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MP Tiger State News: पांच हाथी, 140 लोगों की टीम ने 10 दिन में पकड़ा रॉयल टाइगर

tiger state news: चार माह की दहशत पर विराम: सुरई के जंगल में दिखा बाघ, गन से दिया बेहोशी का इंजेक्शन, बेहोश हुआ तो पिंजरे में कैद किया रॉयल टाइगर

रायसेनJun 14, 2024 / 09:04 am

Manish Gite

raisen royal tiger finally caught
royal tiger finally caught: रायसेन शहर और आसपास के क्षेत्र में पिछले चार महीने से दहशत फैला रहे बाघ को अंतत: गुरुवार को वन विभाग की विशेष टीम ने पकड़ लिया। इससे पहले पांच हाथियों की मदद से बाघ को सूरई के जंगल में करेरा पानी के पास घेरा गया और गन से ट्रेंकलाइज किया गया। जब बाघ बेहोश हो गया, तब उसे पकड़कर पिंजरे में बंद कर रायसेन लाया गया। यहां से बाघ को सतपुड़ा रिजर्व भेजा जाएगा। बाघ को पकडऩे के बाद वन अमले ने राहत की सांस ली है, लेकिन अभी भी सतर्क रहने के लिए कहा है, क्योंकि क्षेत्र में यह अकेला नहीं और भी बाघ हैं।
डीएफओ विजय कुमार ने बताया कि टाइगर को पकडऩे के लिए 140 लोगों की टीम के साथ तकनीक का सहारा भी लिया गया। हाई टेक्नोलॉजी वाले लाइव कैमरे, ट्रेप कैमरों के साथ बाघ के हर मूवमेंट पर नजर रखी गई। 10 दिन पहले पांच हाथियों के साथ दो टीमें बुलाई गई थीं। जिनकी मदद से बाघ को घेरने के कई प्रयास किए गए, लेकिन हर बार परिस्थति का फायदा उठाकर बाघ घेरे से निकलने में कामयाब हो जाता था।
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30 दिन के अथक प्रयास के बाद मिली सफलता

डीएफओ ने बताया कि 30 दिन के अथक प्रयासों के बाद यह सफलता मिली है। गुरुवार सुबह बाघ की लोकेशन मिलते ही टीमों को मौके पर भेजा। आठ बजे तक पांचों हाथी टीम के साथ पहुंचे और बाघ को घेरा। बाघ को गन से पहला डॉट (इंजेक्शन) 12.05 बजे दिया गया, इसके बाद बाघ की चाल कमजोर हो गई और वो घेरा नहीं तोड़ सका। लगभग डेढ़ घंटे बाद 1.30 बजे दूसरा डॉट दिया गया, जिसके पांच मिनट बाद बाघ बैठ गया और फिर बेहोश हो गया। इसके बाद उसे पिंजरे में डालकर रायसेन लाया गया। उन्होंने बताया कि यह बाघ इतना मजबूत था कि एक बार ट्रेंकलाइज करने के बाद भी एक घंटे तक बेहोश नहीं हुआ। जबकि बाघ या अन्य कोई जानवर एक ही बार में और पांच से दस मिनट में बेहोश हो जाता है। विजय कुमार ने बताया कि बाघ को पकडऩे में कान्हा टाइगर रिजर्व के तीन हाथी और टीम, पन्ना टाइगर रिजर्व के दो हाथी और टीम, वन विहार की टीम, तीन एनजीओ का सहयोग मिला।
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डेढ़ सौ वर्ग किमी में था मूवमेंट

डीएफओ ने बताया कि महू क्षेत्र से आए इस बाघ का मूवमेंट रायसेन और आस-पास के 150 वर्ग किमी क्षेत्र में था। इसे पकडऩा इसलिए भी जरूरी था कि बाघ रहवासी क्षेत्र में तथा खेतों में कई बार आ रहा था। अमूमन बाघ का टेरिटरी क्षेत्र 50 वर्ग किमी का होता है।

मां से बिछुड़ा था यह बाघ

डीएफओ ने बताया कि इस बाघ की गतिविधियां और तौर तरीकों को मॉनीटर करने के बाद यह पता चलता है कि यह अपनी मां से कम आयु में ही बिछुड़ गया था। शिकार के बाद उसे खाने के तरीके से यह पता चलता है कि बाघ ने शिकार करना तो सीखा था, लेकिन खाने का तरीका नहीं जानता था। यह बाघ शिकार को उस जगह से नहीं खाता है, जहां अधिक मांस होता है।

शहर के लिए बना था खतरा

रॉयल टाइगर ने 15 मई को ग्राम नीमखेड़ा के जंगल में तेंदूपत्ता मजदूर मनीराम पर हमला कर दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इससे पहले बाघ रायसेन शहर में ही दो बार आ चुका था। आस-पास के गांवों में भी कई बार पहुंचा था, जिससे लोगों के लिए बड़ा खतरा बन गया था। हालांकि वन विभाग रायसेन क्षेत्र में और भी बाघ होने की बात कह रहा है, लेकिन वो जंगल में रहते हैं। बाघ के अलावा क्षेत्र में तेंदुओं का भी आतंक है। जो आए दिन गांवों में घुसकर पालतू जानवरों का शिकार कर रहे हैं।

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