एस्सार स्टील के खिलाफ जारी रहेगी दिवालिया प्रक्रिया

Mukesh Sharma

Publish: Jul, 18 2017 05:35:00 (IST)

Ahmedabad, Gujarat, India
एस्सार स्टील के खिलाफ जारी रहेगी दिवालिया प्रक्रिया

गुजरात उच्च न्यायालय ने एस्सार स्टील को करारा झटका दिया है। न्यायालय ने भारतीय रिजर्ब बैंक

अहमदाबाद।गुजरात उच्च न्यायालय ने एस्सार स्टील को करारा झटका दिया है। न्यायालय ने भारतीय रिजर्ब बैंक (आरबीआई) व अन्य बैंकों की ओर से दिवालिया प्रक्रिया जारी करने के खिलाफ दायर कंपनी की याचिका खारिज कर दी है।

एस्सार स्टील ने डूबे कर्ज के मामले में आरबीआई के गत 13 जून के परिपत्र को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। आरबीआई ने बैंकों को दिवालिया व शोधन अक्षमता संहिता-इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) के तहत दिवालिया प्रक्रिया जारी करने के निर्देश दिए थे। रिजर्व बैंक ने एस्सार स्टील के मामले को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में भेज दिया था। एस्सार स्टील ने आरबीआई पर भेदभाव का भी आरोप लगाया था। न्यायाधीश एसजी शाह ने सोमवार को दिए गए अपने फैसले में बैंकों की ओर से एस्सार स्टील के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया जारी रखने को हरी झंडी है। आरबीआई के परिपत्र में बैंकों से एस्सार स्टील और 5000 करोड़ रुपए से अधिक के इस तरह के बकाया ऋणों से जुड़ी 11 अन्य कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया था।

आरबीआई भी बरते सावधानी

उच्च न्यायालय ने आरबीआई से कहा कि बैंक को प्रेस रिलीज जारी करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। इसे संवैधानिक आदेशों के अनुसार कानून के सिद्धातों के आधार पर होना चाहिए, लेकिन यह न्यायिक या अद्र्धन्यायिक  प्रशासन को सलाह, दिशानिर्देश या निर्देश के रूप में नहीं होना चाहिए। आरबीआई ने गत 13 जून की प्रेस रिलीज में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूलन (एनसीएलटी) से ऐसे मामलों को प्राथमिकता के तौर पर निपटाए जाने की बात कही थी।  हालांकि बाद में न्यायालय के निर्देश पर आरबीआई में इस संबंध में माफी मांगते हुए शुद्धिपत्र भी जारी किया था। न्यायालय के अनुसार आरबीआई को यह भी देखना होगा कि उसकी स्कीम का लाभ बिना किसी भेदभाव के सभी को समान रूप से मिले और यह सभी के लिए लागू हो।

परिपत्र के खिलाफ एस्सार स्टील पहुंची थी हाईकोर्ट

एस्सार स्टील आरबीआई के 13 जून के परिपत्र के खिलाफ उच्च न्यायालय पहुंची थी। कंपनी की ओर सेे तर्क दिया गया था कि आरबीआई का यह आदेश अनुचित था क्योंकि कंपनी ऋण पुनर्गठन के आरंभिक चरण में थी। कंपनी ने यह भी दलील दी कि उसे अन्य 11 कंपनियों के समान नहीं समझा जाना चाहिए, जो अब बंद हो चुके हैं। एस्सार स्टील 20,000 करोड़ रुपए के सालाना कारोबार के साथ अभी भी मजबूती से परिचालन कर रही है।

बैंकों की कुल एनपीए में 25 फीसदी हिस्सा

आरबीआई ने पिछले महीने दिवालिया कार्यवाही के लिए एस्सार स्टील सहित 12 कंपनियों की पहचान की थी। इन कंपनियों मेंं से हरेक पर 5000 करोड़ रुपए से अधिक का बकाया कर्ज था जिसका बैंकों की कुल एनपीए में लगभग 25 फीसदी का हिस्सा है।

ऋण देने वाले बैंकों का पक्ष हुआ मजबूत

आई और एस्सार स्टील को लोन (ऋण) देने वाले बैंकों का पक्ष मजबूत हुआ है। एस्सार स्टील बैंकों का करीब 45 हजार करोड़ रुपए को लोन नहीं चुका पाया है। गत वर्ष कंपनी का एनपीए 32 हजार करोड़ रुपए था वहीं इससे पहले के वर्ष में 31 हजार करोड़ रुपए था। न्यायालय ने यह भी कहा कि यह पूरी तरह स्पष्ट है कि जब ऋण 45 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का हो तब ऐसे मुद्दे को ऋण देने वाले बैंकों पर छोडऩा ही मुनासिब है जिससे ये बैंक कानून के हिसाब से उचित निर्णय ले सकें। इसलिए इसे किसी एक कंपनी के खिलाफ कार्रवाई नहीं कहा जा सकता। न्यायालय ने यह भी कहा कि जारी रिस्ट्रक्चरिंग प्लान व अन्य मुद्दों पर एनसीएलटी ध्यान देगा।

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