#Aidsday एड्स पीड़ित मां ऐसे कराए डिलीवरी

Bhanu Pratap

Publish: Dec, 01 2016 11:42:00 (IST)

Agra, Uttar Pradesh, India
#Aidsday एड्स पीड़ित मां ऐसे कराए डिलीवरी

यदि एचआईवी पॉजिटिव महिला या पुरुष संतान चाहते हैं, तो उन्हें कुछ खास सावधानियां बरतनी चाहिए।

आगरा। इंडियन मीनोपॉज सोसायटी की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने बताया कि एचआईवी या एड्स पीड़ित दंपति के शिशु में 25-30 फीसदी सम्भावना इनफेक्शन होने की होती है। इसके बावजूद यदि एचआईवी पॉजिटिव महिला या पुरुष संतान चाहते हैं, तो उन्हें कुछ खास सावधानियां बरतनी चाहिए।


ये रखें सावधानी
प्रिगनेंसी के समय एंटी रेट्रो वाइरल दवाएं विशेषज्ञों की निगरानी में लेनी चाहिए। नॉर्मल डिलीवरी के बजाय सिजेरियन ज्यादा सेफ हैं। क्योंकि नार्मल डिलीवरी में मां और बच्चे ज्यादा सम्पर्क में आते हैं, जो हानिकारक हो सकता है। सिजेरियन भी डिलीवरी पेन से यानि प्लांड सिजेरियन होना चाहिए। यदि मां एचआईवी पॉजिटिव है तो उसे शिशु को ब्रेस्ट फीडिंग नहीं करानी चाहिए।


बीमार हैं, पर बीमारी के बारे में नहीं जानते
डॉ. मल्होत्रा ने बताया कि दुनिया में एचआईवी और एड्स पीड़ितों की बात की जाए तो भारत तीसरे नम्बर पर आता है। हर 10 में से 4 लोग यहां एचआईवी या एड्स से पीड़ित हैं। यानि भारत में 2.1 मिलियन लोग एड्स जैसी भयावह बीमारी की चपेट में हैं, जिसका मुख्य कारण जागरूकता का अभाव, अज्ञानता, सामाजिक कारण हैं। यूएन एड्स की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में लगभग 35 मिलियन लोग एड्स से पीड़ित हैं, जिनमें 19 मिलियन लोग यह जानते ही नहीं कि वह इस घातक बीमारी का शिकार हो चुके हैं।

 
एचआईवी का मतलब एड्स नहीं
एचआईवी का मतलब एड्स से पीड़ित होना नहीं है। एचआईवी को एड्स की पहली स्टेज कहा जा सकता है। एचआईवी यानि ह्यूमन इम्यूनो डेफिसिएन्सी वायरस से संक्रमित होने के बावजूद यदि सही इलाज और परहेज किया जाए तो काफी हद तक एड्स होने से बचा जा सकता है।


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