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ओरछा रोड़ थाना के चैनल पर लगा था ताला, बचाओ-बचाओ चीख रहे थे दलित परिवार के बच्चे- बच्चियां

दो थानों की पुलिस और तहसीलदार मौके पर पहुंचे और जमीन पर 30 साल से काबिज और कोर्ट केस लड़ रहे दलित परिवार को घसीटकर थाना ले जाया गया। थाना का चैनल बंद कर दलित परिवार के पुरुषो, लडक़ों, लड़कियों और महिलाओं को कैद कर दिया।

छतरपुरJun 29, 2024 / 08:18 pm

Dharmendra Singh

police station

थाना में ताले में कैद दलित परिवार चीखता हुआ

छतरपुर. शासन के निर्देश के मुताबिक 15 जून के बाद जमीन का सीमांकन नहीं किया जा सकता है। लेकिन छतरपुर प्रशासन ने राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते शासन के आदेश को ताक पर रखकर शनिवार को सौंरा गांव की विवादित जमीन का सीमांकन करने का प्रयास किया। दो थानों की पुलिस और तहसीलदार मौके पर पहुंचे और जमीन पर 30 साल से काबिज और कोर्ट केस लड़ रहे दलित परिवार को घसीटकर थाना ले जाया गया। थाना का चैनल बंद कर दलित परिवार के पुरुषो, लडक़ों, लड़कियों और महिलाओं को कैद कर दिया। थाना में कैद परिवार के बचाओ-बचाओ की चीख पुकार का वीडियो वायरल होने पर मामला सामने आया और हडक़ंप मचने पर प्रशासन बैकफुट पर आया।
थाना में ताले में कैद दलित परिवार चीखता हुआ
वीडियो में दलित परिवार की ह्दयविदारक चीखें सुनने के बाद मीडिया ओरछा रोड थाना पहुंची। प्रशासन में भी हडक़ंप मच गया और फिर सीएसपी, तहसीलदार भी थाना पहुंचे। जहां पीडि़त परिवार के कोमल अहिरवार ने बताया कि उनकी पैत्रिक जमीन दीपेंद्र चौरसिया को उनके पूर्वजों ने बेच दी। लेकिन उनकी उसमें सहमति नहीं थी। इस मामले को लेकर उन्होंने कोर्ट केस किया है। जिसकी सुनवाई चल रही है। लेकिन शनिवार को दो थानों की पुलिस, तहसीलदार मौके पर पहुंचे और कोर्ट केस का हवाला देकर सीमांकन रोकने की अपील करने पर पुलिस पूरे परिवार को घसीटकर थाना ले आई। रास्ते में गाड़ी में पुलिस ने सभी के साथ मारपीट भी की। थाना में लाकर चैनल में ताला लगाकर पूरे परिवार को कैद कर दिया। पीडि़त परिवार ने इस मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप भी लगाए हैं।
वहीं, इस मामले में सौंरा मंडल की तहसीलदार इंदु सिंह गौड़ का कहना है कि सीमांकन करने में व्यवधान डालने पर परिवार को मौके से हटाया गया। शासकीय कार्य में ये परिवार बाधा डाल रहा था। उन्होंने किसी को थाना में कैद किए जाने से इंकार किया और कहा कि तीन बार सीमांकन का प्रयास किया गया, लेकिन परिवार करने नहीं दे रहा था। उन्होंने ये भी कहा कि शासन के आदेश के मुताबिक 15 जून के बाद सीमांकन नहीं किया जा सकता, इसलिए सीमांकन करने के लिए गठित की गई टीम ने कार्रवाई की। लेकिन तहसीलदार ये भूल गई कि वे 29 जून को कह रही है कि 15 जून के बाद सीमांकन न करने के शासन के आदेश हैं।

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