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जिले में मानसून की पहली झममाझम, बारिश से उफने नदी-नाले, नदी और रपट पर चली चादर

जिले में गुरुवार रात से हो रही झमाझम बारिश ने लोगों को राहत पहुंचाई है। देवरी इलाके में हो रही लगातार बारिश से इलाके में नदी और नाले उफान पर आ गए हैं। यहां कई रपटों पर चादर चल रही है। ऐसे में लोग जान जोखिम में डालकर इसे पार कर रहे हैं। उधर, जलवाड़ा कस्बे सहित क्षेत्र के किसानों को कई दिनों से बारिश का इंतजार था। यहां बुधवार रात मूसलाधार बारिश होने से नदियों और नालों में पानी की आवक बढ़ गई। खेतों में पानी बह निकला। यहां गुरुवार को दोपहर करीब एक बजे से एक घंटे तक मूसलाधार बारिश हुई। बुधवार रात भी एक घंटे तक बारिश हुई। इससे किसानों के चेहरे खिल उठे। बारिश से अंकुरित हुई फसलों को जीवनदान भी मिल गया हैं। कस्बे सहित क्षेत्र में बारिश होने से बरनी नदी व सुखार नदी में पानी की आवक हुई है। बरनी नदी का रियासतकालीन एनिकट लबालब भर गया हैं और इस धाराएं चल रही हैं। सुखार नदी में भी पानी की आवक हुई है। इससे रपट पर चादर चल रही हैं। मानसून की बारिश से एनिकट में पानी आने से ग्रामीणों को भी राहत मिली हैं। मवेशियों को भी पानी के लिए अब दर-दर नहीं भटकना पड़ेगा। सुखार नदी व बरनी नदी का पानी भी पार्वती नदी के निर्माणाधीन एनिकट में पहुंच गया हैं। क्षेत्र के किशनपुरा, बालापुरा, खल्दा, ख्यावदा, कुंडी, अहमदी में बारिश हुई है।

बारांJul 05, 2024 / 11:12 am

mukesh gour

जिले में गुरुवार रात से हो रही झमाझम बारिश ने लोगों को राहत पहुंचाई है। देवरी इलाके में हो रही लगातार बारिश से इलाके में नदी और नाले उफान पर आ गए हैं। यहां कई रपटों पर चादर चल रही है। ऐसे में लोग जान जोखिम में डालकर इसे पार कर रहे हैं। उधर, जलवाड़ा कस्बे सहित क्षेत्र के किसानों को कई दिनों से बारिश का इंतजार था। यहां बुधवार रात मूसलाधार बारिश होने से नदियों और नालों में पानी की आवक बढ़ गई। खेतों में पानी बह निकला। यहां गुरुवार को दोपहर करीब एक बजे से एक घंटे तक मूसलाधार बारिश हुई। बुधवार रात भी एक घंटे तक बारिश हुई। इससे किसानों के चेहरे खिल उठे। बारिश से अंकुरित हुई फसलों को जीवनदान भी मिल गया हैं। कस्बे सहित क्षेत्र में बारिश होने से बरनी नदी व सुखार नदी में पानी की आवक हुई है। बरनी नदी का रियासतकालीन एनिकट लबालब भर गया हैं और इस धाराएं चल रही हैं। सुखार नदी में भी पानी की आवक हुई है। इससे रपट पर चादर चल रही हैं। मानसून की बारिश से एनिकट में पानी आने से ग्रामीणों को भी राहत मिली हैं। मवेशियों को भी पानी के लिए अब दर-दर नहीं भटकना पड़ेगा। सुखार नदी व बरनी नदी का पानी भी पार्वती नदी के निर्माणाधीन एनिकट में पहुंच गया हैं। क्षेत्र के किशनपुरा, बालापुरा, खल्दा, ख्यावदा, कुंडी, अहमदी में बारिश हुई है।

जिले में गुरुवार रात से हो रही झमाझम बारिश ने लोगों को राहत पहुंचाई है। देवरी इलाके में हो रही लगातार बारिश से इलाके में नदी और नाले उफान पर आ गए हैं। यहां कई रपटों पर चादर चल रही है। ऐसे में लोग जान जोखिम में डालकर इसे पार कर रहे हैं। उधर, जलवाड़ा कस्बे सहित क्षेत्र के किसानों को कई दिनों से बारिश का इंतजार था। यहां बुधवार रात मूसलाधार बारिश होने से नदियों और नालों में पानी की आवक बढ़ गई। खेतों में पानी बह निकला। यहां गुरुवार को दोपहर करीब एक बजे से एक घंटे तक मूसलाधार बारिश हुई। बुधवार रात भी एक घंटे तक बारिश हुई। इससे किसानों के चेहरे खिल उठे। बारिश से अंकुरित हुई फसलों को जीवनदान भी मिल गया हैं। कस्बे सहित क्षेत्र में बारिश होने से बरनी नदी व सुखार नदी में पानी की आवक हुई है। बरनी नदी का रियासतकालीन एनिकट लबालब भर गया हैं और इस धाराएं चल रही हैं। सुखार नदी में भी पानी की आवक हुई है। इससे रपट पर चादर चल रही हैं। मानसून की बारिश से एनिकट में पानी आने से ग्रामीणों को भी राहत मिली हैं। मवेशियों को भी पानी के लिए अब दर-दर नहीं भटकना पड़ेगा। सुखार नदी व बरनी नदी का पानी भी पार्वती नदी के निर्माणाधीन एनिकट में पहुंच गया हैं। क्षेत्र के किशनपुरा, बालापुरा, खल्दा, ख्यावदा, कुंडी, अहमदी में बारिश हुई है।

