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बिना चिकित्सकीय सलाह के नेसल ड्रॉप बढ़ाती है राइनाइटिस का खतरा

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में रोजाना पहुंच रहे 10 से 15 मरीज

भीलवाड़ाJun 08, 2024 / 09:44 pm

Suresh Jain

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में रोजाना पहुंच रहे 10 से 15 मरीज

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में रोजाना पहुंच रहे 10 से 15 मरीज

भीलवाड़ा जिले के लोग बिना चिकित्सक की सलाह नाक में ड्रॉप का इस्तेमाल कर रहे हैं। चिकित्सक इसे गंभीर बीमारी को न्योता देना मानते हैं। चिकित्सकों ने बताया कि गर्मी के सीजन में नाक में ड्रॉप डालने से नाक बंद होने की समस्या लेकर रोजाना 10 से 15 मरीज अस्पताल आते हैं। लोग बिना चिकित्सकीय सलाह के नेसल ड्रॉप का उपयोग कर बंद नाक खोलने का काम कर रहे हैं। इससे नाक खुलने की बजाय बंद हो जाती है। उनमें राइनाइटिस का खतरा बढ़ जाता है।
इस दवा में ऑक्सीमीट जोलिन या जाइलो मेटाजोल होते हैं। इसके उपयोग से नाक के टिश्यूज की सूजन कम हो जाती है और नाक तुरंत खुल जाती है। लेकिन, लंबे समय तक इसके उपयोग से इन टिश्यूज का लचीलापन कम हो जाता है। साथ ही रक्त संचार में असामान्यता व नाक के अंदर स्थित टर्बिनेट यानी मांस का आकार बढ़ने लगता है। इससे नाक में रुकावट आती है। नाक अक्सर बंद रहने लगती है और नाक में मांस बढ़ जाता है। असल में राइनाइटिस आंखों, नाक और गले में होता है। यह हवा में एलर्जी के कारण शरीर में हिस्टामाइन रिलीज होने लगता है।
अधिक इस्तेमाल से घटता दवा का असर

नेसल ड्रॉप पर मरीज की निर्भरता बढ़ने से दवा के प्रभाव का असर कम रह जाता है। इस कारण बार-बार नाक में ड्रॉप डालने की इच्छा होती है। नाक से पानी नहीं आता व छींक भी नहीं आती है। नाक बंद रहती है। ऐसा होने पर ड्रॉप को तुरंत बंद कर देना चाहिए। ऐसे में मरीज को बगैर चिकित्सक को दिखाए नेसल ड्रॉप नहीं लेनी चाहिए।
डॉ. जयराज वैष्णव, नाक, कान गला रोग विशेषज्ञ एमजीएच

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