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हवेलियों की नगरी पर लग रहा जर्जर इमारतों का ग्रहण

इमारतों के मालिक बेपरवाह, नगर निगम बरत रहा उदासीनता बीकानेर. हवेलियों के शहर बीकानेर में दशकों पुरानी दर्जनों रियासतकालीन इमारतें हैं। ये इमारतें अब पुरानी होने व उचित सार संभाल नहीं होने से जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी हैं। हर साल बारिश के दौरान अनेक इमारतें भरभरा कर गिर रही हैं। अनेक ऐसी इमारतें बंद पड़ी […]

बीकानेरJun 02, 2024 / 09:18 pm

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इमारतों के मालिक बेपरवाह, नगर निगम बरत रहा उदासीनता

बीकानेर. हवेलियों के शहर बीकानेर में दशकों पुरानी दर्जनों रियासतकालीन इमारतें हैं। ये इमारतें अब पुरानी होने व उचित सार संभाल नहीं होने से जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी हैं। हर साल बारिश के दौरान अनेक इमारतें भरभरा कर गिर रही हैं।
अनेक ऐसी इमारतें बंद पड़ी हैं, जबकि कई इमारतों में लोग रह भी रहे हैं। इन जर्जर इमारतों के कारण कभी बड़ा हादसा हो सकता है। इन इमारतों की सूची होने के बाद भी नगर निगम और जिला प्रशासन आंख मूंदे बैठे हैं। बताया जा रहा है कि अनेक इमारतों के मालिक अब बीकानेर में नहीं रह रहे। कुछ के मालिक इन पुरानी व जर्जर इमारतों को छोड़ कर शहर में अन्यत्र निवास भी कर रहे हैं। हर साल ये जर्जर इमारतें खतरे के निशान को पार कर रही हैं।
नोटिस जारी कर इतिश्री

शहर में स्थित पुरानी और जर्जर स्थिति में पहुंच चुकी इमारतों का सर्वे निगम की ओर से किया जा चुका है। ऐसी इमारतों की सूची भी निगम में है। निगम हर साल ऐसी इमारतों पर महज नोटिस चस्पा कर अपने दायित्व की इतिश्री कर रहा है। इमारतों के खतरनाक हिस्सों को उतरवाने की पहल निगम नहीं कर रहा, जबकि हर साल जर्जर इमारतें ढह रही हैं।
पारिवारिक मतभेद भी

कुछ इमारतों के मालिक बीकानेर में और कुछ बीकानेर से बाहर रह रहे हैं। इन इमारतों को लेकर पारिवारिक मतभेद भी चल रहे हैं, जिसके कारण इनकी देखभाल नहीं हो पा रही है। साल दर साल इन इमारतों की स्थिति खराब होती जा रही है व कुछ न कुछ हिस्सा बारिश के दौरान गिरता रहता है।
हर साल ढह रही

बारिश के दौरान शहर में हर साल पांच से सात जर्जर इमारतें अथवा उनके बदहाल हिस्से गिरते रहते हैं। इमारतों के ढहने से जान-माल का नुकसान भी हो चुका है। हाल ही में डागा चौक में एक पुराने आवासीय मकान के ढहने से घरेलू सामान मलबे में दब कर नष्ट हो गया। बाबा रामदेव पार्क के पास बुजुर्ग की मकान के मलबे में दबने से मौत भी हो चुकी है।
हर क्षेत्र में जर्जर इमारतें

परकोटा क्षेत्र के पुराने शहर के लगभग हर क्षेत्र में गली-मोहल्लों से चौक-चौराहों और मुख्य मार्गों के पास पुरानी और जर्जर इमारतें स्थित हैं। पुराने शहर में सौ से अधिक जर्जर इमारतें हैं। हर समय इनके भर भरा कर गिरने की आशंका बनी रहती है। इनके पास आवासीय मकान बने हैं व व्यस्ततम मार्ग भी हैं।
इन क्षेत्रों में जर्जर इमारतें

नगर निगम जानकारी अनुसार नथानी सराय, झंवरों का चौक, साले की होली, रंगा गली,रघुनाथ मंदिर के पास, पुष्करणा स्कूल के पास, भैंरु भवन के पास, गुलजार बस्ती, डार मोहल्ला, हाफिज कॉलोनी, नायकों का मोहल्ला शिव मंदिर के पास, छोटा राणीसर बास, राणीसर बास नायकों का मोहल्ला, एमडीवी रोड, भाटों का बास, ओडो का बास, भट्टोलाई रोड, मेघवाल मोहल्ला श्रीरामसर, मालियों का मोहल्ला श्रीरामसर, केसरिया चौकी के पास श्रीरामसर, करमीसर, विश्वकर्मा गेट के अंदर काली माता मंदिर के पास, विवेकनाथ बगीची के पास, ब्रह्म बगीची के पास, दम्माणी पंचायती बगीची के पास, नयाशहर थाने के पीछे, नत्थूसर बास मालियों का मोहल्ला, विश्वकर्मा गेट के बाहर वाल्मीकि बस्ती, छींपों का मोहल्ला कब्रिस्तान के पीछे,डागा चौक, मोहता चौक, चाय पट्टी सहित पुराने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जर्जर इमारतें हैं।
फैक्ट फाइल

120 से अधिक जर्जर इमारतें है शहर में

80 साल से अधिक पुरानी है जर्जर इमारतें

03 मंजिल तक बनी हुई है अनेक इमारतें

04 दर्जन से अधिक जर्जर इमारतों व मकानों में रह रहे है परिवार
07 इमारतें वर्षों से बंद पड़ी

टॉपिक एक्सपर्ट – ऐतिहासिक विरासत को सहेजना जरूरी, अन्यथा किताबों में सिमट जाएंगे

लाल पत्थरों पर की गई सुंदर, कलात्मक और बारीक नक्काशी से लबरेज शहर की हवेलियां और इमारतें शहर का गौरव और स्वर्णिम इतिहास हैं। देखने में आ रहा है कि लंबे समय से बंद पड़ी कलात्मक हवेलियां और इमारतें देखभाल के अभाव में ढह रही हैं। यह पीड़ादायक है। हवेलियों के मालिक बीकानेर से बाहर रहे हैं। वे न यहां आ रहे और न ही सार-संभाल कर रहे हैं। बारिश के पानी, सीलन, कमरों, हवेलियों के न खुलने और पर्याप्त हवा न लगने से ये जर्जर हो रही हैं। यह शहर का गौरव, स्वर्णिम इतिहास, ऐतिहासिक धरोहर है। हमारे शहर की विरासत है। इनकी देखरेख जरूरी हैं, अन्यथा ये धीरे-धीरे इतिहास के पन्नों में सिमट जाएंगे। केवल किताबों में ही बीकानेर का नाम हजार हवेलियों का शहर रह जाएगा। निजी सम्पत्ति होने के कारण शासन-प्रशासन इनमें सीधी दखल नहीं दे सकता है, लेकिन इमारतों के मालिकों से सम्पर्क कर व बातचीत कर इनकी उचित सार संभाल के लिए प्रेरित जरूर कर सकता है।
जिया उल हसन कादरी, लेखक- पुस्तक ‘हजार हवेलियों का शहर बीकानेर’

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