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पहले खेत छुड़वाए, अब घर छोड़ कहां जाए…ग्रामीणों का छलका दर्द

जिंदल की ब्लास्टिंग के विरोध में जालिया में धरना जारी

भीलवाड़ाJun 20, 2024 / 11:34 am

Suresh Jain

जिंदल की ब्लास्टिंग के विरोध में जालिया में धरना जारी

जिंदल की ब्लास्टिंग के विरोध में जालिया में धरना जारी

भीलवाड़ा जिंदल सॉ लिमिटेड अपने खनन क्षेत्र में ब्लास्टिंग के लिए हमें अपने खेतों से भगा चुकी है। अब खनन क्षेत्र से उछलकर पत्थर घरों तक पीछा नहीं छोड़ रहे हैं। अब घर छोड़कर कहां जाए। यह दर्द है बनेड़ा के जिंदल की लापिया खनन क्षेत्र के जालियां गांव के 100 से अधिक घरों की बस्ती में रहने वाले लोगों का। जिंदल के खनन क्षेत्र से मात्र 50 मीटर दूर एक खेत पर महिलाएं, बच्चे व पुरुष धरने पर बैठे हैं। राजस्थान पत्रिका की टीम ने उनके पास पहुंची तो वे कहने लगे कि हमारी कौन सुनेगा? प्रशासन सुनवाई नहीं कर रहा है। अधिकारी आते हैं और गांव का दौरा कर चले जाते हैं।
जालिया के कन्हैयालाल माली का कहना है कि पांच दिन पहले दोपहर में डेढ बजे जिंदल ने ब्लास्टिंग की। इससे बड़े पत्थर उछलकर गांव तक आए। कई पत्थर मुकेश रेबारी के मकान की छत पर गिरे। ये पत्थर एक माह की बच्ची के पास आकर गिरा। भोलेनाथ की कृपा से बच्ची बच गई। मोहरा देवी ने बताया कि ब्लास्टिंग के दौरान लगातार पत्थर उछलकर घर तक आते हैं। अब हम कहां जाएं। इन पत्थरों से कभी भी किसी की भी जान जा सकती है। मुकेश रेबारी ने बताया कि उसके मकान के पास भोलेनाथ मंदिर पर काम चल रहा था। वहां भी तीन-चार पत्थर आकर गिरे। घबराकर कारीगर भाग गया।
दूसरा पुर न बन जाए जालिया

देवीलाल माली, शोभालाल रेबारी, नारायण बलाई, ऊकाराम रेबारी के मकान को पत्थर आने तथा ब्लास्टिंग से मकानों को नुकसान हो रहा है। लोगों का कहना है कि यह कहीं दूसरा पुर न बन जाए। पुर में भी ब्लास्टिंग से कई मकानों में दरारे आ गई। कई मकान गिर गई है। गोपीलाल ने कहा कि गांव में दो मंदिर हैं। भगवान ही रक्षा कर रहा है, प्रशासन आश्वासन देने के अलावा कुछ नहीं कर रहा। कन्हैयालाल माली व महिलाओं का कहना है कि जिंदल की ब्लास्टिंग बंद होने तक धरना जारी रहेगा।
बच्चों को कैसे स्कूल भेजे

महिलाओं का कहना है कि अभी स्कूलों में छुट्टी चल रही है। एक जुलाई को स्कूल खुल जाएंगे। जिंदल ऐसे ही ब्लास्टिंग करता रहा तो बच्चों को स्कूल कैसे भेजेंगे क्योंकि ब्लास्टिंग के दौरान पत्थर उछलकर स्कूल तक जाते हैं। गांव के कई घरों में 100 ग्राम से 2 से 3 किलो तक के पत्थर गिरे हैं। मकानों की दीवारे दरक रही है। टीन शेड में छेद हो गए। खिडकियों के कांच टूट गए।
एसडीएम फिर पहुंचे मौके पर

भीलवाड़ा उपखंड अधिकारी आव्हाद सोमनाथ एवं मांडल पुलिस बुधवार शाम मौके पर पहुंची। ग्रामीणों के विरोध के चलते लौट गए। कन्हैयालाल ने बताया कि प्रशासन चाहता है कि एक बार प्रयोग के तौर पर ब्लास्टिंग की जाए। लेकिन गांव के लोग सहमत नहीं हैं।

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