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कलेक्ट्रेट बंगले से हर महीने पौने दो लाख रुपए की बनेगी बिजली, बोझ होगा कम

-अक्षय विभाग की कुसुम योजना के जरिए सोलर पेनल लगाने की तैयारी।
-साल में ९ करोड़ किलो कार्बन के उत्सर्जन में आएगी कमी।
-बिजली कंपनी ने भी अक्षय ऊर्जा विभाग के पास जिले के ३० स्थानों पर प्लांट लगाने भेजा प्रपोजल

दमोहJun 24, 2024 / 11:58 am

आकाश तिवारी

-अक्षय विभाग की कुसुम योजना के जरिए सोलर पेनल लगाने की तैयारी।
-साल में ९ करोड़ किलो कार्बन के उत्सर्जन में आएगी कमी।
-बिजली कंपनी ने भी अक्षय ऊर्जा विभाग के पास जिले के ३० स्थानों पर प्लांट लगाने भेजा प्रपोजल
दमोह. कलेक्टर बंगले के परिसर की तीन एकड़ जमीन से हर महीने पौने दो लाख रुपए की बिजली बनेगी। साल में यह आंकड़ा बढ़कर १९ लाख ६८ हजार के पार पहुंच जाएगा। खासबात यह है कि यह सब मूमकीन होगा अक्षय विभाग की कुसुम योजना से। जी हां, बिजली के उपयोग को कम करने के लिए कलेक्टर कुसुम योजना का सहारा ले रहे हैं। उनके द्वारा बंगले के आधे हिस्से पर सोलर पेलन लगाने की तैयारी की जा रही है। सब कुछ ठीक रहा तो जिले में यह पहली जगह होगी जहां सोलर पेनल का कर्मिशियल उपयोग होते देखने मिलेगा।
जानकारों की माने तो तीन एकड़ जमीन पर सोलर पेनल लगाए जाने से साल भर में ९ करोड़ किलो कार्बन उत्सर्जन में कमी भी आएगी। बता दें कि कलेक्टर बंगले का ऐरिया करीब करीब ७ एकड़ है। आधे से ज्यादा हिस्सा खाली है। कलेक्टर कोचर की माने तो इस हिस्से में सूरज की तेज रोशनी पड़ती है। यदि यहां पर सोलर पेनल लगाए जाते हैं तो काफी हद तक सरकारी विभागों के बिजली बिलों का खर्च उठाया जा सकता है। इससे शासन पर अतिरिक्त बोझ कम होगा।
-समय पर बिलों का भुगतान न होने से हो रही किरकिरी
सरकारी विभागों द्वारा समय पर बिजली बिलों का भुगतान नहीं किया जा रहा है। आमतौर पर ऐसे मामले सार्वजनिक भी हो रहे हैं। इससे सरकारी विभागों की किरकिरी भी होती है। इधर, शहर में संचालित सरकारी विभागों की बात करें तो इन विभागों में हर महीने एक करोड़ से ज्यादा रुपए की बिजली उपयोग की जाती है। यह राशि शासन के लिए किसी बोझ से कम नहीं है। ।
-प्रोजेक्ट मंहगा है, पर ४० फीसदी अनुदान से मिलेगी राहत
जानकार बताते हैं कि सोलर पेनल के इस प्रोजेक्ट पर करीब ढाई करोड़ रुपए का खर्च आएगा। हालांकि अक्षय विभाग कुसुम योजना में अनुदान भी दे रही है। करीब ४० फीसदी अनुदान मिलने से भारी भरकम राशि में कमी आएगी। यानी करीब एक करोड़ रुपए में यह प्लांट बंगले पर लग सकता है।
-इन दो स्थानों पर भी लगना है सोलर पेनल
जानकारी के अनुसार कलेक्टर बंगले के अलावा दो अन्य जगह और भी चिंहित की गई हैं, जहां जल्द ही सोलर पेनल लगे देखे जा सकते हैं। इनमें जटाशंकर पार्क और रानी दमयंती किला शामिल है। बताया जाता है कि स्पॉट भी चिंहित किए हैं। इधर, अक्षय ऊर्जा विभाग के अधिकारी भी इसी हफ्ते चिंहित जगहों का निरीक्षण करेंगे। इसके बाद प्रोजेक्ट तैयार होगा। कितना अनुदान मिलेगा और कितना खर्च सोलर पेनल लगाने में होगा। यह तमाम बिंदुओं पर कलेक्टर चर्चा करेंगे।
-इन विभागों में है सबसे अधिक बिजली खपत
शहर में कलेक्ट्रेट कार्यालय में ही दर्जनों बड़े विभाग संचालित हो रहे हैं। यहां का अनुमानित बिजली बिल करीब ४० लाख रुपए प्रतिमाह है। वहीं, नगर पालिका की बात करें तो यहां भी हर महीने बिजली बिल २५ से ३० लाख रुपए आता है। सरकारी स्कूल, विभाग, कॉलेज आदि मिलाकर देखें तो एक करोड़ से ज्यादा की बिजली खपत हर महीने हो रही है।
-बिजली कंपनी ने ३० जगह की चिंहित, भेजा प्रस्ताव
सोलर पेनल लगाने के लिए बिजली कंपनी ने भी जिले में ३० जगह चिंहित की है। यहां कर्मिशियल रूप में बिजली उत्पादन करेंगी। इनका एरिया भी अधिक है। करीब ४५ करोड़ का प्राजेक्ट बताया जा रहा है। यदि प्रोजेक्ट मंजूर होता है तो बिजली आपूर्ति में बिजली कंपनी को बड़ी राहत मिल सकती है।
फैक्ट फाइल
-सोलर पेलन के जरिए तीन एकड़ जमीन पर आधा मेगावाट बिजली होगी उत्पन्न।
-यानी ५०० किलो वॉट बिजली हो बनेगी।
-एक किलो वॉट में साढ़े तीन यूनिट होती है बिजली।
-एक महीने में ४९५०० यूनिट बिजली बनेगी।
ऐसे होगा फायदा

-१६५० यूनिट बिजली के हिसाब से बिजली कंपनी हर महीने देगी १,६३००० रुपए।
-एक साल में मिलेगें १९,६००० रुपए।

-तीन जगहों पर इतनी है बिजली की खपत

-कलेक्टर बंगला में बिजली की खपत लगभग हर महीने ३०० यूनिट है। इस लिहाज से ढाई से तीन हजार रुपए बिजली बिल आता है।
-जटाशंकर पार्क, यहां रात के वक्त ज्यादा रोशनी की जरूरत नहीं होती। हर महीने १०० यूनिट बिजली बिल आता है।

-दमयंती किले में बिजली की खपत ज्यादा नहीं है। यहां भी १०० यूनिट बिजली हर महीने हो रही खर्च।
यह होगा फायदा
-४० फीसदी अनुदान मिलेगा।
-मेनटेनेंस फ्री से राहत
-कार्बन उत्सर्जन मं आएगी कमी।

वर्शन

कलेक्टर बंगले में आधे से अधिक जमीन खाली पड़ी है। उसमें यदि सोलर पेनल लग जाते हैं तो निश्चित रूप से सरकारी विभागों के बिजली बिलों का भुगतान हो सकेगा। अक्षय ऊर्जा विभाग के अधिकारियों से बात की है। इसी हफ्ते उन्हें बुलाया है।
सुधीर कुमार कोचर, कलेक्टर दमोह

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