scriptबजट का अभाव : आठ साल से रेंग रहा तीन पीएचसी का काम, ग्रामीणों को सुलभ इलाज का इंतजार | -ढ़ाई करोड़ बकाया होने से नहीं हो पा रहे काम | Patrika News
समाचार

बजट का अभाव : आठ साल से रेंग रहा तीन पीएचसी का काम, ग्रामीणों को सुलभ इलाज का इंतजार

-ढ़ाई करोड़ बकाया होने से नहीं हो पा रहे काम

झालावाड़Jun 10, 2024 / 11:35 am

harisingh gurjar

जिले में समय पर बजट नहीं आने से ग्रामीणों को समय पर इलाज की सुविधा मुहैया नहीं हो पा रही है। जिले के कड़ोदिया, माथनिया और हिम्मतगढ़ पीएचसी का निर्माण एनआरएचएम के तहत करीब साढ़े चार करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है। लेकिन पिछले आठ साल से बजट के अभाव में काम गति नहीं पकड़ पा रहा है। काम की कछुआ चाल से तीन ग्राम पंचायत के हजारों लोगों को समय पर इलाज नहीं हो पा रहा है।
ग्रामीणों के साथ ही यहां आने वाले डॉक्टर व अन्य नर्सिंग स्टाफ के बैठने की भी जगह नहीं है। हिम्मतगढ़ व कड़ोदिया में पुरानी पीएचसी में दो-दो ही कमरे है। वहीं बारिश के समय तो छतें टपक जाती है। दवाईयां तक गिली होती है, जिन्हे पॉलीथिन में रखकर टेबल पर रखनी पढ़ती है।इसके अलावा भी कई समस्याएं है।
एक नवंबर को हुआ था उद्घाटन

– जिले की माथनिया, हिम्मतगढ़, कड़ोदिया पीएचसी का उद्घाटन 1 नवंबर 2017 को हुआ था। तीनों प्राथमिक चिकित्सालय साढ़े छह हजार वर्ग फीट जगह पर बनाए जा रहे है। आठ साल बीतने के बावजूद भी भवन पूरी तरह तैयार नहीं हो पाए है। तत्कालीन सरकार ने कड़ोदिया, माथनिया और हिम्मतगढ़ ग्राम पंचायत के ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के उद्देश्य से सरकार ने नए भवन का निर्माण की आधारशिला रखी थी। लेकिन निर्माण कार्य की देरी से करीब 20 गंाव के हजारों ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। बावजूद इसके जनप्रतिनिधि व प्रशासन को इस ओर कोई ध्यान नहीं है।
ये सुविधाएं मिलनी है ग्रामीणों को –

तीनों प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में लेबर रूम, महिला वार्ड,पुरूष वार्ड, प्रसूता वार्ड, ओटी, दवाई स्टोर रूम, नि:शुल्क जांच रूम, नर्सिंग रूम, एक्सरे कक्ष आदि बनाए जा रहा है। इनका काम करीब 60 फीसदी पुरा हो चुका है, लेकिन अभी करीब ढ़ाई करोड़ रुपए बकाया होने से ठेकेदार भी काम नहीं कर पा रहा है। सरकार से बजट आएं तो तीनों पीएचसी का काम समय पर हो।
तीनों जगह ये दिक्कत-

हिम्मतगढ़ व कड़ोदिया पीएचसी में दो-दो ही कमरे होने से यहां बहुत परेशानी होती है। नई पीएचसी नहीं बनने यहां एक्सरे,लेबर रूम व अन्य जांचों के लिए भी रायपुर-पिड़ावा जाना पढ़ता है।वहीं माथनियां में अभी इलाज की कोई सुविधा नहीं है। यहां पहली बार पीएचसी बनाई जा रही है,लेकिन उसका भी ग्रामीणों को लंबा इंतजार होता जा रहा है।
समय पर हो काम-

हिम्मतगढ़ पीएचसी काम पिछले आठ साल से कुछआ चाल से चल रहा है। हमें छोटे-मोटे इलाज के लिए रायपुर या झालावाड़ जाना पड़ता है।इसका काम समय पर हो तो ग्रामीणों को यहीं इलाज की सुविधा मिल सकें।
लोकेश खटीक,ग्रामीण।

महिलाओं को बाहर ले जाने में दिक्कत-

कड़ोदिया में चिकित्सालय का निर्माण कार्य काफी धीमी गति से किया जा रहा है। इस संबंध में कई बार शिविरों में भी अधिकारियों को अवगत कराया है, लेकिन कार्य के लिए कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। कई बार रात को महिलाओं को इलाज के लिए रायपुर व झालावाड़ ले जाना भारी पढ़ता है।
हरीश पाटीदार ग्रामीण।

बजट देना चाहिए-

सरकार ने ग्राम पंचायत स्तर पर ही ग्रामीणों को इलाज की सुविधा मिल जाएं इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खोले थे, लेकिन बजट नहीं आने से इसका मकसद पूरा नहीं हो रहा है। सरकार को बजट देना चाहिए।
र्कीतेश मेहर, ग्रामीण

पतानहीं कब मिलेगी इलाज की सुविधा-

हमारे गांव हिम्मतगढ़ में आठ साल से सुन रहे हैं कि दस कमरों को अस्पताल बन रहा है। लेकिन पता नहीं इसमें इलाज की सुविधा कब मिलेगी। पूछा तो बताया कि बजट नहीं आने से काम अटका हुआ है।
प्रेमचन्द प्रजापति, ग्रामीण।

जल्द पूरा करवाएंगे काम-

जिला कलक्टर के माध्यम से एनआरएचएम निदेशक को बजट के लिए पत्र भेजा गया है। बजट का ईश्यू है। जैसे ही बजट आएगा जल्द तीनों पीएचसी का काम करवा दिया जाएगा।
डॉ.साजिद खान, सीएमएचओ, झालावाड़।

Hindi News/ News Bulletin / बजट का अभाव : आठ साल से रेंग रहा तीन पीएचसी का काम, ग्रामीणों को सुलभ इलाज का इंतजार

ट्रेंडिंग वीडियो