दलबदलुओं की प्रतिष्ठा भी इस चुनाव में साख पर

Abhishek Saxena

Publish: Feb, 17 2017 01:33:00 (IST)

Agra, Uttar Pradesh, India
दलबदलुओं की प्रतिष्ठा भी इस चुनाव में साख पर

ऐसे नेताओं की प्रतिष्ठा और साख अब इस चुनाव में दांव पर लगी है। 

आगरा। पहले चरण के चुनाव में आगरा में मतदान हो चुका है। अब पार्टियां अपना अपना जीत का बीजगणित फिट बैठाने की कोशिश कर रही हैं। आगरा की सभी नौ विधानसभा सीटों पर इस बार कई खास वाक्ये देखने को मिले। जिनमें से सबसे अहम रहा दल बदल कर शामिल हुए नेता। कुछ नेता ऐसे रहे जो टिकट के लिए पार्टी में पहुंचे, तो कुछ ऐसे रहे जिन्हें टिकट नहीं मिली, तो दूसरी पार्टी में ज्वाइन कर लिया। ऐसे नेताओं की प्रतिष्ठा और साख अब इस चुनाव में दांव पर लगी है। बसपा हो या फिर कांग्रेस सपा का गठबंधन सभी दलों के नेताओं ने पार्टी का दामन छोड़ा है। भाजपा में यदि देखा जाए, तो इस बार कुछ ज्यादा की नेता दल बदल कर शामिल हुए हैं।

विधायकी के लिए क्या क्या किया
सपा, बसपा, भाजपा और कांग्रेस में इस बार के विधानसभा चुनाव में खास भगदड़ मची रही। आगरा की बात करें तो भाजपा को दलबदलुओं का सबसे अधिक फायदा हुआ। पार्टी में एक दर्जन से अधिक नेताओं ने दूसरी पार्टी छोड़कर भाजपा ज्वाइन की। कुछ को भाजपा ने टिकट का तोहफा भी दिया। फतेहाबाद विधानसभा सीट पर सपा छोड़कर आए जितेंद्र वर्मा हो या फिर साइकिल छोड़कर कमल थामने वाली हेमलता दिवाकर दोनों नेताओं को पार्टी ने चुनाव का टिकट थमाया। वहीं बसपा छोड़कर घर वापसी का दावा करने वाले ​छोटेलाल कुशवाहा को पार्टी ने टिकट नहीं दिया, तो ये उन्हें नागवार गुजरा और वापस बसपाई हो गए। 

राजा रानी ने ऐनवक्त पर चौंकाया
वहीं राजा अरिदमन सिंह और उनकी पत्नी रानी पक्षालिका सिंह ने तो सभी को हैरत में डाल दिया। पार्टी से बगावत करके टिकट बंटवारे के एक दिन पहले ही उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। पार्टी ने भी उन्हें टिकट थमाई। अब भाजपा में दल बदलकर आए इन नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। वहीं पार्टी के इस फैसले से साख भी दांव पर है। 

रालोद, कांग्रेस, बसपा में मची रही हलचल
भाजपा से चुनाव लड़ चुके पंडित केशव दीक्षित को इस बार टिकट की आस थी, लेकिन पार्टी ने दर​किनार किया तो वे भी किनारे हो गए। कांग्रेस से उन्होंने पत्नी कुसुमलता दीक्षित को टिकट दिलावाया और मैदान में उतर खड़े हुए। वहीं रालोद की बात की जाए, तो बसपा से बर्खास्त नारायण सिंह सुमन, उनके पुत्र वीरू सुमन और अवधेश सुमन के लिए इस चुनाव में सब कुछ दांव पर लगा है। रालोद में पहुंचे सुधीर दुबे, नरेंद्र बघेल और कर्नल उमेश वर्मा दल बदलुओं की लिस्ट में सबसे आगे रहे हैं। कर्नल उमेश वर्मा ने अपना राजनीतिक सफर शुरू करते ही कांग्रेस का हाथ थामा, लेकिन जानकार कहते हैं कि कुछ हासिल न होता देख तुरंत रालोद के हैंडपंप पर अपना कब्जा जमा लिया।  

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