रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस ना होने से सीबीआई को जांच नहीं : हाईकोर्ट

Mukesh Sharma

Publish: Apr, 14 2017 10:22:00 (IST)

Ahmedabad, Gujarat, India
रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस ना होने से सीबीआई को जांच नहीं : हाईकोर्ट

उना में दलितों पर अत्याचार मामले की जांच केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की मांग को लेकर

अहमदाबाद।उना में दलितों पर अत्याचार मामले की जांच केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की मांग को लेकर की गई जनहित याचिका को गुजरात उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने इसे रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस की श्रेणी में न आते होने का हवाला देते हुए इसकी जांच सीबीआई को सौंपने की मांग खारिज कर दी। मामले में जांच कर रही सीआईडी क्राइम की अब तक की जांच पर संतोष जताया है।

उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी व न्यायाधीश वी.एम.पंचोली की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया।पीडि़तों की ओर से सामाजिक कार्यकर्ता कांतिभाई चावड़ा की ओर से वकील रत्ना वोरा के जरिए जनहित याचिका दायर करते हुए मांग की गई थी कि मामले की जांच सीआईडी क्राइम की ओर से उचित ढंग से नहीं की जा रही है। यह एक रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस है, जिससे इसकी जांच सीबीआई को सौंपनी चाहिए।

इसमें न्यायालय को बताया था कि उना में 11 जुलाई 2016 को दलितों पर अमानवीय तरीके से अत्याचार किया गया था। तथाकथित गोरक्षकों की ओर से उन्हें सरेआम पीटा गया। ये दलित युवक अपने परंपरागत काम के तहत मृत गायों का चमड़ा निकाल रहे थे। याचिका में कहा गया कि गुजरात में दलितों पर प्रताडऩा के मामले घट रहे हैं। इससे पहले थानगढ़ में हुए हत्याकांड में पुलिस ने योग्य जांच न करते हुए सी समरी भर दी थी। अब उना दलित प्रताडऩा मामले की जांच भी सीआईडी क्राइम योग्य तरह से नहीं कर रही है। दवाब में जांच कर रही है, जिससे न्याय नहीं दिलाया जा सकता है। जिससे इसकी जांच सीबीआई को सौंपनी चाहिए।

वहीं मुख्य सरकारी वकील मनीषा लव कुमार की ओर से खंडपीठ को बताया गया कि सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कदम उठाए। प्राथमिकी दर्ज करने के बाद जांच सीआईडी क्राइम को सौंप दी।

इसके अलावा उच्च अधिकारियों की एक विशेष जांच समिति भी बनाई। इसमें आरोप-पत्र भी पेश किया जा चुका है। यह मामला सुप्रीमकोर्ट की निर्देशिका के तहत रेयरेस्ट ऑफ द रेयर मामले की श्रेणी में नहीं आता है,जिससे इसकी जांच सीबीआई को नहीं सौंपी जानी चाहिए। सरकार की दलीलों को ग्राह्य रखते हुए खंडपीठ ने याचिकाकर्ता की मांग को खारिज कर दिया।

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