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टॉक शो: विद्यार्थी और शिक्षक दोनों के लिए विकसित हों शोध केंद्र

-शिक्षाविद बोले…शिक्षा के लिए बजट में अतिरिक्त प्रावधान किया जाए

श्री गंगानगरJun 20, 2024 / 01:05 pm

Krishan chauhan

  • श्रीगंगानगर. राज्य सरकार जुलाई में अपना पहला पूर्ण बजट पेश करेगी। नई सरकार बनते ही पूर्ववर्ती सरकार की उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा की कई नीतियों को लेकर रिव्यू करने के आदेश दिए गए थे। ऐसे में बजट में शिक्षा को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा और प्रावधान हो सकते हैं। बजट को लेकर लोगों से सुझाव भी मांगे गए हैं। शिक्षा पर सरकार का अधिक फोकस रहेगा। इसी विषय को लेकर बुधवार को राजस्थान पत्रिका की ओर से चौधरी बल्लूराम गोदारा राजकीय कन्या महाविद्यालय में टॉक शो का आयोजन किया गया। इसमें शिक्षकों ने उच्च शिक्षा, स्कूल शिक्षा, खेलकूद, तकनीकी शिक्षा सहित अन्य मुद्दों पर अपनी राय रखी। साथ ही विद्यार्थी और शिक्षक दोनों के लिए महाविद्यालय अथवा जिला स्तर पर शोध केंद्र विकसित करने की बात पर भी जोर दिया।

तकनीकी विकास के लिए प्रशिक्षित

  • शिक्षण संस्थानों में स्थायी निवेश को बढ़ावा देना चाहिए। शिक्षक, शिक्षा के साथ सामाजिक क्षेत्र में विकास के प्रयास करे। शिक्षकों को तकनीकी विकास के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
  • -प्रो.पूनम सेतिया,प्राचार्य,चौधरी बल्लूराम गोदारा राजकीय कन्या महाविद्यालय
  • नैतिक मूल्यों की शिक्षा पर जोर देना चाहिए। नए खोलेमहाविद्यालयों में पर्याप्त स्टाफ व मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हो। नवाचार एवं कौशल विकास के लिए अवसर के साथ फंड भी उपलब्ध करवाया जाना चाहिए

-डॉ.श्याम लाल,आचार्य।

  • शिक्षण कार्य शिक्षकों का प्राथमिक दायित्व है। शिक्षण के अतिरिक्त कार्यों को सीमित करवाना चाहिए। शिक्षा में नए प्रयोग किए जाने चाहिए। आर्थिक कमजोर विद्यार्थियों के लिए नई योजनाएं बनाई जानी चाहिए।

-डॉ.गोपीराम,सह-आचार्य,डॉ.भीमराव अंबेडकर राजकीय महाविद्यालय

  • नैतिक व व्यावहारिक शिक्षा पर जोर दिया जाना चाहिए।विद्यार्थी के लिए एक व्यवहारिक व प्रैक्टिकल विषय लेना अनिवार्य हो। महाविद्यालय में विद्यार्थियों की उपस्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

-डॉ.हरीश कटारिया,उप-प्राचार्य,गुरु नानक कन्या महाविद्यालय

  • महाविद्यालय में प्रयोगशालाओं को अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाना चाहिए।इसके लिए बजट में विशेष प्रावधान रखते हुए विशेष फंड उपलब्ध करवाया जाना चाहिए।

-डॉ.पटेल राम सुथार,सह-आचार्य।

खेल-सुविधाओं के लिए पर्याप्त बजट

  • स्कूली शिक्षा में खेल को बढ़ावा दिया जा रहा है। उच्च शिक्षा में शारीरिक शिक्षा को विषय के रूप में उच्च शिक्षा में शामिल किया जाना चाहिए। खेल-सुविधाओं के लिए पर्याप्त बजट का प्रावधान करना चाहिए।
  • -डॉ. रेखा भारद्वाज,शारीरिक शिक्षा अनुदेशक।
  • बालिकाओं से पहले प्रवेश शुल्क के नाम पर फीस ली जाती है और बाद में छात्रवृति दी जाती है। इसमें सुधार की आवश्यकता है। साथ ही कौशल विकास के कोर्स उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

-मधु वर्मा,सहायक आचार्य,

  • महाविद्यालय में स्व-वित्तपोषी विषयों को नियमित किया जाना चाहिए ताकि शुल्क कम हो। स्कूटी वितरण तय समय पर हो ताकि विद्यार्थी स्कूटी का आवागमन में सुविधा ले सके।

-डॉ.राकेश झांब,सह-आचार्य।

  • जिला स्तर पर रिसर्च लैब हो तथा पाठ्यक्रम में सुधार किया जाना चाहिए। ग्रामीण और निचले स्तर पर मॉडल स्कूल के समान सुविधाएं उपलब्ध करवानी चाहिए, कॅरियर आधारित कार्यक्रमों पर भी ध्यान दिया जाए।
  • -विवेक शर्मा,सहायक आचार्य।

व्यावसायिक शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए

  • लैब के लिए बजट बढ़ाया जाना चाहिए।स्कूल और उच्च शिक्षा को हाइब्रिड मॉडल पर लाने की जरूरत है। कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए ताकि बेरोजगारी को कम किया जा सके।

-जसवीर सिंह,सहायक आचार्य ।

  • शिक्षा की गुणवत्ता में विस्तार किया जाना चाहिए। प्रदेश में कहीं पर भी विश्वविद्यालयी छात्र-छात्राओं के लिए ट्रांसपोर्ट की समुचित व्यवस्था नहीं है। इससे कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
  • -मनोज बजाज,सहायक आचार्य ।
  • विद्यार्थी और शिक्षक दोनों के लिए महाविद्यालय अथवा जिला स्तर पर शोध केंद्र विकसित किए जाएं । वाचनालय विकसित किए जाएं। राष्ट्रीय स्तर के विश्वविद्यालयों में शैक्षिक भ्रमण करवाया जाना चाहिए।
  • -डॉ.आशाराम भार्गव,सहायक आचार्य ।
  • जिला स्तर पर जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की सुविधा हो। महाविद्यालयों में पानी, फर्नीचर,खेल मैदान आदि की सुविधाएं हो। नैतिक शिक्षा व संस्कारों की शिक्षा उपलब्ध करवाई जानी चाहिए।

– डॉ.चंद्रपाल जांदू,सहायक आचार्य।

नियमित भर्ती की जानी चाहिए

  • संविदा पद समाप्त कर नियमित भर्ती की जानी चाहिए। स्कूल स्तर पर ही राज्य सरकार को कॅरियर काउंसलिंग की सुविधा शुरू करनी चाहिए। ।
  • -सुरेन्द्र खिलेरी, शिक्षक, स्कूली शिक्षा।
  • संविदाकर्मियों का वेतन बढ़ाया जाना चाहिए। साथ ही नई शिक्षा नीति के अनुरूप प्रावधान हो। नई शिक्षा नीति के अनुरूप स्कूली शिक्षा को मजबूत करना चाहिए तथा शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देना चाहिए।
  • -सुनील भारद्वाज,स्कूल शिक्षा।

बजट से उमीदें

  • शिक्षा पर खर्च बढ़े
  • आधारभूत सुविधाएं मजबूत हो
  • स्कूलों में कॅरियर काउंसलिंग शुरू हो
  • नए स्कूल व कॉलेज खोलने की बजाय पुराने मजबूत करें
  • कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा पर फोकस

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