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कृपांक अंक यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं

एक ही केंद्र पर नीट की परीक्षा देने वाले छात्रों द्वारा प्राप्त किए गए समान अंक कई सवाल उठाते हैं। परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप लगे थे, लेकिन इसकी जांच नहीं हुई। नीट के नतीजों पर भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी के आरोप लगे हैं।

बैंगलोरJun 12, 2024 / 03:24 pm

Nikhil Kumar

राज्य स्तर पर आयोजित संयुक्त प्रवेश परीक्षाओं में भ्रष्टाचार की शिकायतों से निपटने के लिए नीट शुरू की गई थी।

Aidso ने मैसूरु में भी जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।


विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहीं एआइडीएसओ की जिला सचिव चंद्रकला ने कहा कि 4 जून को घोषित नीट के नतीजों ने मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
देशव्यापी हंगामे के बाद कुछ छात्रों को दिए गए Grace Marks की समीक्षा करने का के NTA के निर्णय पर उन्होंने कहा कि कुछ छात्रों को दिए गए अंक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के परीक्षा दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं थे। दिशा-निर्देशों में कृपांक अंकों के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है, तथा अतिरिक्त या कृपांक अंक प्रदान करने के लिए अपनाए गए मानदंड पक्षपातपूर्ण हैं।

एक ही केंद्र पर NEET की परीक्षा देने वाले छात्रों द्वारा प्राप्त किए गए समान अंक कई सवाल उठाते हैं। परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप लगे थे, लेकिन इसकी जांच नहीं हुई। नीट के नतीजों पर भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी के आरोप लगे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर आयोजित संयुक्त प्रवेश परीक्षाओं में भ्रष्टाचार की शिकायतों से निपटने के लिए नीट शुरू की गई थी। भ्रष्टाचार का समाधान परीक्षा प्रणाली में बदलाव नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार की जांच करना और दोषियों को दंडित करना है।

चंद्रकला ने आरोप लगाया कि पूरी मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘सरकार की लापरवाही और परीक्षा प्रणाली के पूर्ण व्यवसायीकरण के कारण विफल हो रही है। अनियमितताओं की न्यायिक जांच होनी चाहिए।

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