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भारत और फ्रांस मिलकर लांच करेंगे ‘तृष्णा’

जल प्रबंधन, उत्सर्जन और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग में होगा मददगार

बैंगलोरJun 07, 2024 / 07:01 pm

Rajeev Mishra

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी सीएनईएस संयुक्त साझेदारी में प्राकृतिक संसाधनों के आकलन के लिए थर्मल इमेजिंग उपग्रह ‘तृष्णा’ (थर्मल इंफ्रा-रेड इमेजिंग सैटेलाइट फॉर हाइ-रिजोल्यूशन नेचुरल रिसोर्स एसेसमेंट) के प्रक्षेपण की तैयारी कर रहे हैं।
इसरो ने इस उपग्रह की खासियत और भविष्य में होने वाले फायदों के बारे में पहली बार खुलकर जानकारी दी है। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा है कि, यह उपग्रह पृथ्वी की सतह के तापमान, उत्सर्जन, जैव-भौतिकीय और विकरण को प्रभावित करने वाले कारकों की निगरानी करेगा। यह मिशन जल और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए है। इससे मानव जनित जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और वाष्पोत्सर्जन की निगरानी हो सकेगी और जल संसाधनों के कुशल प्रबंधन पर ध्यान केंद्रीत किया जा सकेगा।
मिलेंगे मूल्यवान आंकड़े
इस मिशन का प्राथमिक उद्देश्य जल की मात्रा और महाद्वीपीय जीवमंडल की ऊर्जा की निगरानी करना है ताकि, पानी की चिंता और उसके उपयोग की मात्रा निर्धारित कर समस्या का समाधान किया जा सके। इसके अलावा तटीय और अंतरदेशीय क्षेत्रों में जल की गुणवत्ता का भी पता लगाना है। इस मिशन का दूसरा प्रमुख उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में तापमान का व्यापक मूल्यांकन, ज्वालामुखी गतिविधियों और भूतापीय संसाधनों से जुड़ी थर्मल विसंगतियों का पता लगाना है। साथ ही, बर्फ-पिघलने वाले ग्लेशियर की गतिशीलता की सटीक निगरानी करना, एरोसोल ऑप्टिकल गहराई, वायुमंडलीय जल वाष्प और बादल कवर पर मूल्यवान डेटा हासिल करना है।
वैज्ञानिक और सामाजिक लाभ
इसरो ने कहा है कि, तृष्णा के वैज्ञानिक और सामाजिक लाभ व्यापक हैं। कृषि जल प्रबंधन में तृष्णा के आंकड़े काफी उपयोगी साबित होंगे। सिंचाई जल उपयोग का आकलन करने, जल बचत के लिए सलाह जारी करने और टिकाऊ जल प्रबंधन के साथ फसल उत्पादकता बढ़ाने में मददगार साबित होगा। इसके अलावा जलवायु निगरानी और सूखा प्रबंधन पर भी इस उपग्रह की निगाह होगी। तापमान को लेकर भी यह उपग्रह अलर्ट करेगा।
एसएसओ में स्थापित होगा उपग्रह
तृष्णा उपग्रह में दो प्राथमिक पे-लोड होंगे। फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी इसके लिए थर्मल इंफ्रा-रेड पे-लोड उपलब्ध कराएगी जिसमें चार चैनल लांग-वेव इंफ्रारेड इमेजिंग सेंसर होंगे। यह उत्सर्जन के साथ सतह के तापमान का हाई-रिजोल्यूशन मापन करने में सक्षम होगा। इसरो विजिबल निकट इंफ्रा-रेड-शार्ट वेव इंफ्रा रेड पे-लोड विकसित करेगा। इसमें सात स्पेक्ट्रल बैंड होंगे जो सतह परावर्तन की व्यापक मैपिंग में सक्षम होंगे। यह उपग्रह को भू-मध्य रेखा पर दोपहर 12.30 बजे से 761 किमी की ऊंचाई पर सूर्य समकालिक कक्षा (एसएसओ) में संचालित होगा।

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