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नियम विरुद्ध हो रहा पैथोलॉजी लैब का संचालन, अधिकारी कर रहे अनदेखी

ऑनलाइन आवेदन की औपचारिकता तक सीमित कार्रवाईडिंडौरी. जिले में संचालित नियम विरुद्ध पैथोलॉजी के मामले पर स्वास्थ्य महकमे की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। स्वास्थ्य विभाग ने ऑनलाइन आवेदनों की बुनियाद पर इनको अभी भी छूट दे रखी है और इनके संचालन को प्रतिबंधित करने में रुचि नहीं ली है। हालात यह हैं कि […]

डिंडोरीJun 09, 2024 / 12:19 pm

Prateek Kohre

ऑनलाइन आवेदन की औपचारिकता तक सीमित कार्रवाई
डिंडौरी. जिले में संचालित नियम विरुद्ध पैथोलॉजी के मामले पर स्वास्थ्य महकमे की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। स्वास्थ्य विभाग ने ऑनलाइन आवेदनों की बुनियाद पर इनको अभी भी छूट दे रखी है और इनके संचालन को प्रतिबंधित करने में रुचि नहीं ली है। हालात यह हैं कि जिले में गली गली में चल रहीं पैथोलॉजी पर कार्रवाई करने की जगह प्रशासन और विभाग इन पैथोलॉजी को सह दे रहा है। मामला प्रकाश में आने के बाद कुल पांच पैथोलॉजी संचालकों ने मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में लैब संचालन के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है। इनमें जिला मुख्यालय के तीन इंडिया डायग्नोस्टिक पैथोलॉजी, आरव पैथोलॉजी, ओम पैथोलॉजी शामिल हैं, जबकि शहपुरा से सुबिधा पैथोलॉजी और गाडासरई से एक आवेदन दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा अन्य लैब का संचालन बिना अनुमति हो रहा है। अभी भी बिना अनुमति और मान्यता के संचालित इन केंद्रों के विरुद्ध कार्रवाई से परहेज करते हुऐ जिम्मेदार आगामी दिनों में अनुमति की प्रक्रिया पूरा करने की बात कह रहे हैं। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते शहर से लेकर गांव तक बिना पैथॉलोजिस्ट और बिना रजिस्ट्रेशन के पैथोलॉजी संचालित की जा रही हैं। इनके पास मेडिकल बेस्ट और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अनापत्ति प्रमाण पत्र भी नहीं है। इसके बावजूद आजतक स्वास्थ्य अमले ने किसी भी पैथोलॉजी लैब के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की है। मुख्यालय में अधिकांश पैथोलॉजी जिला अस्पताल के आसपास संचालित हैं, जो व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। इनको सीधे तौर पर लाभ पहुंचाने को कुछ चिकित्सक भी मेहरबान रहते हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग के अभिलेखों में अभी तक कोई भी पैथोलॉजी लैब दर्ज नहीं है। इसके बाद भी जिले में दर्जनों पैथोलॉजी में मरीजों की जांच की जा रही है और बाकायदा जांच रिपोर्ट भी जारी हो रही है।
नियमों की अनदेखी
जानकारों के मुताबिक पैथोलॉजी जांच की रिपोर्ट को प्रमाणित करने के लिए एमसीआइ (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) द्वारा पंजीकृत तथा पोस्ट ग्रेज्युएट डिग्रीधारक चिकित्सक को ही अधिकृत माना गया है। इसके साथ ही लैब में योग्यताधारी लैब टेक्नीशियन पदस्थ होना जरूरी है। जिले में नॉन पैथोलॉजिस्ट तथा झोलाछाप चिकित्सा कर्मी भी नमूना लेकर जांच रिपोर्ट दे रहे हैं।
योग्यता और रजिस्ट्रेशन दरकिनार
लैब संचालन के लिए शासन द्वारा विधिवत नियम बनाए गए हैं। जिले में डीएमएलटी व उनके सहयोगी तक लैब संचालित कर रहे हैं। वही रिपोर्ट में साइन करके दे रहे हैं, जबकि लैब संचालक एमबीबीएस, एमडी पैथोलॉजिस्ट होना चाहिए। इतना ही नहीं संचालित हो रहीं लैब के पास न ही नियमानुसार पॉल्यूशन बोर्ड का रजिस्ट्रेशन है और न ही पंजीकृत मेडिकल वेस्ट फर्म का पंजीयन है।
20 रुपए में 110 जांच की सुविधा
जिला अस्पताल में मात्र 20 रुपये में 110 प्रकार की पैथालॉजी जांच की सुविधा उपलब्ध है। यहां आधुनिक उपकरणों से सरकारी तौर पर अधिकृत जांच रिपोर्ट जारी की जाती है। जागरूकता की कमी के चलते मरीज इसका लाभ नहीं ले पा रहे। इसमें कमीशन के चक्कर में चिकित्सकों की भूमिका भी संदिग्ध है।
कलेक्शन सेंटर की आड़ में खेल
कार्रवाई से बचने लैब संचालकों ने सांठगांठ करके कलेक्शन सेंटर के नाम पर खेल करने का जुगाड़ बना लिया है। अन्य जरूरी मापदंड को पूरा करने में यह संचालक नाकाम साबित हो रहे हैं।

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