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छोटे-छोटे कमरों में लग रही ओपीडी, गर्मी और उमस से परेशान मरीजों में संक्रमण का खतरा

-जिला अस्पताल परिसर में मरीजों के हिसाब से नहीं है ओपीडी
-नई ओपीडी बनने वाली जगह पर बन रही ५० बेड की क्रिटिकल यूनिट
-प्रबंधन के पास अस्पताल में नहीं कहीं भी जगह

दमोहJun 16, 2024 / 07:12 pm

आकाश तिवारी

-जिला अस्पताल परिसर में मरीजों के हिसाब से नहीं है ओपीडी
-नई ओपीडी बनने वाली जगह पर बन रही ५० बेड की क्रिटिकल यूनिट
-प्रबंधन के पास अस्पताल में नहीं कहीं भी जगह
दमोह. जिला अस्पताल में पिछले एक महीने से लगातार मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है। औसतन देखा जाए तो १००० से अधिक मरीज प्रतिदिन इलाज कराने के लिए पहुंच रहे हैं। लेकिन परेशानी यह है कि जहां पर डॉक्टर बैठ रहे हैं। वहां पर मरीजों का चेकअप करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। छोटे-छोटे कमरों में ओपीडी संचालित हो रही है। भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। इस स्थिति में कतार में खड़े मरीजों को गर्मी की दोहरी मार भी झेलनी पड़ रही है। इनमें महिलाए और बच्चे भी शामिल हैं। इधर, जगह कम होने के कारण मरीजों को बैठने तक के लिए प्रबंधन जगह नहीं उपलब्ध करा पा रहा है। कई मरीज जगह की कमी के कारण ओपीडी के बाहर सड़क पर खड़े होकर भीड़ छटने का इंतजार करते देखे जा सकते हैं। परेशानी यह है कि अस्पताल के अंदर ओपीडी कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए जगह नहीं है। ऐसे में प्रबंधन भी अब खुद को बेबस महसूस कर रहा है।
-क्रिटिकल केयर यूनिट की जगह बनना था ओपीडी कॉम्प्लेक्स
ऐसा नहीं है कि नए ओपीडी कॉम्प्लेक्स के निर्माण को लेकर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई हो। बकायदा प्रशासनिक स्तर से मंजूरी लेकर न्यू ओपीडी कॉम्प्लेक्स बनाने का काम प्रस्तावित हुआ था, लेकिन उसकी जगह ५० बिस्तर का क्रिटिकल केयर यूनिट बन रहा है। बता दें कि जहां पर ओपीडी कॉम्प्लेक्स बनना था। उस जगह पर केंद्र के प्रोजेक्टर के तहत १६ करोड़ रुपए क्रिटिकल केयर यूनिट के लिए स्वास्थ्य विभाग को मिले थे। मरीजों के चेकअप से ज्यादा गंभीर मरीजों के इलाज को तब्बजो दी गई। वहीं, आनन-फानन में इस जगह पर क्रिटिकल केयर यूनिट के निर्माण का काम शुरू करा दिया गया।
-मरीजों में सक्रमण फैलने का भी खतरा
झोलाछापों के विरुद्ध हुई कार्रवाई के बाद जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। अभी जहां पर ओपीडी लग रही है। उस जगह पर मरीज ठसाठस भरे देखे जा सकते हैं। इनमें कई संक्रमित बीमारियों की चपेट में आने वाले मरीज होते हैं, जिनके जरिए अन्य मरीज भी प्रभावित हो सकते हैं। यानी वे भी संक्रमण का शिकार हो सकते हैं।
-यह है मात्र दो विकल्प, तभी मिलेगी मरीजों को राहत
विकल्प-१
यदि अस्पताल के अंदर प्रबंधन को ओपीडी कॉम्प्लेक्स बनाना है तो सिविल सर्जन कार्यालय की पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर जी प्लस -२ बिल्डिंग का प्लान करना होगा। इससे एक तरफ सीएस ऑफिस भी नया बन जाएगा। वहीं, ओपीडी कॉम्प्लेक्स भी इसी भवन में बन जाएगा।
विकल्प-२
दूसरा विकल्प सीएमएचओ के बंगले के पास खाली पड़ी वन विभाग की जमीन है। जो अनुपयोगी है। प्रशासन चाहे तो यह जमीन अस्पताल प्रबंधन के लिए अलॉट कर सकता है। हालांकि यह आसान काम नहीं है।
वर्शन
एक हजार से अधिक की ओपीडी हो चुकी है। ओपीडी कॉम्प्लेक्स के लिए जगह नहीं है। जगह तलाश रहे हैं। इस संबंध में कलेक्टर से बात करेंगे।
डॉ. राजेश नामदेव, सिविल सर्जन दमोह

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