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इस साल 11 से 13 दिन पहले आएंगे सभी त्योहार, ये है वजह

इस बार देवशयनी एकादशी 17 जुलाई से चातुर्मास की शुरुआत होगी और समापन 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन होगा। इस बार चातुर्मास पूरे 118 दिनों तक रहेंगे। पिछले साल चातुर्मास 148 दिनों के थे। पंडित दिनेश मिश्रा ने बताया कि पिछले साल अधिकमास होने से दो श्रावण मास भी आए थे। इस कारण […]

सीकरJun 12, 2024 / 11:40 am

Sachin


इस बार देवशयनी एकादशी 17 जुलाई से चातुर्मास की शुरुआत होगी और समापन 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन होगा। इस बार चातुर्मास पूरे 118 दिनों तक रहेंगे। पिछले साल चातुर्मास 148 दिनों के थे। पंडित दिनेश मिश्रा ने बताया कि पिछले साल अधिकमास होने से दो श्रावण मास भी आए थे। इस कारण चातुर्मास 4 माह की बजाय 5 माह तक चले थे। चातुर्मास के बाद आने वाले त्योहार भी पिछले साल के मुकाबले इस बार 11 से बारह दिन पहले आएंगे।

जन्माष्टमी 26 अगस्त को

मिश्रा के अनुसार इस बार कृष्ण जन्माष्टमी 26 अगस्त को मनाई जाएगी जो पिछले साल 7 सितंबर को थी। हरतालिका तीज व्रत 6 सितंबर को होगा जो पिछले साल 18 सितंबर को था। यानी 12 दिन पहले इस बार तीज मनाई जाएगी। इसी प्रकार सभी त्योहारों में 10 से 12 दिन पहले आने का अंतर रहेगा। जलझूलनी एकादशी 14 सितंबर को मनाई जाएगी, जो पिछले साल 25 सितंबर को थी। अनंत चतुर्दशी 17 सितंबर को मनाई जाएगी, जो पिछले साल 28 सितंबर को थी। पितृ पक्ष की शुरुआत 18 सितंबर से होगी, पिछले साल 30 सितंबर से हुई थी। नवरात्र 3 अक्टूबर और दशहरा 12 अक्टूबर को मनाया जाएगा। दिवाली पिछले साल 12 नवंबर को आई थी। इस बार जल्दी आएगी।

13 दिन का ही होगा आषाढ़ कृष्ण पक्ष

विक्रम संवत 2081 में आषाढ़ कृष्ण पक्ष 13 दिनों का होगा। सामान्य रूप से प्रत्येक माह में दो पक्ष होते हैं। प्रत्येक पक्ष में 15 अथवा 14 तिथियों का मान रहता है, परंतु कभी देव योगवश तिथि गणित क्रिया द्वारा दो तिथियों का क्षय वश 13 रह जाती है। ऐसा इस वर्ष सूर्य और चंद्र की गति के कारण संयोग बन रहा है। जून के आखिरी सप्ताह में तिथियों के क्षय होने से आषाढ़ कृष्ण पक्ष 15 की बजाय 13 ही दिन का रहेगा। 23 जून से 5 जुलाई के बीच दो तिथियां क्षय होने से यह स्थिति बनेगी। दरअसल आषाढ़ कृष्ण प्रतिपदा और आषाढ कृष्ण चतुर्दशी तिथि का क्षय होगा। जब-जब ऐसा संयोग आता है देश-दुनिया में आपदा या अप्रत्याशित घटनाओं के होने की आशंका रहती है। लगभग 31 साल पहले वर्ष 1993 में भी आषाढ माह के शुक्ल पक्ष में भी ऐसी स्थिति बनी थी। तब 13 दिन का शुक्ल पक्ष था।

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