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‘जातिगत समीकरण बिगड़ने, आरक्षण खत्म करने का फैलाया गया झूठ ले डूबा भाजपा को’

प्रदेश में भाजपा ने 25 में से 14 लोकसभा सीटों पर ही जीत दर्ज की। 11 सीटें भाजपा हार गई। आलाकमान इससे भारी नाराज है और इस नाराजगी के बाद शनिवार को बंद कमरे में भाजपा के बड़े नेताओं ने लोकसभावार हारने के कारणों की समीक्षा की।

जयपुरJun 16, 2024 / 06:23 pm

GAURAV JAIN

बंद कमरे में भाजपा ने किया लोकसभा की 11 सीटों पर हार पर मंथन

नेताओं ने लोकसभा वार बताए हार के अपने-अपने कारण

किरोड़ी लाल मीणा ने बनाई समीक्षा बैठक से दूरी

जयपुर. प्रदेश में भाजपा ने 25 में से 14 लोकसभा सीटों पर ही जीत दर्ज की। 11 सीटें भाजपा हार गई। आलाकमान इससे भारी नाराज है और इस नाराजगी के बाद शनिवार को बंद कमरे में भाजपा के बड़े नेताओं ने लोकसभावार हारने के कारणों की समीक्षा की।
हार के मुख्य कारणों में सामने आया कि भाजपा कुछ जगहों पर जातिगत समीकरण नहीं साध पाई और कुछ सीटों पर विपक्ष ने आरक्षण खत्म करने का जो भ्रम फैलाया था, उसका असर पड़ा। दौसा सीट पर हार की समीक्षा की बैठक में कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीना को भी बुलाया गया था, लेकिन वे अपने संसदीय क्षेत्र टोंक-सवाईमाधोपुर की बैठक और दौसा की बैठक में मौजूद नहीं रहे।
भाजपा प्रदेश कार्यालय में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, चुनाव प्रभारी विनय सहस्रबुद्धे, प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी, सह प्रभारी विजया राहटकर और प्रवेश वर्मा ने लोकसभावार नेताओं से चर्चा की। शनिवार को 11 में से सात लोकसभा सीटों के नेताओं से चर्चा की गई। टोंक-सवाईमाधोपुर, झुंझुनूं, बाड़मेर, चूरू, नागौर, सीकर और दौसा लोकसभा सीटों के नेताओं से चर्चा हो चुकी है। रविवार को भरतपुर, करौली-धौलपुर, श्रीगंगानगर, बांसवाड़ा-डूंगरपुर के नेताओं से चर्चा होगी।
हार के अपने-अपने कारण

– बाड़मेर-जैसलमेर से आए नेताओं ने कहा कि पूरा चुनाव जाति आधारित हो गया। दो बड़ी जातियों के वोट भाजपा प्रत्याशी को नहीं मिले।

– चूरू से आए नेताओं ने टिकट वितरण को ठीक नहीं बताया। जातिगत समीकरण और एससी-एसटी वोट नहीं साध सके। आरक्षण को लेकर विपक्ष का झूठ भाजपा का नुकसान कर गया।
– झुंझुनूं से आए नेताओं ने कहा कि भाजपा के नेता पूरे मन से नहीं जुटे, भाजपा के साथ रहने वाली कुछ जातियों ने भी वोट नहीं दिया।

– दौसा से आए नेताओं का कहना था कि विपक्ष ने भाजपा की सरकार आने पर आरक्षण खत्म करने का जो भ्रम फैलाया, उससे पार्टी को भारी नुकसान हुआ।
– टोंक-सवाईमाधोपुर से आए नेताओं ने कहा कि टोंक में तो िस्थति ठीक थी, लेकिन सवाईमाधोपुर क्षेत्र में जातिगत समीकरण खिलाफ चले गए।

– सीकर से आए नेताओं ने कहा कि संगठन पूरी तरह से सक्रिय नहीं रहा, कुछ नेता पूरी तरह से चुनाव में नहीं जुटे। किसान आंदोलन का भी असर रहा।
– नागौर में भाजपा को वोट देने वाली जातियां पूरी तरह से साथ नहीं आई। कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं का ज्यादा प्रभाव नहीं दिखाई दिया।

इन नेताओं से लिया गया फीडबैक
– संभाग प्रभारी, सह संभाग प्रभारी, जिला अध्यक्ष, जिला प्रभारी, लोकसभा प्रभारी, लोकसभा संयोजक, प्रत्याशी, पूर्व सांसद और विधायक और विधायक प्रत्याशी से फीडबैक लिया गया।

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