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क्षमता से ज्यादा एक्सरसाइज से बड़ा नुकसान, किसी के कार्टिलेज तो किसी के लिगामेंट ब्रेक

जयपुर। सुबह से रात तक कामकाज के अत्यधिक दबाव का सामने करने वाले लोग स्वयं को फिट रखने के लिए नियमित एक्सरसाइज का सहारा ले रहे हैं। 30 से 60 वर्ष आयु तक के लोगों में तेजी से इसका चलन बढ़ा है। लेकिन सेहत की इस बड़ी फिक्र और उसके निदान की कोशिशों के बीच […]

जयपुरJul 10, 2024 / 02:47 pm

Vikas Jain

जयपुर। सुबह से रात तक कामकाज के अत्यधिक दबाव का सामने करने वाले लोग स्वयं को फिट रखने के लिए नियमित एक्सरसाइज का सहारा ले रहे हैं। 30 से 60 वर्ष आयु तक के लोगों में तेजी से इसका चलन बढ़ा है। लेकिन सेहत की इस बड़ी फिक्र और उसके निदान की कोशिशों के बीच विशेषज्ञों के पास करीब-करीब रोजाना ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिनके क्षमता से अधिक एक्सरसाइज या अधिक खेल गतिविधियों के कारण घुटनों और जोड़ की नई बीमारी शुरू हो गई। इनमें से कुछ अपने लिगामेंट या कार्टिलेज तक ब्रेक करवा बैठे। राजधानी जयपुर में भी इस तरह के मामले सामने आए हैं।
इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी के स्पोर्ट्स फिजिशियन कोर्स के मुताबिक किसी भी खेल गतिविधि, एक्सरसाइज या ट्रेनिंग से पहले इस तरह की चोट को 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

सुनाई आप बीती…
करीब 25 वर्ष से मैं रोजाना 10 किलोमीटर की वॉक करता था। कभी कोई समस्या नहीं आई। कुछ समय से शहर का एक नामी जिम ज्वाइन किया। मुझे ट्रेनर ने ट्रेड मील पर खूब एक्सरसाइज करवाई गई। इसके बाद मुझे भारी परेशानी हो गई। मैरे कार्टिलेट ब्रेक हो गए। अब मेरी प्लाजमा थैरेपी हो रही है। डॉक्टर 20-20 हजार रुपए के महंगे इंजेक्शन लगा रहे हैं। मेरे परिचित से ज्यादा वजन उठवा लिया गया। इस कारण उनके लिगामेंट की दिक्कत हो गई। उनकी भी प्लाजमा रिच प्लेटलेट (पीआरपी) की गई है।
(शहर के एक नामी जिम जाने वाले व्यक्ति की आप बीती)

होना चाहिए फिजियोथैरेपिस्ट, कई जगह सिर्फ निर्देश देने वाले

किसी व्यक्ति को पहले से चोट है या ऑर्थराइटिस की कोई दिक्कत है तो बिना जांच करवाए जिम या एक्सरसाइज से उसकी परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए जिम जाने से पहले चेकअप जरूरी है। हमारे पास तो रोजाना ही इस तरह के मामले आते हैं। फिटनेस टेस्ट करवाने से व्यक्ति अपनी क्षमता अनुसार एक्सरसाइज की अवधि और तरीका तय कर सकता है। कुछ जिम में फिजियोथैरेपिस्ट नहीं होते, बल्कि सिर्फ निर्देश देने वाले होते हैं, जिन्हें पूरी जानकारी नहीं होती। स्पोर्ट्स फिजिशियन कोर्स के मुताबिक प्री चेकअप से इस तरह का खतरा 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।
डॉ.आशीष शर्मा, हड्डी रोग विशेषज्ञ, स्पोर्टस इंजरी विशेषज्ञ

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