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साधु-संतों के शिथिल होने से कमजोर होगा समाज: आचार्य विमलसागर

आचार्य ने सहवर्ती संतों के साथ किया नगर प्रवेश

बैंगलोरJun 27, 2024 / 04:09 pm

Santosh kumar Pandey

vimalsagar

मैसूरु. आचार्य विमलसागर सूरीश्वर ने कहा कि धर्म के अस्तित्व को टिकाना और समाज को उन्नति के पथ पर आगे बढ़ाना सरल नहीं है। मात्र कुछ धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन अथवा समाज के सामूहिक भोजन समारोहों से समाज या धर्म की रक्षा नहीं हो जाती। इसके लिए तो अच्छे, ज्ञानी और समर्पित साधु-संतों की हर काल में आवश्यकता रहेगी। जिस परंपरा के साधु-संत शिथिल या कमजोर होंगे, वह समाज और परंपरा धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगे।
आचार्य ने कहा कि ज्ञानी और समर्पित साधु-संत ही राष्ट्र, धर्म व समाज की धुरी होते हैं। शास्त्रों ने अच्छे और ज्ञानी साधु-संतों के योग को दुर्लभ कहा है। उन्होंने कहा कि जब महान् पुण्य का योग बनता है तो अच्छे साधु-संत अपने शहर या घर में आते हैं। जैनाचार्य जे.एस.एस. डेंटल कॉलेज परिसर में श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन दे रहे थे। सिद्धलिंगपुरा स्थित महावीर जिनालय से बुधवार को आचार्य विमलसागर सूरीश्वर और गणि पद्मविमलसागर ने शिष्यों के साथ मैसूरु शहर की सीमा में प्रवेश किया। इस अवसर पर श्रध्दालुओं ने मंगल कलश, श्रीफल आदि मंगल सामग्री से उन्हें बधाया । उन्होंने मंगलपाठ कर सबकी सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर कल्याण मित्र वर्षावास समिति के कांतिलाल चौहान, अशोक दांतेवाड़िया, भंवरलाल लुंकड़, बाबूलाल बागरेचा, जीतू लुंकड़, अनिल लुंकड़, ऋषभ बागरेचा, भावेश बागरेचा, भोजराज जैन,दलीचंद श्रीश्रीमाल जैन,महावीर जैन, मनीष मुणोत,अमित दांतेवाडिया और बेंगलूरु से अशोक कांकरिया, मुकेश दांतेवाडिया, गौतम भंसाली, यकीन गोड़वाड़ा, संयम श्रीश्रीमाल के साथ अनेक श्रावक-श्राविका उपस्थित थे।

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