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हड़ताल के चलते लुट रही जनता, विकल्प बने ऑटो-चैम्पियन वसूल रहे मनमर्जी का किराया

जिला प्रशासन और बस एसोसिएशन के बीच सामांजस्य बनता नजर नहीं आ रहा है। अधिकारी और बस ऑपरेटर्स दोनों ही अपनी-अपनी जिद पर अड़े हैं, जिसके चलते चौथे दिन रविवार को भी हड़ताल समाप्त नहीं हो सकी।

सागरJun 17, 2024 / 12:30 pm

Madan Tiwari

बस ऑपरेटर्स की हड़ताल जारी

बस ऑपरेटर्स की हड़ताल जारी

कम दूरी का सफर भी वाहन बदल-बदलकर करना पड़ रहा, हाइवे पर जहां-तहां यात्रियों की भीड़

सागर. जिला प्रशासन और बस एसोसिएशन के बीच सामांजस्य बनता नजर नहीं आ रहा है। अधिकारी और बस ऑपरेटर्स दोनों ही अपनी-अपनी जिद पर अड़े हैं, जिसके चलते चौथे दिन रविवार को भी हड़ताल समाप्त नहीं हो सकी। यात्री बसों के पहिए थमने के बाद लोगों को विकल्प बने ऑटो-चैम्पियन भी मनमर्जी से वसूली कर रहे हैं। लोगों को जिस यात्रा को करने में 20 से 25 रुपए किराया लगता था अब उन्हें उसके लिए 50 से 70 रुपए तक देने पड़ रहे हैं, जिससे आमजन की जेब ढीली हो रही है, लेकिन इस ओर शासन-प्रशासन का ध्यान ही नहीं है।
पत्रिका ने रविवार को हड़ताल के चलते शहर के आसपास के चौक-चौराहों का जायजा लिया, तो पता चला कि कम दूरी की यात्रा के लिए लोग ऑटो-चैम्पियन से सफर कर रहे हैं। इसमें यात्रियों से ज्यादा किराया लेने की तो शिकायतें मिली ही हैं, साथ ही यह ओवरलोड भी चल रहे हैं, जिससे हादसों का खतरा बढ़ गया है। बैठने के लिए जगह न मिलने के बाद भी लोग मजबूरी में इन ऑटो-चैम्पियन से सफर करने मजबूर हैं। जहां-तहां हाइवे पर लोगों की भीड़ नजर आ रही है, जो मालवाहकों से सफर करने तक में परहेज नहीं कर रहे हैं।

– दूसरे जिलों से आने वाली बसें फुल

जिले के बस ऑपरेटर्स की ओर से हड़ताल के चलते दूसरे जिलों से आने वाली यात्री बसों में भी लोगों को जगह नहीं मिल रही है। सागर से होकर गुजरने वाली बसें पहले से ही ठसाठस भरी आ रहीं हैं, जिनमें इतनी भी गुंजाइश नहीं है कि पांच-सात यात्रियों को भी सीट मिल सके।

– ज्यादा दूरी वालों को समस्या

हड़ताल के चलते जिला प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए सिटी बसों को अलग-अलग रूट पर चलाना शुरू कर दिया है, लेकिन इन बसों की संख्या कम है और अधिकांश बसें जिले के कस्बों तक ही संचालित हो रहीं हैं। जिससे आसपास जाने वालों को तो कुछ राहत मिली हैं, लेकिन जिन लोगों को भोपाल, इंदौर, नागपुर, जबलपुर सहित अन्य शहर जाना है उन्हें कोई साधन नहीं मिल रहा है।

– वाहन बदल-बदलकर आया

मकरोनिया चौराहे पर अपनी मां के साथ मिले टीकमगढ़ निवासी सोहन विश्वकर्मा ने बताया कि वे अपनी रिश्तेदारी में आए थे। सुबह वाहन बदल-बदलकर जैसे-तैसे सागर पहुंचे अब यहां से जाने में भी शाहगढ़ तक के लिए साधन मिला है वह भी डेढ़-डेढ़ सौ रुपए किराया मांग रहा है। वहां पहुंचने के बाद आगे का साधन कब तक मिलेगा यह भी भरोसा नहीं है।

– चैम्पियन में भी जगह नहीं मिल रही

सुरखी निवासी भगवानदास पटेल ने बताया कि अस्पताल में भर्ती परिचित को देखने सुबह सागर आया था। आते समय तो एक परिचित के साथ यहां पहुंच गया, लेकिन अब दो घंटे से वापस जाने साधन तलाश रहा हूं। शहर से मकरोनिया आ गया, लेकिन ज्यादा किराया देने के बाद भी चैम्पियन में तक जगह नहीं मिल रही है।

– ट्रक-ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन का मिला समर्थन

हड़ताल पर बैठे बस एसोसिएशन को अन्य संगठनों का भी सहयोग मिल रहा है। औषधि संघ के बाद रविवार को ट्रक-ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी पुराने बस स्टैंड पहुंचे और हड़ताल को अपना समर्थन दिया। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि वे मांगे पूरी न होने तक हड़ताल से नहीं उठेंगे।

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