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सौंटरिंग के हैं बड़े फायदे, बस चलें आहिस्ता

एक दिन के लिए धीमी गति से चलें और इत्मीनान से टहलें। किसी गंतव्य की ओर न भागें। बस शांत दिमाग से थोड़ी देर के लिए सब कुछ भूल कर टहलने निकल जाएं।

जयपुरJun 17, 2024 / 09:07 am

sangita chaturvedi

एक दिन के लिए धीमी गति से चलें और इत्मीनान से टहलें। किसी गंतव्य की ओर न भागें। बस शांत दिमाग से थोड़ी देर के लिए सब कुछ भूल कर टहलने निकल जाएं।

एक दिन के लिए धीमी गति से चलें और इत्मीनान से टहलें। किसी गंतव्य की ओर न भागें। बस शांत दिमाग से थोड़ी देर के लिए सब कुछ भूल कर टहलने निकल जाएं।

वल्र्ड सौंटरिंग डे… शायद ही कभी आपने इसके बारे में सुना होगा? आपने ही क्या ज्यादातर लोगों को इसके बारे में नहीं पता होगा। अन्य अंतरराष्ट्रीय दिवस की तरह भले ही इसकी चर्चा नहीं होती। इसका महत्त्व नहीं बताया जाता। लेकिन आज की भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल में इस दिन का बड़ा महत्त्व होता जा रहा है।
हर साल वल्र्ड सौंटरिंग डे १९ जून को मनाया जाता है। सौंटरिंग का मतलब बिना जल्दबाजी घूमना-फिरना। चहलकदमी करना। जिसका सीधा वास्ता तन-मन के रिलैक्स होने से है। एक दिन के लिए धीमी गति से चलें और इत्मीनान से टहलें। किसी गंतव्य की ओर न भागें। बस शांत दिमाग से थोड़ी देर के लिए सब कुछ भूल कर टहलने निकल जाएं। यहां प्रकृति का साथ हो, तो सोने पर सुहागा जैसा होगा।
पता ही नहीं साल निकल गया
साल दर साल निकलते रहते हैं और हमें जिंदगी की भागदौड़ में पता ही नहीं चलता। वास्तव में जीवन जीया ही नहीं। बस भागते रहे। इसलिए थोड़ा रुकें, गहरी सांस लें और जीवन का आनंद लें। जिंदगी में थोड़ा इत्मीनान भी जरूरी है। इस दिन का उद्देश्य हर किसी को अपनी व्यस्त दिनचर्या से थोड़ा विराम लेने और वर्तमान क्षण में डूबने के लिए प्रोत्साहित करना है।
क्या और कैसे करना है
इसके लिए कोई सुखद स्थान चुनें। प्रकृति के बीच जाएं। वहां बिल्कुल आराम से टहलें। वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करें। अपने आस-पास के दृश्यों, ध्वनियों और संवेदनाओं पर ध्यान दें। अपने आप को किसी विशिष्ट लक्ष्य को ध्यान में रखे बिना भटकने दें।
क्या हैं फायदे
इससे तनाव कम होता है। मानसिक रूप से स्वस्थ रहते हैं। प्रोडक्टिविटी बढ़ती है। दिमाग शांत रहता है। शारीरिक रूप से भी हम स्वस्थ रहते हैं।

गतिहीन जीवनशैली से सावधान
यहां सेडेंटरी लाइफस्टाइल यानी गतिहीन जीवनशैली के खतरे भी समझना जरूरी है। लंबे समय तक बैठे रहने को सेडेंटरी लाइफस्टाइल कहते हैं। गतिहीन जीवनशैली से कई जानलेवा बीमारियों का खतरा होता है। इसमें मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, कैंसर और हृदय रोग शामिल हैं। सेडेंटरी लाइफस्टाइल से स्ट्रेस बैली बढ़ सकती है। तनाव के चलते पेट जो चर्बी जमा होती है, उसे स्टे्रस बैली कहते हैं।
बॉक्स
स्टडी में खुलासा
हालिया शोध में सामने आया कि प्रकृति के बीच चंद पल गुजारना कितना लाभदायक होता है। ब्रेन, बिहेवियर एंड इम्युनिटी जर्नल में प्रकाशित हुई स्टडी में खुलासा किया गया है कि प्रकृति के बीच शांति से बिताया गया कुछ समय आपको कई बीमारियों से दूर रख सकता है। इससे दिल और डायबिटीज की बीमारी का जोखिम कम होता है। वहीं, इन्फ्लेमेशन यानी सूजन से भी राहत दिलाता है। अमेरिका के कॉरनेल यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान विभाग में प्रोफेसर व शोध दल का नेतृत्व करने वाले एंथनी ओंग कहते हैं कि यह शोध बताता है कि प्रकृति का आनंद लेते हुए हम कैसे सूजन से जुड़ी दिल और डायबिटीज जैसी बीमारियों से बचाव या उसके जोखिम को कम कर सकते हैं। स्टडी करने वाले गु्रप ने इसके लिए 1,244 प्रतिभागियों को शामिल किया।

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