आरएसएस को दूर रखकर ही कश्मीर का हल संभव

Mukesh Sharma

Publish: Oct, 18 2016 10:50:00 (IST)

Ahmedabad, Gujarat, India
आरएसएस को दूर रखकर ही कश्मीर का हल संभव

इतिहासकार व पद्मभूषण रामचंद्र गुहा ने काश्मीर की समस्या के हल के लिए वहां के लोगों से बातचीत की

अहमदाबाद।इतिहासकार व पद्मभूषण रामचंद्र गुहा ने काश्मीर की समस्या के हल के लिए वहां के लोगों से बातचीत की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इसके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को दूर रखना होगा। यहां गुजरात विद्यापीठ के 63वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर मंगलवार को दीक्षांत पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने यह बात कही। गुहा ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि काश्मीर समस्या को हल करने के लिए सरकार को पाकिस्तान से नहीं, बल्कि काश्मीर के लोगों से बातचीत करने की आवश्यकता है। आरएसएस को इसके बीच में लाना उचित नहीं होगा, क्योंकि आरएसएस के लोग समस्या के हल के बजाय धारा 370 का राग अलापना शुरू करेंगे, इससे हल संभव नहीं होगा।

गांधीजी आज भी प्रासंगिक :

उन्होंने कहा कि राजस्थान में हुए गुर्जर आंदोलन को देखा है, लेकिन उस आंदोलन के साथ ही देशभर में तमाम आंदोलनों में हिंसा का उपयोग उचित नहीं है। गुहा ने कहा कि गांधी के अहिंसा के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए हिंसा का सहारा नहीं लिया जाना चाहिए। सत्याग्रह, धरना प्रदर्शन कर भी बात को मनवाया जा सकता है। जो लोग दुनिया बदलना चाहते हैं उनके लिए गांधीजी के राजकीय प्रयोग आज भी प्रासंगिक व सम्माननीय हैं।
गांधीजी को वास्तव में वैश्विक प्रतिभा बताते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में अहिंसक समाज, धार्मिक सहिष्णुता, पर्यावरण संरक्षण व पारदर्शिता के गांधीजी के सिद्धांत महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। गुहा ने कहा कि भारतीय इतिहास में वर्ष 1970 के चिपको आंदोलन, 1980 के सरदार सरोवर बांध विरोध व वर्ष 2011 में दिल्ली में हुए भ्रष्टाचार के विरोध में रैली या धरने की बात हो, गांधीजी के सत्याग्रह के साधनों का भारतीय इतिहास में अनेकबार उपयोग हुआ है।

दलितों को आरक्षण की जरूरत है

पाकिस्तान के साथ संबंधों व देश की राजनीतिक के बारे में उन्होंने उत्तर देने से इनकार कर दिया। एक प्रश्न के जवाब में कहा कि दलितों को आरक्षण की आवश्यकता है, वंचित लोगों को आरक्षण दिया जाना चाहिए। गुजरात में पाटीदार आरक्षण आंदोलन, महाराष्ट्र में मराठा आंदोलन के बारे में उन्होंने कहा कि किसी को भी अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार है।

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