scriptनई शिक्षा नीति बेअसर: रिसर्च के लिए संभाग के 50 सरकारी कॉलेजों में नहीं शोध केंद्र, कैसे लें यूजी विथ रिसर्च में प्रवेश | New education policy ineffective: There are no research centres in 50 government colleges of the division for research, how to take admission in UG with Research | Patrika News
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नई शिक्षा नीति बेअसर: रिसर्च के लिए संभाग के 50 सरकारी कॉलेजों में नहीं शोध केंद्र, कैसे लें यूजी विथ रिसर्च में प्रवेश

-मप्र में सबसे पहले हुई थी एनइपी लागू, पर प्लानिंग के अनुसार नहीं हुआ काम

-प्रदेश भर के शासकीय कॉलेजों में चल रही प्रवेश प्रक्रिया, पर यूजी विथ रिसर्च में प्रवेश से वंचित हो रहे हजारों
छात्र

दमोहJun 17, 2024 / 07:28 pm

आकाश तिवारी

-मप्र में सबसे पहले हुई थी एनइपी लागू, पर प्लानिंग के अनुसार नहीं हुआ काम

-प्रदेश भर के शासकीय कॉलेजों में चल रही प्रवेश प्रक्रिया, पर यूजी विथ रिसर्च में प्रवेश से वंचित हो रहे हजारों
छात्र
दमोह. मप्र सरकार नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने के मामले में देश का पहला राज्य था, पर २०२० में लागू एनइपी के अब साइड इफेक्ट दिखना शुरू हो गए है। रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई नई शिक्षा नीति में बड़ी खामी सामने आई है। कॉलेजों में चौथे साल की पढ़ाई को लेकर दाखिले की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन जानकर हैरानी होगी कि यूजी विथ रिसर्च में दाखिले के लिए संभाग के ६२ शासकीय कॉलेजों में से मात्र १२ कॉलेजों में छात्रों यूजी विथ रिसर्च में प्रवेश मिल पा रहा है। यानी ५० कॉलेज में अध्ययनरत विद्यार्थियों को यूजी विथ रिसर्च से महरूम होना पड़ेगा। ऐसे में विद्यार्थी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। इसका बड़ा कारण सिर्फ १२ कॉलेजों में शोध केंद्र स्वीकृत होना है। खासबात यह है कि इन कॉलेजों में भी कुछ विषयों में छात्र प्रवेश नहीं ले पाएंगे क्योंकि संबंधित विषयों के लिए एनइपी की गाइड लाइन के अनुसार शिक्षक नहीं है।
बता दें कि नई शिक्षा नीति को लागू हुए तीन साल हो चुके हैं। फोर्थ इयर शुरू हो गया है। कॉलेजों में तीन साल का कोर्स पूर्ण करने के बाद अब छात्रों के पास आगे की पढ़ाई के लिए दो विकल्प हैं। पहला यूजी विथ ऑनर्स और दूसरा यूजी विथ रिसर्च। यहां आपको बता दें कि संभाग में ७ से १० हजार छात्र ऐसे हैं, जो पीजी विथ रिसर्च में दाखिले के लिए पात्र हैं, पर अफसोस की बात यह है कि ५० शासकीय कॉलेजों शोध केंद्र की अनुमति नहीं है।
-सिर्फ १२ कॉलेजों मे हैं शोध केंद्र

संभाग में शासकीय कॉलेजों की संख्या ६२ है। संभाग के छह जिलों की बात करें तो हर साल करीब २५ से ३० हजार छात्र कॉलेजों में दाखिला लेते हैं। इनमें से २५ फीसदी विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम ७५ फीसदी अंक से अधिक होता है। नई शिक्षा नीति की गाइड लाइन कहती है कि जिन छात्रों के ७५ फीसदी अंक हैं। उन्हें ही यूजी विथ रिसर्च में प्रवेश मिलेगा।
-संभाग के यह है शासकीय कॉलेज, जहां मिल सकता है प्रवेश
सागर:- गल्र्स डिग्री कॉलेज, आर्ट्स एंड कॉमर्स, बंडा कॉलेज, बीना में पीजी व गल्र्स कॉलेज और रहली कॉलेज।
दमोह:- पीजी दमोह और पथरिया कॉलेज।पन्ना:- पीजी पन्ना
टीकमगढ़:- पीजी टीकमगढ
छतरपुर:- विधि महाविद्यालय
-इन विषयों से ही कर पाएंगे आगे की पढ़ाई?