बारां. जिले में गुरुवार रात से हो रही झमाझम बारिश ने लोगों को राहत पहुंचाई है। देवरी इलाके में हो रही लगातार बारिश से इलाके में नदी और नाले उफान पर आ गए हैं। यहां कई रपटों पर चादर चल रही है। ऐसे में लोग जान जोखिम में डालकर इसे पार कर रहे हैं। उधर, जलवाड़ा कस्बे सहित क्षेत्र के किसानों को कई दिनों से बारिश का इंतजार था। यहां बुधवार रात मूसलाधार बारिश होने से नदियों और नालों में पानी की आवक बढ़ गई। खेतों में पानी बह निकला। यहां गुरुवार को दोपहर करीब एक बजे से एक घंटे तक मूसलाधार बारिश हुई। बुधवार रात भी एक घंटे तक बारिश हुई। इससे किसानों के चेहरे खिल उठे। बारिश से अंकुरित हुई फसलों को जीवनदान भी मिल गया हैं। कस्बे सहित क्षेत्र में बारिश होने से बरनी नदी व सुखार नदी में पानी की आवक हुई है। बरनी नदी का रियासतकालीन एनिकट लबालब भर गया हैं और इस धाराएं चल रही हैं। सुखार नदी में भी पानी की आवक हुई है। इससे रपट पर चादर चल रही हैं। मानसून की बारिश से एनिकट में पानी आने से ग्रामीणों को भी राहत मिली हैं। मवेशियों को भी पानी के लिए अब दर-दर नहीं भटकना पड़ेगा। सुखार नदी व बरनी नदी का पानी भी पार्वती नदी के निर्माणाधीन एनिकट में पहुंच गया हैं। क्षेत्र के किशनपुरा, बालापुरा, खल्दा, ख्यावदा, कुंडी, अहमदी में बारिश हुई है।
वॉटर प्रूफ टेंट में भी भीग गए वनकर्मी

जिला वन मंडल अधिकारी अनिल कुमार के निर्देश पर जलवाड़ा नाका के बालापुरा में वनकर्मियों के लिए दो वॉटर प्रूफ टेंट लगवाए थे। बुधवार रात को हुई बारिश को ये झेल नहीं सके और वनकर्मी भीग गए। यहां अतिक्रमण के चलते वन मंडल अधिकारी ने टेंट लगाकर नजर रखने के निर्देश दिए थे। तब से ही वनकर्मी टेंट में रह कर क्लोजर की सुरक्षा कर रहे हैं।
अवैध खनन पर ब्रेक

क्षेत्र की बरनी नदी, सुखार नदी सहित पार्वती नदी में प्रशासन की उदासीनता से अरसे से बजरी, ङ्क्षचगारी सहित बोल्डर पत्थरों का धड़ल्ले से अवैध खनन हो रहा था। अवैध खनन से भरी ट्रैक्टर ट्रॉलियों को माफिया कस्बे सहित निकटवर्ती गांवों में ले जाकर बेरोकटोक बेचते थे। बजरी से भरी एक करीब चार हजार रुपए में बेच कर मोटा मुनाफा कमाते थे। नदियों में पानी आवक होने से अवैध खनन पर अब तीन से चार माह के लिए ब्रेक लग गया है। बडग़ांव कस्बे में गुरुवार को लगभग 7 मिनट तक रिमझिम बारिश हुई। बारिश अधिक नहीं होने से लोग गर्मी व उमस दिनभर परेशान रहे। देवा धाकड़ ने बताया कि 5-5 मिनट रुक कर हल्की फुहारें गिरती रही। भंवरगढ़ ग्रामीण अंचल में गत चार दिन से लगातार आसमान में उठी रही काली घटाएं बिना बरसे गुजर रही थी। गुरुवार दोपहर बाद मामूली बरसात होने से किसानों के सूखते हलक में ठंडक पहुंची है। वहीं खेतों में अंकुरित हो रही फसल को भी जीवनदान मिला है। गुरुवार दोपहर बाद 15 मिनट हुई बरसात ने खेतों को राहत दी है।

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