भांडवपुर महातीर्थ में मुनिराज को मिली आचार्य की पदवी

Shruti Agrawal

Publish: Apr, 22 2017 12:54:00 (IST)

Alirajpur, Madhya Pradesh, India
भांडवपुर महातीर्थ में मुनिराज को मिली आचार्य की पदवी

नूतन आचार्यों का नित्यसेन सूरीश्वर व जयरत्न सूरीश्वर नामकरण

चन्द्रशेखर आजाद नगर.  गुरुदेव राजेंद्र सूरीश्वर की पट्ट परम्परा के षष्टम आचार्य लोकसंत गच्छाधिपति जयंतसेन सूरीश्वर के देव लोकगमन पश्चात उत्तराधिकारी के रूप में उनकी भावनानुसार महावीर जैन भाण्डवपुर तीर्थ द्वारा आयोजित आचार्य पदवी प्रदान कार्यक्रम में बुधवार को लोकसंत के वरिष्ठ शिष्य मुनि नित्यानन्द विजय व संयमवय स्थविर मुनिराज शांतिविजयी के शिष्य मुनि जयरत्नविजय को आचार्य पदवी प्रदान कर नूतन आचार्य का क्रमश: नित्यसेन सूरीश्वर व जयरत्नसूरीश्वर नामकरण कर लोकसंत की प्रतिमा के समक्ष मुनिमंडल, साध्वीवृंद व श्रीसंघ की उपस्थिति में आचार्य पदग्रहण करवाया गया। 


नूतन आचार्यों को लोकसंत के सप्तम पट्टधर के रूप में नामकरण घोषणा का लाभ मिलापचंद जेठमल चौधरी ने लिया।  इस अवसर पर अभा त्रिस्तुतिक जैन श्रीसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वाघ भाई वोरा, विधायक चेतन्य कश्यप, संघ के वरिष्ठ मिलापचन्द चौधरी, सोमतमल डोसी, मूलचंदजी सूखराज बालगोता, जेठमल बालगोता, डाडमचंद जैन, मिलियन ग्रुप, शांतिलाल रामाणी,  रमेश लुक्कड़, बाबुलाल कटारिया, जेके संघवी सहित अनेक श्रीसंघों एवं परिषद के प्रतिनिधि प्रमुख रूप उपस्थित थे।
दोनों नूतन आचार्यों द्वारा पदवी प्राप्त करने के बाद उपस्थित मुनिमंडल, साध्वीवंृद ने उनके सिर पर वासक्षेप प्रदान कर शुभ भावना व्यक्तकी। नूतन आचार्यद्वय ने अपने प्रवचन में कहा, वे संघ, समाज और गुरूगच्छ के हित में सदैव तत्पर रहकर लोकसन्तश्री की गरिमा बढ़े ऐसे काम करेंगे। तीर्थ में 29 श्रमण-श्रमणियों की बड़ी दीक्षा विधि भी नूतन आचार्यों की निश्रा में संपन्न हुई।
देशभर में 108 गुरु मंदिरों का निर्माण होगा
कार्यक्रम में शिष्य परिवार द्वारा लोकसंत जयंतसेन सूरीश्वरजी मसा की स्मृति में देशभर में 108 गुरू मंदिरों के निर्माण का संकल्प लिया गया। इसमें सर्वप्रथम भाण्डवपुर तीर्थ में भव्य स्मारक का निर्माण तथा 72 जिनालय भीनमाल, 68 जिनालय, दादा गुरू जन्मभूमि भरतपुर, गुरू जन्मभूमि पेपराल, जयंतसेन म्यूजियम मोहनखेड़ा तीर्थ सहित अन्य स्थानों पर गुरू मंदिरों का निर्माण होगा। 11 स्थानों पर गुरू मंदिर निर्माण का लाभ सुमेरमल हजारीमल लुक्कड़ परिवार भीनमाल ने लिया है। लोकसंत की पुण्य स्मृति में भाण्डवपुर तीर्थ में अष्ठ दिवसीय पुण्योत्सव व दोनों आचार्यों का पद अनुमोदना महोत्सव 11 से 18 मई तक आयोजित किया जा रहा है।

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned