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देवभाषा की हालत दयनीय, हनुमानगढ़ शहर के विद्यार्थी तरस रहे सेकंडरी व हायर सेकंडरी स्कूल को

गांव-कस्बों तक में सेकंडरी व हायर सेकंडरी स्कूल, जिला मुख्यालय पर एक भी नहीं, जिला मुख्यालय पर संस्कृत शिक्षा का एक भी प्रवेशिका व वरिष्ठ उपाध्याय विद्यालय नहीं, कई बार बने प्रस्ताव, किसी ने नहीं किया स्वीकृत, हजारों विद्यार्थी इच्छा के बावजूद पढ़ाई से वंचित

हनुमानगढ़Jul 05, 2024 / 11:32 am

adrish khan

The condition of Devbhasha is pathetic, students of Hanumangarh city are yearning for secondary and higher secondary school

The condition of Devbhasha is pathetic, students of Hanumangarh city are yearning for secondary and higher secondary school

हनुमानगढ़. गांव-कस्बों तक में सेकंडरी और हायर सेकंडरी स्कूल संचालित हो रहे हैं। मगर जिला मुख्यालय पर एक भी स्कूल स्वीकृत नहीं है। नतीजन हनुमानगढ़ में चाहकर भी विद्यार्थी सरकारी पाठशाला में अध्ययन नहीं कर पाता। ऐसे में उनको निजी स्कूलों में जाना पड़ता है या फिर पढ़ाई छोडऩी पड़ती है।
यह स्थिति है संस्कृत शिक्षा के विद्यालयों की। हनुमानगढ़ शहर में केवल उच्च प्राथमिक स्तर तक का ही विद्यालय संचालित हो रहा है। बरसों से यहां राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय स्कूल स्वीकृति की मांग की जा रही है। कई सरकारें आई और चली गई। किसी ने भी इस पर ध्यान देकर राहत नहीं पहुंचाई।

बीते 17 बरस, नहीं किया क्रमोन्नत

जिला मुख्यालय पर जंक्शन स्थित सेक्टर छह में राजकीय उच्च प्राथमिक संस्कृत विद्यालय का संचालन किया जा रहा है। इसमें लगभग 200 का नामांकन है। यहां सात में से छह पद भरे हुए हैं। इस विद्यालय को वर्ष 2007 में प्राथमिक से उच्च प्राथमिक में क्रमोन्नत किया गया था। करीब 17 वर्ष गुजर गए क्रमोन्नति को, इसके बावजूद वरिष्ठ उपाध्याय में क्रमोन्नत नहीं किया गया। जबकि इस अवधि में जिले में संस्कृत व सामान्य शिक्षा के सैकड़ों विद्यालय माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक में क्रमोन्नत हो गए। इस तरह जिला मुख्यालय पर एक भी प्रवेशिका मतलब सेकंडरी तथा वरिष्ठ उपाध्याय मतलब हायर सेकंडरी स्कूल स्वीकृत नहीं हो सका है।

यहां ऐसे हो रही अनदेखी

जिला मुख्यालय पर एक भी सेकंडरी व हायर सेकंडरी स्कूल संस्कृत नहीं है। मगर जिले के कस्बों व गांवों तक में सेकंडरी व हायर सेकंडरी संचालित हो रहे हैं। कई गांवों में तो संस्कृत शिक्षा के महाविद्यालय तक स्वीकृत हैं। उदाहरण के लिए गांव गोगामेड़ी, देईदास, मुंडा, रतनपुरा संगरिया, बिलौचांवाला आदि में प्रवेशिका विद्यालय स्वीकृत है। जबकि गांव 35 एमओडी में वरिष्ठ उपाध्याय, गांव रायसिंहपुरा तथा साबुआना में संस्कृत महाविद्यालय का संचालन किया जा रहा है। मगर जिला मुख्यालय पर ऐसा कुछ भी नहीं है।

इसलिए ज्यादा जरूरत

जानकारों के अनुसार यूं तो जिला मुख्यालय पर टाउन व जंक्शन क्षेत्र में अलग-अलग वरिष्ठ उपाध्याय व महाविद्यालय संस्कृत स्वीकृत होना चाहिए। बात अगर सेक्टर छह के संस्कृत स्कूल की करें तो उसके कैचमेंट एरिया में करीब सात से आठ वार्ड आते हैं। वहां तो सामान्य शिक्षा का भी हायर सेकंडरी विद्यालय नहीं है। इसलिए क्रमोन्नति की बहुत दरकार है।

कई बार भिजवाए गए प्रस्ताव

विद्यालय को वरिष्ठ उपाध्याय में क्रमोन्नत करने के संबंध में कई बार प्रस्ताव भिजवाए गए हैं। हाल ही पुन: प्रस्ताव भेजा गया है। – प्रकाश शास्त्री, प्रधानाध्यापक, राउप्रावि संस्कृत, सेक्टर छह, जंक्शन।

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