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Father day: पौधों के पिता बनकर करते हैं देखभाल, फल देखकर बढ़ जाती उम्र

जन्नत का दरवाजा पिता को बना दिया।

छिंदवाड़ाJun 16, 2024 / 12:45 pm

ashish mishra

छिंदवाड़ा. कहते हैं मां घर का आंगन तो पिता घर ही छत है। पिता जीवन का सबसे मजबूत पिलर होता है। यह हमें सिर्फ सपोर्ट ही नहीं करते बल्कि हमारे सपनों को साकार करने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। हमें इसकी भनक तक नहीं होती है। वैसे तो मां की ममता को सारा जग जानता है, लेकिन पिता के दिल में छिपी ममता कई बार खुद बच्चे ही नहीं समझ पाते हैं। सही मायने में पिता अपने बच्चे के लिए हमेशा रक्षक की ही भूमिका में होता है, जो हमें हर आग से झूलसने से बचाता है। शायद इसीलिए खुदा ने मां के कदमों में जन्नत रख दी और जन्नत का दरवाजा पिता को बना दिया। पिता सबकी हिफाजत का जिम्मा उठाते-उठाते खुद की कीमत का अंदाजा लगाना भूल गए। सदियों से उन्हें समाज ने सख्त, खामोश, गुस्सैल मिजाज की छवि दे रखी है। नारियल से सख्त मिजाज वाले पिता भीतर से बेहद ही नरम होते है। पिता होना यकीनन आसान नहीं। हालांकि आधुनिकता के युग में आज कामकाज की वजह से कई पैरेंट्स बच्चे से दूर हो जा रहे हैं। बच्चो अपने सपनों को पूरा करने देश-विदेश में नौकरी करता है। बच्चों की घर पर कमी न खले इसलिए ऐसे पैरेंट्स ने पौधों को ही अपना संतान मान लिया और उसे संरक्षित कर रहे हैं। वहीं कुछ बच्चे भी ऐसे हैं, जिनके लिए पिता ही जिंदगी हैं। वे दिन-रात माता-पिता की सेवा में जुटे हुए हैं। हम ऐसे ही कुछ पैरेंट्स एवं बच्चों से आपको रूबरू करा रहे हैं।
जीवन के हर उतार-चढ़ाव में पिता-पुत्र साथ
बढ़चिचोली निवासी प्रफुल तातेकर अपने पिता को ही सबकुछ मानते हैं। लगभग 43 साल पहले पिता प्रकाश तातेकर की आंख की रोशनी चली गई। ऐसे में प्रफुल अपने पिता के लिए आंखों की रोशनी बन गए। पिता-पुत्र साथ में ही अपने बिजनेस को संभाल रहे हैं। पिता का अनुभव और बेटे की मेहनत से आज पूरा परिवार खुश है और आगे बढ़ रहा है। आज कर कदम पर और हर मोड़ पर प्रफूल ही पिता के सारथी हैं। पिता-पुत्र की जोड़ी आज लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है। व्यवसाय से लेकर परिवार की हर जिम्मेदारी पिता-पुत्र एक साथ हाथ पकडकऱ निभाते हैं। प्रकाश तातेकर कहते हैं कि मैं बेटे के नजर से दुनिया देखकर जिंदगी जी रहा हूं।

पौधों को मान लिया संतान, अब दे रहे फल
खजरी रोड निवासी 67 वर्षीय कैलाश नारायण उपाध्याय के घर की बगिया में 150 से अधिक पौधे लगे हुए हैं। कई पौधे अब पेड़ बन चुके हैं और फल दे रहे हैं। एमपीबी से सेवनिवृत्त कैलाश ने बताया कि पौधे को वह अपनी संतान की तरह ही रखते हैं। अगर कीड़े लग जाए तो मन व्यथित हो जाता है। समय पर खाद, पानी, दवाओं का छिडक़ाव कराते हैं। आज उनकी बगिया में आम, अंगूर सहित कई फलदार पेड़ हैं जो उन्हें फल तो दे ही रहे हैं साथ ही छाया भी रहे हैं। कैलाश कहते हैं कि भीषण गर्मी में भी हमारे घर का तापमान अन्य जगह की तुलना में पांच से सात डिग्री कम रहता है। उन्होंने आयुर्वेदिक पौधे भी लगा रखे हैं। नींबू, टमाटर, मिर्ची, लौकी, करेला सहित अन्य सब्जी के भी पौधे हैं। अधिकतर समय इन पौधों से ही घर की सब्जी का काम चल जाता है। कैलाश कहते हैं कि मेरा पास आज एक संतान नहीं बल्कि सैकड़ों संतान हैं, जिनकी हरियाली देखकर मेरी उम्र बढ़ जाती है।

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