चाइनीज डोर पर रोक, पालन कराए सरकार

Pushpendra RP

Publish: Jan, 13 2017 08:59:00 (IST)

Ahmedabad
चाइनीज डोर पर रोक, पालन कराए सरकार

हाईकोर्ट ने जनहित याचिकाओं पर सुनाया फैसला

अहमदाबाद. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की ओर से चाइनीज डोर के साथ कांच लेपित डोर पर लगाए गए प्रतिबंध को गुजरात उच्च न्यायालय ने भी जायज ठहराते हुए इस पर लगाई रोक की पालना कराने के लिए राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं।
गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश आर सुभाष रेड्डी और न्यायाधीश वी.एम.पंचोली की खंडपीठ ने इस मामले में दायर की गई जनहित याचिकाओं की सुनवाई करने के बाद ये फैसला सुनाया।
हाईकोर्ट के फैसले में कहा गया है कि चाइनीज डोर, कांच लेपित डोर की खरीदी, बिक्री, उत्पादन पर रोक लगाने के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए। जो इसका संग्रह करते हैं उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
हाईकोर्ट ने अवलोकन किया कि चाइनीज डोर, कांच लेपित डोर या फिर नुकसान पहुंचाने वाली वस्तुओं से बनी डोर का उपयोग खतरनाक है। इस प्रकार की डोर से होने वाली हानियों की जानकारी लोगों को देने के लिए सरकार को जागरुकता कार्यक्रम करने चाहिए।
याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया था कि लोग उत्तरायण पर्व से पहले ही पतंग को उड़ाना शुरू कर देते हैं, बाद में भी ये सिलसिला जारी रहता है। चाइनीज डोर पर प्रतिबंध होने के बावजूद भी इसकी बिक्री की जा रही है। इससे ना सिर्फ पक्षियों बल्कि व्यक्तियों की भी जानें गईं हैं।
उधर पीपुल फॉर एथिकल ट्रिटमेंट ऑफ एनिमल्स (पीटा) की ओर से दलील दी गई कि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने कांच लेपित मांझे पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है। लेकिन सरकार इस आदेश से उपर जाकर कांच लेपित मांझे पर प्रतिबंध नहीं लगा रही है। इसलिए उच्च न्यायालय को भी इस पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।
राज्य सरकार की दलील थी कि कहा कि उत्तरायण राज्य का एक बड़ा त्योहार है। यह आम लोगों का उत्सव है और इसे मनाना राज्य के लोगों का मौलिक अधिकार है। चाइनीज, सिंथेटिक व प्लास्टिक डोर पर प्रतिबंध को लेकर अधिसूचना जारी की है। अल्पसंख्यक समाज के लोग इसके उत्पादन से जुड़े हैं। परिवार के सभी सदस्य इस पर्व पर साथ होते हैं। यह हजारों वर्ष पुरानी परंपरा है। आज लोग पर्यावरण का जतन करते हैं, लेकिन अचानक आम लोगों पर कुछ नियंत्रण लगाना रोड़े के समान है। वर्तमान परिस्थतियों में राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना उचित है। आम लोगों को उत्सव मनाने व आनंद करने पर रोक नहीं लगाई जा सकती।

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