scriptश्रीगंगानगर में तम्बाकू और धूम्रपान के शौकीन उ़ड़ा देते है हर महीने छह करोड़ रुपए | Patrika News
समाचार

श्रीगंगानगर में तम्बाकू और धूम्रपान के शौकीन उ़ड़ा देते है हर महीने छह करोड़ रुपए

– तम्बाकू निषेध दिवस विशेष: लगातार बढ़ रही तम्बाकू की खपत, अस्थायी दुकानों की संख्या भी चौगुनी बढ़ी
श्रीगंगानगर में तम्बाकू और धूम्रपान के शौकीन उ़ड़ा देते है हर महीने छह करोड़ रुपए

श्री गंगानगरMay 31, 2024 / 03:39 pm

surender ojha

श्रीगंगानगर। मुंह में पान मसाला या गुटखा लेते ही कुछ देर के लिए पूरे शरीर में हरकत सी होती है। वहीं जर्दा खाने वालो को यह नशा आत्मचिंतन में मदद करता हैं। सिगरेट और बीडी पीने से स्वास्थ्य फीटफाट रहता हैं, यह कहना है कि इन तम्बाकू सेवन और धूम्रपान करने वालों का। जितने लोग उतने मुंह और उससे ज्यादा बातें। तम्बाकू के पैकेट या सिगरेट की डिब्बी, इन पर सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक की चेतावनी लिखी होती है लेकिन ऐसे स्लोगन और चेतावनी के बावजूद शौकीनों की संख्या दर हर रोज बढ़ रही हैं। बाजार में व्यापारियों की माने तो दो से ढाई करोड़ रुपए का बजट हर महीने धुंए में उड़ा दिया जाता हैं यानि सिगरेट और बीड़ी पीने पर खर्च हो रहे है। वहीं तम्बाकू और गुटखे से अपनी चंद मिनटों की लालसा पाने वाले अनुमानित तीन से चार करोड़ रुपए का बजट हर महीने खर्च कर रहे हैं।
तम्बाकू का सेवन और सिगरेट पीने से स्वास्थ्य पर तो प्रतिकूल असर पड़ता ही है, आर्थिक नुकसान भी होता है। सिगरेट पीने वालों की उम्र का ग्राफ भी चिंतित करने वाला है। चालीस साल से कम उम्र के किशोर और युवाओं की तादाद तेजी से बढ़ रही है। शहर के हर इलाके में चाय की थड़ियों एवं होटलों और पनवाड़ी के खोखों पर धड़ल्ले से सिगरेट बिक रही है।


चौगुनी हुई अस्थायी दुकानें


कोरोनाकाल के बाद शहर का ऐसा कोई पार्क या चौराहा नहीं हैं कि जहां अस्थायी दुकानदारों ने कब्जे न किए हो। जहां सरकारी भूमि मिली वहां कब्जा जमाकर खोखे लगा दिए। सरेआम सिगरेट और तम्बाकू की बिक्री हो रही है। चौगुना संख्या होने के पीछे नगर परिषद, यूआइटी, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की एप्रोच के कारण सड़क किनारे धड़ल्ले से ऐसी अस्थायी दुकानें स्थापित हो चुकी हैं। इंदिरा वाटिका से लेकर करणपुर चुंगी तक यही हालात हैं।



नकली तम्बाकू और सिगरेट

इलाके में नकली तम्बाकू, गुटखा और सिगरेट का चलन भी बढ़ गया हैं। पिछले साल सीएमएचओ की अगुवाई की टीम ने एक ब्रांडेड कंपनी की नकल करके बनाए गए तम्बाकू के कई पैकेट बरामद किए थे। यह जांच आगे नहीं सरकी। ऐसे में इस नकली तम्बाकू का बड़े पैमाने पर खुलासा नहीं हो सका। इसी प्रकार विभिन्न प्रकार के ब्रांडेड की सिगरेट भी नकली मिल रही हैं। दुकानदार महेश का कहना था कि नकली या असली की पहचान सेवन करने वाले ज्यादा जानते हैं। इधर, दुकानदार अशोक का मानना है कि सिगरेट हर साल महंगी हो रही है लेकिन पीने के शौकीनों की संख्या भी कम नहीं हुई हैं।



शौकीन बनने लगे कैंसर के रोगी

तम्बाकू का उपयोग करने पर ज्यादातर मामलों में कैंसर की चौथी अवस्था या अंतिम अवस्था में ही बीमारी का पता लगता है। उस समय तक अधिकांश मामलों में उपचार संभव नहीं है। तम्बाकू जानलेवा है, यह सभी जानते है। लेकिन तम्बाकू को छोड़ने से कैँसर रोग होने की संभावनाएं कम हो जाती है। जवाहरनगर क्षेत्र के रामकुमार परिवर्तित नाम का कहना है कि वह भी इस तम्बाकू के चक्कर में कैँसर रोगी बन गया हूं लेकिन अब उपचार ले रहा हूं। तम्बाकू छोड़ने पर पहले तीन-चार दिन थोडी परेशानी हो सकती है। उसके बाद सबकुछ ठीक हो जाता है

रोजाना तीस रोगी, ज्यादातर मुख कैंसर पीडि़त


जिला चिकित्सालय के चिकित्सक डा. बद्रीप्रसाद मेहरड़ा के अनुसार जिला मुख्यालय पर जिला चिकित्सालय में वर्ष 2020 से कैँसर रोगियों का उपचार शुरू हुआ तब से रोजाना तीस रोगी कैँसर के आने लगे है। पुरुषों में तम्बाकू की वजह से मुख कैंसर और महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर अधिक होता है। तम्बाकू कैंसर को रोकने के लिए तम्बाकू का खुद और अन्य को सेवन नहीं करने का संकल्प से बचाव है।

भारी भरकम टैक्स फिर भी सालाना टर्न ओवर 45 करोड़ पार

तम्बाकू और उसके आइटम पर अधिकतम कर वसूली होती है। जीएसटी टैक्स 28 प्रतिशत वसूल किया जा रहा है। इससे सरकार के राजकोष में आमदनी होती है। जीएसटी विभाग के एडिशनल कमीशनर बलवंत सिंह का कहना है कि हर साल डीलरों की संख्या बढ़ रही है तो वार्षिक टर्न ओवर भी बढ़ने लगा हैं। पिछले साल तो 45 करोड़ पार कर गया था। कोरोनाकाल में तम्बाकू की कम बिक्री हुई थी।

हर साल बढ़ती जा रही बिक्री

वित्तीय वर्ष डीलर्स टर्नओवर रेवन्यू
2018-19 97 34 करोड़ 95 लाख 9 करोड़ 34 लाख
2019-20 108 35 करोड़ 55 लाख 9 करोड़ 98 लाख
2020-21 111 25 करोड़ 28 लाख 6 करोड़ 77 लाख
2021-22 122 38 करोड़ 92 लाख 10 करोड़ 24 लाख
2022-23 134 39 करोड़ 48 लाख 10 करोड़ 99लाख
2023-24 141 45 करोड़ 52 लाख 11 करोड़ 71 लाख

इस साल 155 13 करोड़ 42 लाख 3 करोड़ 42 लाख-

स्त्रोत : श्रीगंगानगर जिले में जीएसटी विभाग के आंकड़े

Hindi News/ News Bulletin / श्रीगंगानगर में तम्बाकू और धूम्रपान के शौकीन उ़ड़ा देते है हर महीने छह करोड़ रुपए

ट्रेंडिंग वीडियो