दक्षिण सूडान में संग्राम के कारण 15 लाख लोगों ने देश छोड़ा : संयुक्त राष्ट्र

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दक्षिण सूडान में संग्राम के कारण 15 लाख लोगों ने देश छोड़ा : संयुक्त राष्ट्र

यूएनएचसीआर के उच्चायुक्त ने अपने बयान में कहा है कि इसके अतिरिक्त 21 लाख लोग साल 2011 में अस्तित्व में आए इस देश के अंदर विस्थापित हो चुके हैं

जुबा। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) का कहना है कि दक्षिण सूडान में दिसंबर, 2013 में छिड़े भीषण संग्राम के बाद से सुरक्षा की तलाश में अब तक 15 लाख लोग देश छोडऩे के लिए बाध्य हो चुके हैं। यूएनएचसीआर के उच्चायुक्त ने अपने बयान में कहा है कि इसके अतिरिक्त 21 लाख लोग साल 2011 में अस्तित्व में आए इस देश के अंदर विस्थापित हो चुके हैं। फिलहाल युद्धग्रस्त देश को समस्या से उबरने का समाधना नहीं मिल रहा है।

एजेंसी ने बताया कि 2016 की दूसरी छमाही में छिड़े संघर्ष ने प्रतिमाह औसतन 63,000 लोगों को देश छोडऩे पर मजबूर कर दिया, इस प्रकार पिछले साल 760,000 शरणार्थी देश से पलायन कर चुके हैं। अधिकांश शरणार्थी युगांडा पहुंच रहे हैं, अब तक लगभग 698,000 शरणार्थी युगांडा पहुंच चुके हैं।

अमरीका ने सीरिया में रूसी हमले को बताया 'बर्बर'
संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सीरिया में चल रहे संघर्ष पर रूस और अमरीका आमने सामने आ गए। अमरीका ने सीरिया में रूस की ओर से की गई कार्रवाई को बर्बर करार देते हुए कहा कि इससे सीरिया में युद्ध समाप्त होना असंभव हो जाएगा। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत समांथा पावर ने सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि सीरिया में रूसी सेना की ओर से किये गये हमले आतंकवाद के खिलाफ नहीं बल्कि बर्बर है। गौरतलब है कि रूस की सेना तथा राष्ट्रपति बशर अल असद की सेना सीरिया में विद्रोहियों के खिलाफ लगातार हमले कर रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत समांथा पावर ने कहा है "सीरिया में रूस जो कर रहा है, वह आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई नहीं, वह 'बर्बरता' है। वहां शांति स्थापना करने की कोशिश की जगह रूस और सीरिया के राष्ट्रपति बसर अल असद वहां युद्ध जारी रखे हुए हैं। वे लोगों की जान बचाने की जगह ये नागरिकों को निशाना बना रहे है। रूस की कार्रवाई में मानवीय सहायता करने वाले समूह और अस्पतालों निशाना बनाया जा रहा है।"

इस मुद्दे पर फ्रांस और ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने भी अमेरिका का समर्थन करते हुये रूस पर निशाना साधा। उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह संघर्ष विराम के विफल होने के बाद सीरिया में शांति बहाली के मुद्दे पर की गयी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में अमेरिका और रूस के राजनायिको के बीच सहमति नहीं बन सकी।

रुस ने अमरीका के इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि इसके बिना सीरिया में शांति संभव नहीं हो पाएगी। रुस ने इन आरोपो को खारिज करते हुए कहा कि सीरिया में सैकड़ों सशस्त्र सेना है जिन्हें हथियार मुहैया करया जा रहा है। वहां अंधाधुंध बमबारी जारी है और अब इसकी वजह से वहां शांति कायम करना अब काफी मुश्किल है।

इस मुद्दे पर सीरिया के मामले में संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत स्टीफन दि मिस्तूरा ने सीरिया में संघर्ष विराम लागू करने के लिये किसी नतीजे पर पहुंचने परिषद से अपील की है। उन्होंने कहा, "मुझे अब भी विश्वास है कि हम सीरिया में बदलाव ला सकते है। सीरिया में शांति कायम करने की अपनी कोशिशों को मैं जारी रखूंगा।" उन्होंने कहा कि वह इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं कि अगर अमरीका तथा रूस सीरिया में युद्ध विराम जारी रखने की कोशिश करेंगे तो यहां के हालात बदलेंगे।

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