जताया कि आजकल स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों व सेनानियों को जाति के नेताओं के रूप में चित्रित किया जाता है। 16 जून 1801 को तिरुचि में जबूधिवु उद्घोषणा के रूप में ज्ञात पहले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की स्मृति और अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों पर 89 किताबें लिखने और […]

चेन्नईJun 17, 2024 / 02:09 pm

P S VIJAY RAGHAVAN

RN ravi

राज्यपाल आरएन रवि ने इस बात पर अफसोस जताया कि आजकल स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों व सेनानियों को जाति के नेताओं के रूप में चित्रित किया जाता है। 16 जून 1801 को तिरुचि में जबूधिवु उद्घोषणा के रूप में ज्ञात पहले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की स्मृति और अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों पर 89 किताबें लिखने और शोध करने वाले विश्वविद्यालय के शोधार्थियों के समान में राजभवन में रविवार को राज्यपाल आरएन रवि की अध्यक्षता में समारोह आयोजित हुआ।

राज्यपाल के निजी सचिव किर्लोश कुमार, तमिलनाडु डॉ. अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी के कुलपति संतोष कुमार, पंजालंगुरिची पोर पुस्तक के लेखक सेंथिल कुमार, वरिष्ठ पत्रकार कोलप्पन, विश्वविद्यालयों के कुलपति, शोध छात्रों, प्रोफेसर, स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों के परिजनों और कई अन्य लोगों ने इसमें भाग लिया। राज्यपाल आरएन रवि ने तमिलनाडु डॉ. अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी के कुलपति संतोष कुमार की संकलित ’स्वतंत्रता संग्राम में वकीलों की भूमिका’ नामक पुस्तक की पहली प्रति का विमोचन किया।

बलिदान का समान करें: 

कार्यक्रम में राज्यपाल आरएन रवि ने कहा, भारत की आजादी के लिए कई लोगों ने अपना खून बहाया है. उनमें से कई अज्ञात हैं, जब उन्होंने राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला, तो उन्होंने इन गुमनाम शहीदों को सामने लाने का प्रयास किया। नतीजतन, आज कई स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को प्रकाश में लाया गया है। यह स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान ही है, कि हम आज आजादी की हवा का आनंद ले रहे हैं। हमें स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का समान करना चाहिए।

अज्ञात शहीदों का इतिहास लाएं सामने

राज्यपाल ने प्रेरणा दी कि हमें स्वतंत्रता सेनानियों को कभी नहीं भूलना चाहिए। अगर अभी भी आजादी के अज्ञात शहीद कहीं हैं तो उनका बलिदान भी सामने लाया जाना चाहिए। आज स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को जातीय नेताओं के रूप में चित्रित किया जाता है, इससे बचना चाहिए। केवल शहीदों शहीदों के स्मारकों व चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित करने को ही उनका समान नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि आज की पीढ़ी को उन शहीदों, सेनानियों के इतिहास को जानना चाहिए।

शोधार्थियों और प्रोफेसर का समान

RN ravi

 अन्ना यूनिवर्सिटी, तिरुनेलवेली मनोनमनियम सुंदरनार यूनिवर्सिटी, भारतीदासन यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु ओपन यूनिवर्सिटी, इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु एजुकेशन यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु डॉ. अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी सहित कई विश्वविद्यालयों के 89 शोधार्थियों, जिन्होंने अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों पर शोध कार्य किया है। उनके मार्गदर्शक प्रोफेसरों के साथ स्वर्ण पदक व स्मृति चिन्ह देकर समानित किया।

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