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आचार्य स्थूलभद्र नहीं होते तो दक्षिण वासियों को पालीताणा जैसे आदिनाथ दादा न मिलते: आचार्य चंद्रयश

सिद्धाचल स्थूलभद्र धाम में पुण्यतिथि उत्सव

बैंगलोरJun 24, 2024 / 02:30 pm

Santosh kumar Pandey

JAIN DHARM

बेंगलूरु. आचार्य विजय स्थूलभद्र सूरीश्वर की 21 वीं पुण्यतिथि उत्सव का आयोजन सिद्धाचल स्थूलभद्र धाम में किया गया। आचार्य चंद्रयश सूरीश्वर के सान्निध्य में आयोजित उत्सव में भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। इस मौके पर सुमतिनाथ जैन संघ, यलहंका की ओर से तीर्थ स्थल पर निर्मित पुंडरीक स्वामी जिनालय के शिलान्यास के चढ़ावे भी बोले गए जिनमें लोगों का उत्साह देखते ही बना।प्रात: बोहरा धर्मशाला से गुरु शोभायात्रा निकाली गई जो स्थूलभद्र गुरु मंदिर के गुणानुवाद सभा स्थल पर पहुंची। आचार्य ने गुरु गुणानुवाद करते हुए कहा कि गुरुदेव स्थूलभद्र सूरीश्वर नहीं होते तो दक्षिण वासियों को पालीताणा जैसे आदिनाथ दादा न मिलते। अंतिम समय में व्याधि से ग्रस्त होने के बावजूद उन्होंने आदिनाथ दादा की मुख्य टुंक का निर्माण करवाने के निर्देश दिए थे। उनमें अद्भुत धर्मनिष्ठा व गजब की इच्छाशक्ति थी।
उनके माता-पिता के संस्कारों को याद करते हुए कहा कि जिनशासन को जयवंत रखना है तो माताओं को संस्कारी बनना होगा। माता संस्कारी हो तो संतानें अपने आप संस्कारी बन जाएंगी। वर्तमान में यह बहुत दु:ख की बात है कि माता-पिता में ही संस्कार नहीं हैं। संतान के जीवन और शरीर की नहीं अपितु आत्मा और परभव की चिंता करो। फाउंडर ट्रस्टी प्रकाश कोठारी ने स्वागत किया। भाजपा नेता निर्मल सुराणा ने कहा कि संत हमें धर्म में जुडऩे की प्रेरणा देते हैं, यह हमारा सौभाग्य है। इस अवसर पर 21 रजत मुद्राओं से गुरु पूजन हुआ। पुण्यतिथि उत्सव का मुख्य लाभ हंसादेवी जसवंतलाल शाह परिवार ने लिया और सामूहिक लाभ में भक्त शामिल हुए। जाजम बिछाने और माल्यार्पण का लाभ दिलीप कुमार, सुनील धारीवाल परिवार ने लिया।
इनकी रही उपस्थिति दोपहर में लघु शांतिस्नात्र पूजन का आयोजन हुआ। नेमीचंद लुंकड़, निर्मल सुराणा, प्रकाश कोठारी, जयचंद चुत्तर, सुरेश वेदमूथा, दीपक बोहरा, ललित छत्रगोता, जयंतीलाल गांधीमुथा, अशोक लुंकड़, सुनील धारीवाल, रोहित भाई वोरा, प्रदीप ओसवाल, चंपकलाल इसरानी, विनोद पितलिया, संजय पोरवाल, गणेशमल संघवी,ताराचंद मेहता आदि उपस्थित रहे। बेंगलूरु के अलावा भी कई शहरों से भक्तों का आगमन हुआ।संगीत दीपक करनपुरिया ने पेश किया, विधि विधान अल्पेश भाई ने कराया।

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