यूजी विथ रिसर्च की बात करेंं तो सागर जिले के आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज के विद्यार्थी कॉमर्स, राजनीति विज्ञान, रसायन शास्त्र व हिंदी विषय से, गल्र्स डिग्री कॉलेज की छात्राएं होम साइंस, कॉमर्स और समाज शास्त्र विषय से, बंडा कॉलेज के छात्र सिर्फ राजनीति शास्त्र विषय से यूजी विथ रिसर्च कर सकते हैं। इधर, दमोह पीजी कॉलेज में हिंदी और बॉटनी और पथरिया में बॉटनी विषय में पीएचडी की सुविधा है। टीकमगढ़ जिले के पीजी में भूगोल, राजनीति शास्त्र ,रसायन शास्त्र और प्राणी शास्त्र तो छतरपुर में सिर्फ विधि महाविद्याय में लॉ से यूजी विथ रिसर्च कर सकते हैं।
-दो जिलों में नहीं होंगे दाखिले

संभाग के दो जिले पन्ना और निवाड़ी ऐसे हैं, जहां पर यूजी विथ रिसर्च का ऑपशन विद्यार्थियों के लिए नहीं रहेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां पर शोध केंद्र तो बने हैं, लेकिन एनइपी के मापदंड अनुरूप कॉलेजों में एक विषय के लिए दो शिक्षक यानी गाइड नहीं हैं।
-चिंता: यह विषय जिसे पढ़ाने के लिए नहीं एक भी गाइड

जानकारी के अनुसार संभाग के किसी भी कॉलेज में अंग्रेजी, गणित, फिजिक्स, मनोविज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान, संस्कृत, कम्प्यूटर एप्लीकेशन, इंडस्ट्रियल माइक्रोबायोलॉजी, इंडस्ट्रिलय केमिस्ट्री, बायोटेक्निोलॉजी और बीबीए जैसे विषयों में यूजी विथ रिसर्च नहीं हो सकती। ऐसा इसलिए क्योंकि इन विषयों के लिए गाइड ही नहीं हैं।
-ऐसे मिलता है दाखिला

तीन साल का कोर्स करने वाले विद्यार्थियों ने जिस विषय को मेजर रखा है। उसी विषय से वह यूजी विथ रिसर्च कर पाएगा। उदाहरण के तौर पर जैसे किसी छात्र ने पीसीएम लिया है और उसमें फिजिक्स मेजर है। तो वह यूजी विथ रिसर्च में फिजिक्स विषय से यूजी विथ रिसर्च में कर पाएंगे।
तो एक साल होगा खराब

-यूजी विथ रिसर्च में प्रवेश न मिलने के कारण हजारों विद्यार्थियों के पास यूजी विथ ऑनर्स ही एक मात्र विकल्प बचा है। इसके बाद छात्रों को ग्रेज्युएशन की डिग्री ऑनर्स के साथ मिलेगी। इसके बाद छात्र को एक साल का पीजी कोर्स करना होगा। उसके बाद पीएचडी के लिए एंट्रेंस देना होगा। जबकि यदि यूजी विथ रिसर्च रिसर्च के साथ डिग्री करते तो वह यूजी विथ रिसर्च के साथ
पीएचडी के लिए सीधे पात्र होता।
-पूरे मप्र में भी यही स्थिति
यह स्थिति सिर्फ सागर संभाग के विद्यार्थियों के साथ नहीं है। बल्कि पूरे मप्र में यही स्थिति है। यूजी विथ रिसर्च के लिए प्रदेश के सैकड़ों कॉलेज में शोध केंद्र नहीं है। ऐसे में रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढऩे वाले विद्यार्थियों के सामने बढ़ी चुनौती है।
वर्शन

शोध केंद्र की मंजूरी छतरपुर विवि से दी जाती है। धीरे-धीरे कॉलेज आवेदन कर रहे हैं। अभी यूजी विथ रिसर्च के लिए कितने आवेदन हुए हैं। उनकी जानकारी जुटाई जा रही है।
डॉ. जीपी चौधरी, एडी सागर

वर्शन

शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। शोध केंद्र बनाने के लिए शिक्षकों की नियुक्तियां जरूरी हैं। संभाग में १२ कॉलेजों में शोध केंद्र हैं, जहां पर छात्र यूजी विथ रिसर्च की में प्रवेश ले सकते हैं।
बहादुर सिंह परमार, शोध प्रकोष्ठ प्रभारी छतरपुर विवि

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