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फायनेंस कंपनी को नोटिस जारी, पूछा ऐतिहासिक व पुरातात्विक महत्व के मंदिर भवन को क्षति क्यों पहुंचाई?

कार्यालय में मौजूद होकर जवाब देने के निर्देश पन्ना. लोगों की आस्था के केंद्र, पुरातात्विक महत्व के 300 साल पुराने भगवान जुगल किशोर मंदिर भवन को क्षति पहुंचाने वाली एसके फायनेंस कंपनी का ग्लोसाइन बोर्ड जब्त कर नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने फायनेंस कंपनी के जिम्मेदारों को कार्यालय में उपस्थित होकर जवाब देने […]

पन्नाJun 10, 2024 / 06:40 pm

Anil singh kushwah

कंपनी का ग्लोसाइन बोर्ड जब्त

कंपनी का ग्लोसाइन बोर्ड जब्त

कार्यालय में मौजूद होकर जवाब देने के निर्देश

पन्ना. लोगों की आस्था के केंद्र, पुरातात्विक महत्व के 300 साल पुराने भगवान जुगल किशोर मंदिर भवन को क्षति पहुंचाने वाली एसके फायनेंस कंपनी का ग्लोसाइन बोर्ड जब्त कर नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने फायनेंस कंपनी के जिम्मेदारों को कार्यालय में उपस्थित होकर जवाब देने को कहा है। साथ पूछा है कि किसकी अनुमति से ऐतिहासिक मंदिर की दीवारों को क्षति पहुंचाई गई। शहर के गांधी चौक से संचालित कंपनी ने मंदिर की दीवारों में छेद करवा गुबंद के पास बड़ा ग्लोसाइन बोर्ड लगवा दिया था। कंपनी की मनमानी सोशल मीडिया में उजागर होने के बाद प्रशासन की किरकिरी हुई तो आनन-फानन में बोर्ड को हटवाया गया।
कंपनी का ग्लोसाइन बोर्ड जब्त
प्रशासन ने कंपनी के अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछा है कि ऐतिहासिक मंदिर भवन को क्षति क्यों पहुंचाई? किसकी अनुमति से ग्लोसाइन बोर्ड मंदिर के गुबंद के पास लगवाया गया? इन सभी सवालों का जवाब कार्यालय में 10 जून को उपस्थित होकर देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही चेतावनी दी गई है कि नोटिस का तय समय पर जवाब नहीं देने पर एक पक्षीय कार्रवाई की जाएगी।
एफआईआर क्यों नहीं
मामले में अधिकारियों ने ग्लोसाइन बोर्ड निकलवाने के दौरान पाया था कि पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व के मंदिर की दीवारों को क्षति पहुंचाई गई है। गुबंद के पास दीवारों में छेद करवा बड़े-बड़े कील लगवाए गए थे, उनमें एंगल भी फंसाए गए थे। मंदिर भवन को क्षति पहुचाएं जाने की पुष्टि के बाद भी कंपनी के खिलाफ एफआईआर नहीं कराई गई। न ही यह पता करने का प्रयास किया गया कि मंदिर समिति की मामले में क्या भूमिका है।
मुसद्दी दे रहे गोलमोल जवाब
मामले में मंदिर समिति के मुसद्दी संतोष तिवारी अपनी गर्दन बचाने अधिकारियों से बोल रहे कि कंपनी ने उनसे एसडीएम ने अनुमति लेना बताया है। वहीं कंपनी ने कहा, हमने प्रबंध समिति के पदाधिकारियों से मौखिक अनुमति ली थी।
कंपनी ने कहा, पदाधिकारियों से पूछकर लगवाया
फायनेंस कंपनी के धीरज तिवारी ने बिना अनुमति बोर्ड लगवाने के सवाल पर कहा, लिखित में अनुमति तो नहीं ली गई थी लेकिन मंदिर प्रबंध समिति के पदाधिकारियों से पूछने के बाद ही बोर्ड लगवाया। यह भी बताया कि मंदिर परिसर में ही ग्लोसाइन बोर्ड तैयार करवाया गया था। मंदिर में बोर्ड लगाने की जानकारी समिति के पदाधिकारियों को थी। किसी ने भी आपत्ति दर्ज नहीं कराई। आपत्ति दर्ज कराते तो हम बोर्ड लगवाकर विवाद में क्यों पड़ते।
सीधी बात : एसडीएम पन्ना संजय नागवंशी
q. मंदिर भवन को क्षति पहुंचाने की पुष्टि के बाद भी एफआईआर क्यों नहीं करवाई गई?
a. कंपनी के जिम्मेदारों को नोटिस जारी कर तलब किया है।
q. मंदिर भवन में बिना अनुमति बोर्ड लग गया, प्रबंध समिति ने शिकायत क्यों नहीं की?
a. यह जांच का विषय है।
q. मंदिर समिति पदाधिकारियों की भी भूमिका है ?
a. जांच के बाद स्पष्ट हो जाएगा।
q. समिति की भूमिका की जांच करने टीम तक नहीं बनाई गई?
a. मैं खुद जांच कर रहा हूं।

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