4 साल की अंजली की जिंदगी पर आई आफत, यूं डॉक्टरों ने बचाई जान

Gwalior, Madhya Pradesh, India
4 साल की अंजली की जिंदगी पर आई आफत, यूं डॉक्टरों ने बचाई जान

जांघ की हड्डी में गलाव (क्रोनिक ऑस्टियो मलाइटिस फीमर) की शिकार 4 वर्षीय मासूम को डॉक्टरों ने सफल ऑपरेशन कर पैर पर खड़ा कर दिया। 

ग्वालियर। जांघ की हड्डी में गलाव (क्रोनिक ऑस्टियो मलाइटिस फीमर) की शिकार 4 वर्षीय मासूम को डॉक्टरों ने सफल ऑपरेशन कर पैर पर खड़ा कर दिया। जयारोग्य अस्पताल के आर्थोपेडिक विभाग के डॉक्टरों ने दो घंटे चले ऑपरेशन के बाद बच्ची को चलने-फिरने लायक बना दिया। तीन साल की उम्र में अंजली के बाएं पैर की जांघ में मवाद पड़ गया था। इसके लिए उसके पिता ने चिकित्सकों से संपर्क कर इलाज शुरू किया, लेकिन हड्डी में संक्रमण फैलता चला गया। इस बीच 20 से 25 हजार रुपए इलाज का खर्चा भी हो चुका था।

पैर ठीक होने की अंतिम आस लेकर मुरैना निवासी वलुतन बेटी अंजली को लेकर जयारोग्य अस्पताल की आर्थोपेडिक ओपीडी पहुंचे। यहां सहायक प्राध्यापक डॉ. अभिलेख मिश्रा ने अंजली का परीक्षण कर उसे भर्ती करने की सलाह परिजन को दी। भर्ती करने के बाद विभिन्न जांच कराने के बाद ऑपरेशन की तारीख तय कर बच्ची का ऑपरेशन आर्थोपेडिक विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. समीर गुप्ता के मार्गदर्शन में डॉ. अभिलेख मिश्रा ने किया। ऑपरेशन के चार माह के फॉलोअप के बाद जांघ की हड्डी नई बन गई और अब बच्ची चल फिर सकती है। जेएएच में बच्ची का ऑपरेशन मुफ्त में हुआ, क्योंकि परिजन पर दीनदयाल कार्ड था।

तार से फिक्स की हड्डी
ऑपरेशन के दौरानबाएं पैर की हड्डी जिसमें गलाव था उसे निकालकर उसकी जगह पैर से निकाली गई हड्डी को जांघ की हड्डी की जगह रखा और तार से फिक्स कर दिया गया। क्रोनिक ऑस्टियो मलाइटिस फीमर नामक बीमारी वैसे तो कॉमन है, लेकिन बच्चों में यह तेजी से फैलती है और खतरनाक होती है। 

बच्चों को ज्यादा खतरा
15 साल से कम उम्र के बच्चों में इन बीमारी के फैलने का खतरा अधिक रहता है। साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने, प्रोटीन व खानपान ठीक तरह से नहीं करने वाले लोगों पर इसका प्रभाव अधिक पड़ता है। बच्ची की जांघ की हड्डी गल चुकी थी। हमने रिस्क लेकर ऑपरेशन किया  और सफल रहा। वर्तमान में बच्ची चल फिर सकती है।
डॉ.अभिलेख मिश्रा, सहायक प्राध्यापक, आर्थोपेडिक विभाग, जेएएच

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