#AIDS Day एड्स पीड़ितों के लिए एआरटी सेंटर बना वरदान, जानिए क्या हुआ 

Dhirendra yadav

Publish: Dec, 01 2016 10:37:00 (IST)

Agra, Uttar Pradesh, India
#AIDS Day एड्स पीड़ितों के लिए एआरटी सेंटर बना वरदान, जानिए क्या हुआ 

एसएन मेडीकल कॉलेज के एआरटी सेंटर में पिछले 11 वर्षों में 214 एचआइवी पॉजीटिव महिलाओं के नाम दर्ज हो चुके हैं, जो बच्चे को जन्म दे चुकी हैं। 

आगरा। एआरटी सेंटर से नई क्रांति की शुरुआत हुई है। एड्स पॉजीटिव महिलाएं भी अब मां बन सकती हैं, उनके होने वाली संतान को एड्स का खतरा नहीं होगा। इसके लिए जरूरत होगी सतर्कता और इलाज की। एसएन मेडीकल कॉलेज के एआरटी सेंटर में पिछले 11 वर्षों में 214 एचआइवी पॉजीटिव महिलाओं के नाम दर्ज हो चुके हैं, जो बच्चे को जन्म दे चुकी हैं। 

ऐसे गूंजेगी आंगन में किलकारी
एआरटी सेंटर के डॉ. टीपी सिंह ने बताया कि एचआईवी पॉजीटिव दंपत्ति बच्चे की प्लानिंग से पहले प्रिवेंशन आॅफ पैरेंट टू चाइल्ड ट्रांसमिशन सेंटर पर संपर्क करें। गर्भधारण के बाद उनकी इस सेंटर से एंटी रिट्रो वायरल थैरपी शुरू की जाती है। जन्म के बाद नवजात को ड्राप पिलाई जाती है और कुछ दवाएं चलती हैं। 18 माह के बाद जांच की जाती है। इससे एचआईवी खतरा बहुत अधिक तक कम हो जाता है। डॉ. सिंह ने बताया कि 90 फीसद मामलों में सफलता मिलती है। 

अभी भी बढ़ रहे केस 
डॉ. टीपी सिंह ने बताया कि एचआईवी पॉजीटिव के केस में अभी भी कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि हर माह एक दो केस एचआईवी पॉजीटिव के आ रहे हैं। इसका मुख्य कारण है कि ग्रामीण ऐरिया में अभी भी एड्स के प्रति जागरुकता नहीं है। सबसे अधिक मामले लेबर क्लास तवके से हैं। अधिकतर मामलों में शरीरिक संबंध का मामला प्रकाश में आता है। 

आगरा में ये है हाल 
एआरटी सेंटर एसएन में पंजीकृत मरीज 
एड्स रोगी        6384
पुरुष            3727
महिला           2235
बच्चे              402
ट्रांसजेंडर             18

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