'वेतन पर परेशानी नहीं हो, इसलिए उपलब्ध कराएं कैश'

Shankar Sharma

Publish: Nov, 30 2016 12:40:00 (IST)

Ahmedabad, Gujarat, India
'वेतन पर परेशानी नहीं हो, इसलिए उपलब्ध कराएं कैश'

गुजरात उच्च न्यायालय ने नोटबंदी मामले पर केन्द्र सरकार व भारतीय रिजर्व बैंक को मौखिक आदेश दिया है कि लोगों को वेतन के लिए परेशानी नहीं हो इसके लिए बैंकों को ज्यादा कैश उपलब्ध कराए जाए

अहमदाबाद. गुजरात उच्च न्यायालय ने नोटबंदी मामले पर केन्द्र सरकार व भारतीय रिजर्व बैंक को मौखिक आदेश दिया है कि लोगों को वेतन के लिए परेशानी नहीं हो इसके लिए बैंकों को ज्यादा कैश उपलब्ध कराए जाए। मुख्य न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी व न्यायाधीश वी.एम. पंचोली की खंडपीठ ने केन्द्र व रिजर्व बैंक से यह सुनिश्चित करने को कहा कि पहली दिसम्बर या इसके बाद तक बैंकों में इतना पैसा हो कि लोगों को अपनी सैलरी निकालने में परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

इसके साथ ही खंडपीठ ने सहकारी बैंकों को 500 व 1000 रुपए के नोट नहीं स्वीकारने व नए नोट वितरित नहीं किए जाने के निर्णय के मामले केन्द्र सरकार व भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से जवाव मांगा है।

खंडपीठ ने भावनगर जिला सहकारी बैंक की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान केन्द्र व रिजर्व बैंक से कई सवाल पूछे। खंडपीठ ने कहा कि छोटे किसानों के ज्यादातर खाते सहकारी बैंकों में होते हैं। ऐसे में यदि बैंक इन किसानों को रकम नहीं लेने या देने की बात कहे तब इन किसानों की क्या हालत होगी? खंडपीठ ने रिजर्व  बैंक व केन्द्र से पूछा कि किसानों का पैसा स्वीकार करना बंद किया है तो ये किसान कहां जाएंगे। इसके साथ ही किसानों के सिर्फ इसी बैंक में खाते हैं तो ये पैसा कहां से निकालेंगे? मामले की अगली सुनवाई 5 दिसम्बर को रखी गई है।


याचिका में इस निर्णय को असंवैधानिक करार दिए जाने की गुहार लगाई गई है। याचिकाकर्ता के वकील बी. एम. मांगूकिया ने दलील दी कि केन्द्र का यह निर्णय पूरी तरह अयोग्य है। आरबीआई अधिनियम की धारा 26(2) के तहत करेंसी नोट को विमुद्रीकरण का अधिकार नहीं है।

इसके तहत करेंसी नोट की किसी विशेष सीरीज को विमुद्रीकृत किया जा सकता है और यह निर्णय आरबीआई बोर्ड की सिफारिश के बगैर नहीं हो सकता। लोगों को बैंकों से अपने खुद के पैसे निकालने से मना करने को लेकर कोई भी वैधानिक अधिसूचना नहीं जारी की जा सकती।

मांगूकिया ने केन्द्र के इस निर्णय पर सवालिया निशान उठाए जिसमें सिर्फ जिला सहकारी बैंकों को पुराने नोट स्वीकारने तथा नए नोटों के वितरण पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह दलील दी गई कि जब सरकार ने राष्ट्रीयकृत बैंक, निजी बैंक, शहरी सहकारी बैंकों को यह अधिकार दिए हैं तब सिर्फ जिला सहकारी बैंकों पर यह प्रतिबंध लगाना पूरी तरह भेदभावपूर्ण है। यह संविधान की धारा-14 का पूरी तरह उल्लंघन है।  सुनवाई के दौरान विभिन्न संस्थानों को दिए गए अनेक तरह की छूट पर भी सवाल उठाया गया।

113 करोड़ जमा हैं भावनगर जिला सहकारी बैंक में  
याचिका में यह मांग की गई है कि भावनगर जिला सहकारी बैंक में 113 करोड़ रुपए जमा किए गए नोटों को नए नोटों में बदला जाए। यह बैंक भावनगर, अमरेली, गढडा व बोटाद तहसील में कार्यरत है। बैंक को 76 करोड़ रुपए के ब्याज की हानि हुई है। इस बैंक की सभी शाखाओं फिलहाल कार्यरत नहीं हैं। फिलहाल अभी बैंक के पास करेंसी नोट उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए कोई भी किसान किसी भी शाखा का संपर्क नहीं कर रहा है।

विमुद्रीकरण के कारण बैंक की 90 फीसदी शाखाएं काम नहीं कर रही है। इस बैंक की शाखाएं भावनगर व आसपास के 825 गांवों को अपनी सेवाएं प्रदान करती हैं। यह बैंक इस इलाके के 85 फीसदी लोगों व सहकारी मंडली को ऋण प्रदान करती है। भावनगर जिले के सवा लाख किसान इस बैंक से ऋण लेते हैं। यदि किसानों को यह ऋण नहीं मिलेगा तो इससे उनके फसलों को नुकसान हो सकता है। खाद व बीज भी खरीदने की मुश्किलें हो सकती हैं। ऋण नहीं मिलने के कारण किसानों की आत्महत्या तक की स्थिति पैदा हो सकती है।

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