बाहुबली करवरिया बंधु के वारिस पर पहली बार मुकदमा, CM योगी के आदेश से मची खलबली

Allahabad, Uttar Pradesh, India
बाहुबली करवरिया बंधु के वारिस पर पहली बार मुकदमा, CM योगी के आदेश से मची खलबली

सीएम योगी आदित्यनाथ के आदेश पर दर्ज हुआ है मुकदमा।

इलाहाबाद,सूबे में सत्ता संभालने के बाद सीएम योगी के आदेश पर लगातार बाहुबलियों के खिलाफ की जा रही कानूनी कार्यवाही का शिकंजा अब उनके अपने पार्टी के नेताओं तक पहुंच गया है। योगी आदित्यनाथ की सरकार पर कानून व्यवस्था को लेकर भले ही तमाम सवाल खड़े हो रहे हो। लेकिन अपराध की दुनिया और बाहुबल के सहारे राजनीति में आए हुए लोगों पर लगातार शिकंजा कस रहा है।




जिले के सभी बाहुबलियों पर शिकंजा
जिले के पूर्व सांसद अतीक अहमद बाहुबली भदोही विधायक विजय मिश्रा के बाद अब जिले के सबसे बड़े राजनीतिक करवरिया परिवार पर योगी सरकार की नजर टेढ़ी हुई है। करवरिया परिवार जिले में अपनी राजनीतिक धमक के साथ अपनी दबंगई के लिए जाना जाता है। ताजा मामला शहर के पुराने इलाके में करवरिया बंधुओं के होटल की दूकान को लेकर है। शहर के पुराने इलाके चैक में होटल वशिष्ठ  जिसके नीचे सालों से चल रही है एक सराफा की दुकान को लेकर सराफा व्यवसाई और करवरिया बंधुओं में विवाद चल रहा है।




मामला यह है कि कुछ दिनों पहले चैक इलाके में करवरिया बंधुओं के सबसे छोटे भाई पूर्व एमएलसी सूरजभान करवरिया के बेटे वैभव करवरिया और सराफा व्यवसाई के बीच गाड़ी की पार्किंग को लेकर विवाद हुआ। थाने में दर्ज मुकदमे के तहत इस मामले में करवरिया बंधु वैभव करवरिया पर हत्या का प्रयास साजिश समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है।आरोप है कि करवरिया बंधुओं के होटल के नीचे सर्राफा की दुकान है जिसमें तीन 3 मई को एक विवाह होने के बाद 5 जून को इन तीनों भाइयों के कहने पर वैभव और जसराज आर्यों ने सराफा दुकान के मालिक सुनील वर्मा पर हमला किया दुकान पर बैठे सुनील वर्मा को बचाने की कोशिश में उनके पत्नी जूली वर्मा से भी अभद्रता की और मारपीट के आरोप है कि वैभव करवरिया ने गोली भी चला ली लेकिन जो मिस हो गई और बच गए ।




मुख्यमंत्री ने दिया दखल
नया मामला करवरिया परिवार और तत्कालीन तत्कालीन मेजा विधायक नीलम करवरिया के से जुड़ा हुआ था जिसके चलते पुलिस भी कोई भी कार्यवाही करने से बच रही थी मामले की तहरीर कोतवाली थाने में दी गई लेकिन कोई कार्यवाही ना होने पर यह मामला  5 कालिदास मार्ग योगी तक पहुंचा। और मुख्यमंत्री के आदेश के बाद कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है ।जिसमे करवरिया तीनो भाइयो पर साजिश और वैभव करवारिया सहित अज्ञात लोगो पर हत्या के प्रयास का मुकदमा कायम हुआ।




सफेदपोशों माफियाओं की जब बनी लिस्ट
योगी सरकार के आते ही पूर्व सांसद अतीक अहमद पर शियाट्स मामले में जेल जाना पड़ा। भदोही विधायक विजय मिश्र का इलाहाबाद स्थित बंगला सीज किया गया।अतीक के बाद उनके भाई अशरफ के खिलाफ भी नोटिस तामील की गई। बीते समय में तत्कालीन कप्तान शलभ माथुर ने जिले के सफेदपोश माफियाओं की एक लिस्ट तैयार की जिसे देख सब हैरान रह गए ।जिनमें खनन पट्टे और तमाम तरीके की ठेकेदारी जैसे मामले जुड़े थे। जिसमें अतीक अहमद सहित विजय मिश्रा नाम शामिल था।





बाहुबलियों के समर्थको में खलबली
बाहुबल और राजनीतिक सांठगांठ से दबंगई और अपना खौफ कायम किए नेताओं पर योगी सरकार दबाव बनाने में कितनी सफल होगी। यह देखने वाली बात होगी। लेकिन अब इन नेताओं के बाद उनके समर्थकों में खलबली मच गई है। जिले भर के उनके करीबी और समर्थक  शहर से गायब हो रहे है। कभी शहर में बैठने वाले वह चर्चित नाम कुछ दिनों से गायब है जिन पर पुलिस की नजर बनी हुई थी ।अतीक और असरफ के ऊपर कार्यवाही के बाद उनके समर्थक परेशान रहे तो वही विजय मिश्रा का बंगला सीज कर योगी सरकार ने कार्यवाही के कड़े संकेत दे दिए। जब विरोधियों ने इसे विरोधी राजनीति का षड्यंत्र बताया तो मौका मिलते ही अपनी पार्टी से जुड़े नेता को भी योगी ने नहीं छोड़ा और विरोधियों को चुप करा दिया।





कई कारनामे पर कोई मुकदमा नही
करवरिया परिवार के दबंगई के किस्से तो पूरे जिले के हर इलाके में आपको सुनने के मिलेंगे लेकिन जवाहर पंडित हत्याकांड के अलावा करवरिया बंधु और इस परिवार पर कभी किसी ने कोई मुकदमा कराने की हिम्मत नहीं की पूर्व सांसद कपिल मुनि करवरिया और पूर्व विधायक उदयभान करवरिया पूर्व मंत्री सूरजभान करवरिया इन तीनो भाइयो पर आज तक केवल एक ही मुकदमा दर्ज हुआ जो कि सपा विधायक हत्या कांड का है।





पहली बार करवरिया बन्धु के वारिस पर मुकदमा
करवरिया परिवार पर इस कार्यवाही को इसलिए बड़ा माना जा रहा है। कि करवरिया तीनो भाइयो के अलावा पहली बार परिवार के किसी सदस्य पर मुकदमा दर्ज हुआ है । शहर में इस परिवार को जानने वाले लोगों का कहना है कि अगर पुलिस ने इस मामले की सही जांच ना  की और परिवार का कोई और सदस्य फंसता है इसके नतीजे बहुत बुरे होंगे ।क्योंकि करवरिया बन्धु के साथ उनकी खानदानी शाख दांव पर है। और वह नही चाहेंगे कि किसी भी पारिवारिक सदस्य पर आपराधिक पृष्ठभूमि का असर पड़े।

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