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500 साल पहले सुपर स्मार्ट सिटी थी ओरछा, जानिएं कैसी थी व्यवस्थाएं

Orchha was a super smart city 500 years ago, know what the arrangements were like

टीकमगढ़Jun 17, 2024 / 08:11 pm

anil rawat

ओरछा। खुदाई में सामने आया कमरा।

ओरछा। खुदाई में सामने आया कमरा।

श्रीराम राजा लोक: खुदाई में निकले कमरे और मंदिर का होगा जीपीएस सर्वे

टीकमगढ़. विश्व प्रसिद्ध श्रीरामराजा सरकार की नगरी ओरछा 500 साल पहले अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त सुपर स्मार्ट सिटी थी। यहां पर श्रीराम राजा लोक निर्माण के लिए चल रही खुदाई में इसके रहस्य सामने आ रहे है। वीआईपी पार्किंग में खुदाई के दौरान मिले कमरे और मंदिर के बाद सामने आया है कि यहां पर 500 साल पहले भी मौसम के अनुरूप रहने के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई थी।
ओरछा में 500 साल पहले भी रहने के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं जुटाई गई थी। यहां पर मौसम के अनुरूप अंडरग्राउंड बेसमेंट तैयार किए गए थे तो जल संरक्षण के लिए बावड़ी और फ्रेश एवं ठंडी हवा के लिए सावन-भादौ जैसे टावर बनाए गए थे। इसके साथ ही उस समय बेहतरीन कॉलोनियों का निर्माण किया गया था। वीआईपी पार्किंग के पास खुदाई में जमीन के अंदर कमरा और मंदिर सामने आने के बाद पुरातत्व विभाग ने यहां की जांच शुरू कर दी है। पुरातत्व विभाग के क्यूरेटर घनश्याम बाथम ने बताया कि यहां पर मशीनों से काम बंद कर दिया गया है और कुशल मजदूरों द्वारा मलबा हटा कर इसकी पूरी जांच की जा रही है। इस कमरे के अंदर और भी दरवाजे है। उन्हें खोलकर पूरी संरचना का पता किया जाएगा। वहीं पर्यटन विभाग के उपयंत्री पीयूष वाजपेयी ने बताया कि मंदिर परिसर में काम शुरू करने के पहले जीपीएस सर्वे कराया गया था। संभावना थी कि पूरे परिसर में नीचे बेसमेंट सिस्टम होगा, लेकिन सावन-भादौ और जुझार सिंह महल को छोड़ कर कहीं भी बेसमेंट नहीं मिला था। अब वीआईपी पार्किंग के पास बेसमेंट सामने आने के बाद यहां पर जीपीएस सर्वे कराकर पूरी बेसमेंट की पूरी जानकारी की जाएगी।
हर प्रमुख जगह बेसमेंट

क्यूरेटर घनश्याम बाथम ने बताया कि यह संरचना पूरी सुरक्षित है। इसके दूसरे गेट खोल कर पूरी संरचना को सामने लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि पूरे ओरछा में बेसमेंट की सुविधा थी। जहांगीर महल, राजमहल के साथ ही अन्य कोठियों के पास पहले भी इस प्रकार के बेसमेंट मिले है। विदित हो कि एक साल पूर्व राज महल परिसर में की गई खुदाई में भी ओरछा में व्यवस्थित कॉलोनी निकाली थी। इसमें मंत्रियों के लिए अलग तो कर्मचारियों के लिए अलग व्यवस्थाएं थी। बाथम का कहना है कि पहाड़ी एरिया होने के साथ ही नदी घाटी का किनारा होने से गर्मी और उमस से बचने के लिए उस समय इन संरचनाओं का निर्माण किया गया होगा।
बाढ़ के बाद हुए थे बंद

वीआईपी पॉर्किंग के पास निकले कमरे के मामले में पुरातत्व विभाग ने स्थानीय लोगों से भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। ऐसे में सामने आया है कि बहुत समय पहले तक यहां पर कर्मचारी निवास करते थे। एक बार बाढ़ आने के बाद इन कमरों को बंद कर दिया गया था। समय के साथ यह जमीन में दब गए और अब सामने आए है।
कहते है अधिकारी

ओरछा नगर को बहुत ही व्यवस्थित तरीके से बसाया गया था। राज महल परिसर में इससे पहले कॉलोनी निकली थी। राज महल, जहांगीर महल के साथ ही अन्य कोठियों में बेसमेंट की सुविधा है। ऐसे में समझा जा सकता है कि उस समय भी यहां पर मौसम अनुरूप रहने के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई थी।- घनश्याम बाथम, क्यूरेटर, पुरातत्व विभाग, ओरछा।

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