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आपकी बात, भारत में भ्रष्टाचार पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही है?

पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं मिलीं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं

जयपुरJun 24, 2024 / 04:02 pm

Gyan Chand Patni

भ्रष्टाचार की जड़ें गहरीं
भारत में भ्रष्टाचार पर लगाम न लग पाने के कई हैं। सरकारी ढांचे और संस्थानों में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें हैं।कई सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी है, जिससे भ्रष्टाचार पनपता है। भ्रष्टाचार विरोधी कानून मौजूद हैं, लेकिन उनका सख्ती से पालना और प्रवर्तन करने में कमी है। अदालतों में मामलों का धीमा निपटान भ्रष्टाचार के मामलों में प्रभावी कार्रवाई में बाधा डालता है। कई बार उच्च पदस्थ अधिकारी और राजनेता भ्रष्टाचारियों का संरक्षण करते हैं, जिससे वे कानून की पकड़ से बच जाते हैं। चुनाव में अत्यधिक धन का उपयोग और राजनीतिक दलों को फंडिंग में पारदर्शिता की कमी भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है। भारतीय समाज में भ्रष्टाचार के प्रति सहनशीलता और इसे सामान्य मानने की प्रवृत्ति भी एक बड़ी चुनौती है।  आर्थिक असमानता भी भ्रष्टाचार के कारण बन सकते हैं। लोग त्वरित लाभ के लिए गलत तरीकों का सहारा लेते हैं।
—डॉ. राधेश्याम लाहोटी, नोखा
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रिश्वत का लेन—देना सामान्य
हमारे देश में भ्रष्टाचार की जड़ें विशाल स्तर पर फैली हुई हैं। सरकारी विभागों में रिश्वत का लेन—देना सामान्य बात हो गई है। लोगों को लगता है कि कुछ लिए दिए बिना सही काम भी नहीं हो सकता। भ्रष्टाचार के खिलाफ माहौल बनाने की जरूरत है।  
—लता अग्रवाल, चित्तौड़गढ़
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त्वरित कार्रवाई जरूरी
भ्रष्टाचारी येन—केन प्रकरण बच निकलता है क्योंकि बचने के लिए खूब समय और संसाधन मिल जाते हैं। इस कारण भ्रष्टाचारी के हौसले बुलंद हो जाते हैं। भ्रष्टाचार के मामले में त्वरित कार्रवाई की जाए और सख्त सजा मिले तो भ्रष्टाचार से मुक्ति मिल सकती है।
—माधव सिंह, श्रीमाधोपुर, सीकर
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पारदर्शिता की कमी
सरकारी प्रक्रिया, निर्णय और सार्वजनिक प्रशासन में पारदर्शिता की कमी भ्रष्टाचार के लिए अधिक अवसर प्रदान करती है। यदि लोग रिश्वत देना बंद कर देगी और भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल दे, तो भ्रष्टाचार पर लगाम लग सकती है।  
—तरुणा साहू , राजनांदगांव, छत्तीसगढ़
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तय सीमा में हो कार्रवाई
भ्रष्टाचार के लिए नेताओं और सरकारी अधिकारियों—कर्मचारियो को ही जिम्मेदार ठहराया जाता हैं जबकि हम अपने छोटे बड़े काम को जल्दी करवाने के लिए सिफारिश का सहारा लेते हैं। काम करवाने के लिए छोटी—बड़ी रकम भी देने को तैयार हो जाते हैं। भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई तय समय सीमा में की जानी चाहिए।  
— मंजू शर्मा, जयपुर
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राजनीतिक संरक्षण
भ्रष्टाचार पर रोक इसलिए नहीं लग पा रही है क्योंकि इसमें लिप्त रहने वाले आरोपियों पर त्वरित एवं कठोर कार्रवाई नहीं होती है। कई बार भ्रष्टाचारियों को राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त होता है। लचर कार्रवाई के कारण घोटालेबाज विदेश भी भाग जाते हैं। सामाजिक स्तर पर भ्रष्टाचारियों का बहिष्कार नहीं होने के कारण भी रिश्वतखोर बेखौफ नजर आते हैं।
—ललित महालकरी, इंदौर
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जरूरी है दृढ़ इच्छाशक्ति
भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता है । भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए सरकार को तो अपने स्तर पर कड़े कदम उठाने ही होंगे, साथ ही समाज को भी जागरूक बनना होगा। भ्रष्टाचार में लिप्त व्यक्ति के खिलाफ तत्काल व कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
—साजिद अली, इंदौर
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हर जगह भ्रष्टाचार
भारत में भ्रष्टाचार थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। हमारे यहां भ्रष्टाचार के मामले में कड़ी सजा का प्रावधान नहीं है। इससे भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद हैं। कहीं न कहीं हर व्यक्ति भ्रष्टाचार में लिप्त है।वह यह सोचता है कि खाली मेरे ईमानदार होने से क्या होगा? यह गलत सोच है। भ्रष्टाचार को खत्म करने की मुहिम की शुरुआत स्वयं से ही करनी चाहिए।
—अजिता शर्मा, उदयपुर

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