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बिजुरी पीएचसी में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव, एक चिकित्सक के भरोसे आधा सैकड़ा गांवों के लोग

अनूपपुर. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिजुरी में चिकित्सकों की कमी के कारण स्थानीय लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शहरी आबादी के साथ ग्रामीण अंचलों से प्रति माह काफी संख्या मेंं मरीज इलाज के लिए स्वास्थ्य केन्द्र पहुंच रहे हैं, लेकिन चिकित्सकों सहित सुविधाओं की कमी के चलते समुचित इलाज नहीं मिल पा […]

अनूपपुरJul 10, 2024 / 12:27 pm

Sandeep Tiwari

अनूपपुर. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिजुरी में चिकित्सकों की कमी के कारण स्थानीय लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शहरी आबादी के साथ ग्रामीण अंचलों से प्रति माह काफी संख्या मेंं मरीज इलाज के लिए स्वास्थ्य केन्द्र पहुंच रहे हैं, लेकिन चिकित्सकों सहित सुविधाओं की कमी के चलते समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिजुरी के उन्नयन की मांग भी लंबे समय से अटकी हुई है। प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वर्ष 2016 में बिजुरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को नगर की आबादी के अनुसार अपर्याप्त मानते हुए नगरवासियों की मांग पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन करने की घोषणा की थी। स्वास्थ्य विभाग ने भी इसे सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के उन्नयन के लिए शासन के पास प्रस्ताव भेजा, लेकिन आज तक बिजुरी स्वास्थ्य केन्द्र का उन्नयन नहीं हो सका। इस स्वास्थ्य केंद्र में बिजुरी नगर सहित दर्जनों ग्रामीण क्षेत्र एवं रामनगर थाना क्षेत्र की भी जिम्मेदारी है। दोनों ही थाना क्षेत्रों में घटित दुर्घटना एवं पीएम का कार्य भी देखना पड़ता है। यहां ओपीडी में 60-70 मरीज प्रतिदिन इलाज के लिए पहुंचते हैं। महीने में 15-20 पोस्टमार्टम भी यहां किए जाते हैं। यहां तीन चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन एक चिकित्सक की ड्यूटी लगाई गई है। वार्डबॉय और पीएम के लिए स्वीपर नहीं है। महिला चिकित्सक व विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में स्थानीय लोगों को जिला अस्पताल या छत्तीसगढ़ की सीमा लांघकर मनेन्द्रगढ़ या बिलासपुर उपचार के लिए जाना पड़ता है। 
दो चिकित्सकों की लगाई ड्यूटी

वर्तमान में केन्द्र में 2 चिकित्सकों की पदस्थापना है, लेकिन एक की सेवाएं ली जा रही हंै। ऐसे में यहां भर्ती मरीजों को देखने के लिए रात में कोई चिकित्सक नहीं रहता है। वहीं ड्रेसर तथा वार्ड बॉय का पद रिक्त होने के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसकी जानकारी प्रबंधन द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को दिए जाने के बाद भी अब तक इसकी भरपाई नहीं हो पाई है। इसके साथ ही चिकित्सालय में शाम होते ही ना तो चिकित्सक मिलते हैं और ना ही अन्य स्टाफ।
इधर, कोतमा सीएचसी मेें जांच सुविधा होने के बाद भी मरीजों को भेज रहे निजी पैथोलॉजी लैब

कोतमा. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोतमा में मौसम के बदलते ही मलेरिया, टाइफाइड तथा सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। यहां पहुंचने वाले मरीजों की जांच की असुविधा हो रही है। सीएचसी में सुविधा होने के बाद भी मरीजों को निजी पैथोलॉजी लैब में जांच के लिए भेजा रहा रहा है। शासन द्वारा पैथालॉजी जांच की सुविधा आम जन तक पहुंचाने के लिए सीएचसी को हब एवं अधीनस्थ स्वास्थ्य केन्द्रों को स्पोक बनाया गया है। शासन की मंशा है कि ग्रामीण क्षेत्र के गरीब तबके के लोगों को खून जांच के लिए प्राइवेट पैथोलॉजी में बेवजह पैसा खर्च नहीं करना पड़े लेकिन हालात यह हंै कि शासकीय डॉक्टर गरीब मरीजों को जांच लिखकर प्राइवेट पैथोलॉजी लैब भेज रहे हंै।
सीएचसी में उपलब्ध हैं इन जांचों की सुविधा

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के लिए अधिकृत साइंस हाउस एजेंसी द्वारा हीमोग्लोबिन इस्टीमेशन, सेरम आयरन, सीबीसी, ब्लड शुगर, एचबीए1सी, जीटीटी, डेंगू के लिए एनएस-1, डेंगू आईजीजी एम, डी-डाइमर, सीआरपी, विटामिन-डी, आरए फैक्टर, टीएसएच, टी3, टी4, एलएच, एफएसएच, सेरम बिलिरुबिन डाईरेक्ट एण्ड इनडाईरेक्ट, सेरम क्रिएटीनाइन, सेरम यूरिक एसिड, सेरम प्रोटीन टोटल, सेरम ट्राइग्लिसराइड्स 34 जी-6पीडी, सेरम कोलेस्ट्रोल, सेरम एचडीएल, सेरम एलडीएल, एसजीपीटी, एसजीओटी, चिकनगुनिया, एल्कलाइन फास्फाटेस, ट्रोपोनाइन-एएसओ, सीकेएमबी, सेरम कैल्सियम की जांच की सुविधा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोतमा में उपलब्ध कराई गई है। इसके बावजूद यहां पदस्थ कर्मचारियों द्वारा निजी फायदे के लिए मरीजों को निजी पैथोलॉजी लैब में भेजा जाता है।

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