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बंद कोयला खदान में शुरू हुई केज कल्चर मत्स्य पालन योजना 2 वर्ष में ही ठप हो गई

अनूपपुर. जिले में शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में किस तरह से लापरवाही की जा रही है, इसका अनुमान अनूपपुर जनपद के ग्राम पंचायत दैखल में बंद कोयला खदान में संचालित केज कल्चर मत्स्य पालन योजना में देखकर लगाया जा सकता है। शासकीय सहायता से प्रारंभ यह योजना शुरू के 2 वर्ष तो ठीक से संचालित […]

अनूपपुरJun 17, 2024 / 12:04 pm

Sandeep Tiwari

अनूपपुर. जिले में शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में किस तरह से लापरवाही की जा रही है, इसका अनुमान अनूपपुर जनपद के ग्राम पंचायत दैखल में बंद कोयला खदान में संचालित केज कल्चर मत्स्य पालन योजना में देखकर लगाया जा सकता है। शासकीय सहायता से प्रारंभ यह योजना शुरू के 2 वर्ष तो ठीक से संचालित हुई लेकिन अब पूरी तरह से बंद हो गई है। योजना के लिए दिया गया सामान भी धीरे-धीरे चोरी हो रहा है। मत्स्य विभाग द्वारा केज कल्चर योजना के तहत बंद कोयला खदान में अनूपपुर जनपद के ग्राम पंचायत दैखल में बजरंग स्व सहायता समूह तथा सीता स्व सहायता समूह को एनआरएलएम विभाग के माध्यम से ऋण स्वीकृत कराते हुए मत्स्य विभाग के सहयोग से केज कल्चर योजना का लाभ दिया गया था। इसके अंतर्गत 4 लाख रुपए और मत्स्य पालन का प्रशिक्षण भी दिलाया गया। 2 वर्षों तक कार्य किए जाने के पश्चात यह योजना अब पूरी तरह से बंद पड़ गई है। स्व सहायता समूह के सदस्यों ने बताया कि योजना के तहत मत्स्य पालन का प्रशिक्षण तो दिया गया लेकिन पूरी जानकारी के अभाव में इस कार्य में वह सफल नहीं हो पा रहे हैं। ज्यादा बड़ी मछलियां जाल में नहीं फंस पाती हैं तथा कोयला खदान की गहराई बहुत है, जिसकी वजह से मछलियों के बीज डालने के बावजूद पोषण अनुपात में उत्पादन प्राप्त नहीं होता है। पर्याप्त आय न होने के कारण समूह के सदस्यों का रुझान इसमें नहीं बन पा रहा है। जिसके कारण मत्स्य पालन योजना बीते 2 वर्षों से बंद पड़ी हुई है।
लगातार चोरी हो रहे हैं संसाधन, मत्स्य पालन पूरी तरह हुआ बंद

योजना के तहत मत्स्य पालन का प्रशिक्षण के बाद समूह के सदस्यों ने मछली बीज का क्रय करते हुए बंद कोयला खदान में संग्रहित वर्षा जल में मत्स्य पालन प्रारंभ किया। यहां पैदा होने वाली मछली का विक्रय कर समूह के सदस्य लाभांश का वितरण आपस में करते थे। 2 वर्षों तक यह कार्य धीरे-धीरे संचालित होता रहा, लेकिन अब पूरी तरह से बंद है। बताया जाता है कि करीब 2 वर्षों से योजना बंद पड़ी हुई है। जहां मत्स्य पालन स्थल पर लगाए गए नाव, शेड सहित अन्य सामग्री धीरे-धीरे चोरी हो रही है और समूह के साथ ही विभागीय अधिकारी इस पर लापरवाही बरत रहे हैं।
जब तक अनुदान मिल रहा था तब तक समूह ने इसका संचालन किया। अनुदान बंद होने बाद संचालन बंद कर दिया है। समूह के साथ बैठक कर समझाइश दी जा रही है। योजना को प्रारंभ कराने का प्रयास किया जा रहा है। कलेक्टर ने भी मौके का निरीक्षण किया था। उनके संज्ञान में यह मामला है। जल्द ही इसे शुरू किया जाएगा। जो सामान चोरी हो रहा है, उसे रोकने के लिए समूह को निर्देशित किया जाएगा। एसके सोंधिया, उपसंचालक मत्स्य विभाग

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